क्या गरीब अब BPL सूची में रहने का हकदार नहीं? हिमाचल के पूर्व मंत्री ने सुक्खू सरकार पर उठाए सवाल
Himachal Politics: पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक बिक्रम ठाकुर ने हिमाचल सरकार पर गरीबों के हक के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया है. उन्होंने बीपीएल सूची में शामिल होने के लिए आय सीमा को लेकर सवाल उठाए.

Himachal BJP: हिमाचल के पूर्व उद्योग मंत्री एवं बीजेपी विधायक बिक्रम ठाकुर ने मंगलवार को शिमला में कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है. इस दौरान उन्होंने कहा कि हिमाचल की वर्तमान सरकार हर उस वर्ग के खिलाफ काम कर रही है, जिसे सामाजिक सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की सबसे ज्यादा जरूरत है. चाहे बीपीएल सर्वे हो, पंचायतों की स्वायत्तता, कर्मचारी हित, महिला सम्मान या जनसुविधाएं हर मोर्चे पर सरकार ने जनविरोधी निर्णय लिए हैं.
बीपीएल सूची से वंचित करने का आरोप
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि सरकार ने बीपीएल सूची में शामिल होने के लिए सालाना आय ₹50,000 तय की है, लेकिन यह मानक केवल पहले से सूची में दर्ज परिवारों पर ही लागू किया जा रहा है. नए आवेदन करने वाले गरीब परिवारों की वास्तविक आय को तहसील स्तर पर जानबूझकर ₹50,000 से ऊपर दर्शाया जा रहा है, जिससे उन्हें बीपीएल सूची से वंचित किया जा सके.
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी गरीब परिवार को पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार की आवास योजना के तहत एक पक्का कमरा मिला है तो क्या यह अब गरीबी की श्रेणी से बाहर हो गया? सरकार स्पष्ट करे कि योजना का लाभ लेने वाला गरीब क्या अब बीपीएल सूची में रहने का हकदार नहीं है? पूर्व की तुलना में भूमि की अधिकतम सीमा दो हेक्टेयर से घटाकर एक हेक्टेयर करना सरकार की गरीब विरोधी मानसिकता का प्रमाण है.
बिक्रम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने पंचायतों की वित्तीय और प्रशासकीय शक्तियां समाप्त कर दी हैं. अब ग्राम सभा के निर्णयों को दरकिनार कर अधिकारियों को यह अधिकार दे दिया गया है कि वे तय करें कौन बीपीएल सूची में होगा. पंचायत फंड के ब्याज को वापस लेना, अनस्पेंट राशि पर तीन दिनों के भीतर रिवर्सल का आदेश देना और संपत्ति कर की आय भी छीन लेना – ये सब दर्शाते हैं कि सरकार पंचायतों को पूरी तरह से कमजोर करना चाहती है.
राज्य की ग्राम पंचायतों में तैनात ग्राम रोजगार सेवकों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है. सिलाई अध्यापिकाएं, पंचायत चौकीदार और अन्य मानदेयी कर्मचारी भी बीते पांच महीनों से भुगतान के इंतजार में हैं. चौकीदारों के लगभग 900 पद रिक्त हैं, जिन्हें भरने की कोई प्रक्रिया सरकार ने नहीं चलाई. जिन चौकीदारों ने 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया, उन्हें दैनिक वेतन भोगी तक नहीं बनाया जा रहा. बिक्रम ठाकुर ने कहा कि आज प्रधान को खुद चौकीदार का काम करना पड़ रहा है – इससे ज्यादा शर्मनाक स्थिति पंचायती राज व्यवस्था की कभी नहीं रही.
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