वित्त मंत्रालय का खुलासा, आर्टिकल 370 हटने के बाद J&K बैंक में 2360 करोड़ के 128 धोखाधड़ी मामले
Jammu Kashmir News: केंद्रीय वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने 2020–21 और 2024–25 के बीच धोखाधड़ी के 128 मामलों की सूचना दी, जिनमें कुल ₹2,360 करोड़ से अधिक की राशि शामिल थी.

- बैंक के लोन पोर्टफोलियो में 'कंसंट्रेशन रिस्क' का मामला सामने आया.
कभी जम्मू और कश्मीर राज्य का गौरव मानी जाने वाली राज्य सरकार की इस अर्ध-सरकारी बैंक को 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं का सामना करना पड़ा है. केंद्रीय वित्त मंत्रालय की 24 मार्च को संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से अब तक भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा लगभग ₹2,360 करोड़ से जुड़े धोखाधड़ी के 128 मामले दर्ज किए गए हैं.
खुलासों के अनुसार, बैंक ने 2020–21 और 2024–25 के बीच धोखाधड़ी के 128 मामलों की सूचना दी, जिनमें कुल ₹2,360 करोड़ से अधिक की राशि शामिल थी. साल-दर-साल के रुझान से पता चलता है कि धोखाधड़ी की घटनाओं में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हुई है. जहां 2020–21 में 23 मामले थे, वह 2021–22 में घटकर 19 रह गए, लेकिन इसके बाद 2022–23 में यह थोड़ा बढ़कर 20 हो गए और 2023–24 में इसमें तेज़ी से बढ़ोतरी देखी गई और यह मामले 32 हो गए.
धोखाधड़ी में 512 बैंक कर्मचारी शामिल
हालांकि जम्मू-कश्मीर बैंक में इन धोखाधड़ियों में 512 बैंक कर्मचारियों के शामिल होने की बात सामने आई है. हालांकि, ये मामले हाल के वित्तीय वर्षों के दौरान सामने आए हैं और ये जवाबदेही में बड़ी कमियों को उजागर करते हैं. ये चौंकाने वाले विवरण संसद में नेशनल कॉन्फ्रेंस के राज्यसभा सदस्य सज्जाद अहमद किचलू द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में सामने आए हैं, जिसपर उन्होंने गंभीर चिंता व्यक्त की है. वित्तीय अनियमितताओं और संसदीय प्रश्नों से जुड़े मुख्य विवरणों के अनुसार, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने खुलासा किया कि पिछले पांच वर्षों में J&K बैंक में धोखाधड़ी के 128 मामले सामने आए जिनमें 512 कर्मचारी शामिल थे.
इन मामलों में बड़े पैमाने पर ऋण धोखाधड़ी शामिल थी, जिसमें वरिष्ठ प्रबंधन सहित 512 कर्मचारियों पर बैंकिंग नियमों का पालन न करने और धोखाधड़ी वाले ऋणों को मंज़ूरी देने के आरोप लगे हैं. दरअसल, राज्यसभा सदस्य सज्जाद अहमद ने 24 मार्च 2026 को J&K बैंक में धोखाधड़ी की स्थिति के संबंध में महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए थे. इसके साथ ही इस मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई तथा डूबे हुए धन की वसूली में हुई प्रगति के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी थी.
नहीं की गई कर्मचारियों की जवाबदेही तय
अब सामने आए डेटा से पता चलता है कि अलग-अलग फाइनेंशियल सालों (2020-2025) में कर्मचारियों की जवाबदेही में काफी कमियां रहीं हैं. सबसे ज़्यादा कर्मचारी 2020-21 में शामिल थे, जिनकी संख्या 122 थी. इस मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले दो फाइनेंशियल सालों में मामलों की बढ़ती संख्या से पता चलता है कि धोखाधड़ी का पता लगाने, उसकी रिपोर्ट करने या असल में धोखाधड़ी होने के मामले बढ़े हैं.
क्या कहते हैं आंकड़े?
रिपोर्ट में पिछले पांच सालों में दर्ज की गई 128 FIRs का भी ब्योरा दिया गया है, जिसके तहत 2019-20 में 23, 2020-21 में 19, 2021-22 में 20, 2022-23 में 32, और 2024-25 में फिर से 34 FIRs दर्ज की गईं. राज्यसभा के जवाब में बैंक के लोन पोर्टफोलियो में मौजूद 'कंसंट्रेशन रिस्क' (कुछ ही जगहों पर ज़्यादा निवेश का जोखिम) पर भी रोशनी डाली गई है. बैंक से लोन लेने वाले टॉप 100 लोगों पर लगभग ₹4,700 करोड़ का बकाया है, जिससे पता चलता है कि बैंक का ज़्यादातर पैसा कुछ ही बड़े खातों में फंसा हुआ है.
डेटा से पता चलता है कि पिछले कुछ सालों में लोन 'राइट-ऑफ' (बट्टे खाते में डालना) करने का सिलसिला जारी रहा है, हालांकि इसमें थोड़ा-बहुत उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. साल-दर-साल का ट्रेंड इस प्रकार है:
2019–20: ₹13.15 करोड़
2020–21: ₹4.50 करोड़
2021–22: ₹29.60 करोड़
2022–23: ₹38.17 करोड़
2023–24: ₹28.18 करोड़
2024–25: ₹18.71 करोड़
2025–26 (अब तक): ₹12.50 करोड़
हालांकि, ऐसा लगता है कि हाल के सालों में लोन 'राइट-ऑफ' करने की रफ़्तार कुछ धीमी हुई है, लेकिन कुल मिलाकर यह ट्रेंड बताता है कि बैंक की 'एसेट क्वालिटी' (संपत्ति की गुणवत्ता) से जुड़ी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं. हालांकि, बैंक ने साफ किया है कि वह लोन लेने वालों की पहचान या उनके लोन से जुड़ी निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकता. बैंक ने इसके लिए 'भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934' की धारा 45E में दिए गए 'गोपनीयता के प्रावधानों' का हवाला दिया है, जिसके तहत लोन से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा करने पर रोक है.














