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हिमाचल: किनौर जिले से शुरू हुई जलिय पक्षियों की गणना, AWC ने की शुरुआत

Kinnaur News: किनौर जिले से पहली बार एडब्ल्यूसी (एशियन वॉरफॉल सेंसस) ने पक्षियों की गणना का अभियान शुरू की है. यह गणना प्रदेश भर में की जाएगी .

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले के कूपा डैम, सांगला वैली में एशियन वॉटरबर्ड सेंसस (Asian Waterbird Census) के तहत पक्षी विशेषज्ञों ने पक्षी गणना अभियान के दौरान 56 पक्षी प्रजातियों को कैद किया है. जिसमें 18 वाटर बर्ड्स एवं 38 Terrestrial Birds जैसी विभिन्न प्रजातियों की कुल संख्या 183 आंकी गई है.

एडब्ल्यूसी (एशियन वॉटरबर्ड सेंसस) की शुरुआत 1987 में भारतीय उपमहाद्वीप में हुई थी. तब से यह एशिया के एक बड़े क्षेत्र को कवर कर चुका है, जिसमें अफगानिस्तान से पूर्व की ओर जापान, दक्षिणपूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. इस प्रकार, यह जनगणना संपूर्ण पूर्वी एशियाई-ऑस्ट्रेलियाई फ्लाईवे और मध्य एशियाई फ्लाईवे के एक बड़े हिस्से को कवर करती है.

जलपक्षी आर्द्रभूमि की उत्पादकता के संकेत

जलपक्षी आर्द्रभूमि की उत्पादकता के प्रमुख संकेतकों में से एक हैं. आर्द्रभूमि इन आकर्षक प्रजातियों के लिए भोजन, विश्राम, बसेरा और चारागाह प्रदान करती हैं. इसमें जलपक्षियों की आबादी की स्थिति का आंकलन और निगरानी की जाएगी. जिसके आधार पर जलपक्षियों के लिए उच्च महत्व वाली आर्द्रभूमियों की पहचान कर पक्षियों के संरक्षण एवं संवर्धन के उपाय किए जाते हैं. 

हर साल जनवरी और फरवरी में, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के हजारों स्वयंसेवक अपने-अपने देशों के आर्द्रभूमि क्षेत्रों का दौरा करते हैं और जलपक्षियों की गिनती करते हैं. यह नागरिक विज्ञान कार्यक्रम एशियाई जलपक्षी जनगणना (AWC) कहलाता है. 

एशियाई जलपक्षी जनगणना क्या है?

AWC, वेटलैंड्स इंटरनेशनल द्वारा समन्वित वैश्विक जलपक्षी निगरानी कार्यक्रम, अंतर्राष्ट्रीय जलपक्षी जनगणना (IWC) का एक अभिन्न अंग है. यह अफ्रीका, यूरोप, पश्चिम एशिया , नियोट्रॉपिक्स में अंतर्राष्ट्रीय जलपक्षी जनगणना के अन्य क्षेत्रीय कार्यक्रमों के साथ-साथ चलता है और मध्य अमेरिका और कैरिबियन के लिए साझेदारों के माध्यम से संचालित होता है .

इस अभियान के मुख्य बिन्दु 

  • पक्षी गणना अभियान का आयोजन 15 प्रतिभागियों की एक टीम द्वारा किया गया, जिन्हें तीन समूहों में विभाजित किया गया.
  • इसका उद्देश्य कुपा डैम बसपा नदी में घरेलू और प्रवासी दोनों पक्षियों की आबादी का अनुमान करना है.
  • टीमों ने कुप्पा डैम , बसपा नदी और आसपास के संरक्षित वनों सहित स्थानों पर व्यापक पक्षी गणना की.

सर्वेक्षण और कार्यप्रणाली

6 से अधिक पक्षी प्रेमियों और वन्यप्राणी परिक्षेत्र सांगला की पूरी टीम ने जलपक्षियों की गणना और अन्य पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण करने के लिये पूर्व-निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए 5 स्थलों का सर्वेक्षण किया. पर्यवेक्षकों ने कृत्रिम झील और पानी के छोटे-छोटे तालाबों के आसपास पक्षियों के व्यवहार और गतिविधियों को भी रिकॉर्ड किया.

नागरिक विज्ञान पहल

एशियाई जलीय पक्षी गणना हिमाचल प्रदेश के जिला किन्नौर के कुप्पा डैम हॉटस्पॉट में एक साथ की गई. यह पहल वन्यप्राणी मंडल सराहन वन विभाग एवं जिला प्रशासन किन्नौर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया. और इसमें विभिन्न गैर-सरकारी संगठन (NGO) भी शामिल थे.

सर्वेक्षण के दौरान ,Ibisbill, Mallard , Great Cormorant , Common Pochard , Gargeny , Green winged Teal. ,Common Coot , Northern Shovler , Black Winged Stilt , Sandpipers , Forktails , Wagtails , Redstarts, Brown Dipper एवं अन्य प्रजातियों को रिकॉर्ड किया गया.  

इबर्ड रीजनल कोऑर्डिनेटर ने क्या बताया?

हिमाचल प्रदेश के इबर्ड रीजनल कोऑर्डिनेटर ने सन्तोष कुमार ठाकुर बताया कि यह सर्वेक्षण 17 जनवरी तक पूरे हिमाचल प्रदेश में चलेगा जिसमें पूरे हिमाचल प्रदेश के सभी पक्षी हॉटस्पॉट, वेटलैंड्स को कवर किया जाएगा, ताकि हिमाचल प्रदेश में पाई जाने वाली विभिन्न पक्षियों प्रजातियों के बारे में और उनकी संख्या का अनुमान लगाया जा सके. 

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