Gujarat: गांधीनगर में टाइफाइड का प्रकोप! 152 मरीज भर्ती, 2 बच्चों की मौत, अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़
Gujarat News: गांधीनगर में गंदे पानी से की वजह से महामारी फैल गई है, जिससे टाइफाइड के मामलों में अचानक बढ़ोतरी हुई है. अस्पताल में 152 मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें से 50 मरीजों का टेस्ट पॉजिटिव आया है.

Gandhinagar Typhoid Epidemic: गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर में स्वास्थ्य की स्थिति बहुत चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है. शहर के अलग-अलग इलाकों में गंदे पानी की वजह से पानी से फैलने वाली महामारी फैल गई है, जिससे टाइफाइड के मामलों में अचानक बढ़ोतरी हुई है. गांधीनगर सिविल अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ देखी जा रही है.
50 मरीजों का टेस्ट पॉजिटिव आया
लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, अस्पताल में कुल 152 मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें से 50 मरीजों का टेस्ट पॉजिटिव आया है और उनमें टाइफाइड होने की पुष्टि हुई है. जबकि 108 अन्य मरीजों में संदिग्ध लक्षण पाए गए हैं. स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दो बच्चों को तुरंत ICU में शिफ्ट कर दिया गया है, क्योंकि उनकी हालत गंभीर पाई गई. अब तक इलाज के बाद ठीक हुए 25 मरीजों को छुट्टी दे दी गई है.
मौतें टाइफाइड की वजह से हुई- कांग्रेस
इस महामारी के दौरान दो बच्चों की मौत से पूरे जिले में डर का माहौल बन गया है. हालांकि, इन मौतों पर विवाद भी हुआ है. विपक्षी कांग्रेस ने दावा किया है कि ये मौतें टाइफाइड की वजह से हुई हैं, लेकिन सिविल सुपरिटेंडेंट ने इस दावे को खारिज कर दिया है. हॉस्पिटल सुपरिटेंडेंट के मुताबिक, दहेगाम के बच्चे की मौत DIC के साथ सेप्टिक शॉक की वजह से हुई और अदिवाड़ा के बच्चे की मौत एक्यूट वायरल एन्सेफलाइटिस की वजह से हुई, जिसका टाइफाइड से सीधा संबंध नहीं है. हालांकि, हॉस्पिटल के बच्चों के डिपार्टमेंट में बेड की कमी की वजह से, सिस्टम ने तुरंत एक अलग वार्ड शुरू कर दिया है और जिले के दूसरे सेंटर्स से पीडियाट्रिशियन (बच्चों के डॉक्टर) की टीम को हालात से निपटने के लिए सिविल हॉस्पिटल बुलाया गया है.
महामारी की मुख्य वजह क्या है?
महामारी की मुख्य वजह गंदा पानी सामने आया है. शहर के सेक्टर 24, 25, 26, 27 के साथ-साथ अदिवाड़ा और GIDC इलाके सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं. कॉर्पोरेशन की हेल्थ टीमों ने युद्ध स्तर पर काम किया है. अब तक 20,800 से ज़्यादा घरों का हेल्थ सर्वे पूरा हो चुका है, जिसमें 90,000 की आबादी शामिल है. सतर्कता के तौर पर 30,000 क्लोरीन टैबलेट और 20,600 ORS पैकेट बांटे गए हैं. आदिवाड़ा इलाके में, जहां पानी की बहुत ज़्यादा समस्या है, नगर निगम टैंकरों से पीने का पानी दे रहा है और लीकेज ढूंढने का काम भी चल रहा है.
सिस्टम के लिए चिंता की बात यह है कि 4 जनवरी तक सिर्फ़ दो दिनों में 119 केस दर्ज किए गए. अभी 94 मरीज़ों का इलाज चल रहा है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, टाइफाइड के इन्क्यूबेशन पीरियड को देखते हुए डर है कि 20 जनवरी तक केस की संख्या 350 के पार जा सकती है. ऐसे में लोगों से उबला हुआ पानी पीने और बाहर का खाना न खाने की अपील की गई है.
Source: IOCL






















