गुजरात: 40 बाघों की खालें और 133 नाखून! मंदिर के पुराने मकान से हुआ चौंकाने वाला खुलासा
Gujarat News: नर्मदा जिले के राजपीपला में धर्मेश्वर महादेव मंदिर के पुराने मकान से 40 से अधिक बाघों की खालें और 133 नाखून मिले. वन विभाग ने मामले में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

नर्मदा जिले के राजपीपला शहर के पास स्थित प्रसिद्ध धर्मेश्वर महादेव मंदिर के पुराने मकान से जानवरों के नाखून और खालें मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है. माना जा रहा है कि गुजरात में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में बाघों के अवशेष बरामद हुए हैं.
तेज दुर्गंध आने पर हुआ खुलासा
राजपीपला शहर के हनुमान धर्मेश्वर मंदिर में पुराने और जर्जर मकान की मरम्मत के दौरान तेज दुर्गंध आने पर मंदिर ट्रस्टियों ने वन विभाग को सूचना दी. इसके बाद राजपीपला रेंज के फॉरेस्ट ऑफिसर जिग्नेश सोनी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और एक कमरे से बाघों की खाल और नाखूनों से भरी एक पूरी पेटी बाहर निकाली गई.
133 से अधिक बाघों के नाखून मिले
वन विभाग की टीम को मौके से लुप्तप्राय बाघों की 37 पूरी खालें, 4 खालों के टुकड़े और करीब 133 बाघों के नाखून मिले हैं. संदिग्ध पाए जाने पर खालों और नाखूनों को एफएसएल जांच के लिए भेज दिया गया है. प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ये खालें करीब 35 साल से अधिक समय से पेटी में रखी हुई थीं.
पुजारी महाराज के कमरे से मिली बाघों की खाल!
जिस कमरे से बाघों की खाल और नाखूनों से भरी पेटी मिली है, वह मंदिर के पुजारी महाराज का कमरा था, जिनका तीन महीने पहले निधन हो चुका है. मंदिर ट्रस्टी प्रकाश व्यास ने बताया कि ये महाराज मध्यप्रदेश के थे और बाहर से अन्य साधुओं का आना-जाना भी रहता था, जिनमें से कुछ साधु रात में ठहरते भी थे.

आरएफओ जिग्नेश सोनी ने बताया कि जांच के दौरान कुल 40 से अधिक बाघों की खालें और 133 से ज्यादा नाखून बरामद किए गए हैं. इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा 172 के तहत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर सरकार को सूचना दे दी है.
भारत का राष्ट्रीय पशु होने के बावजूद बाघ आज भी सुरक्षित नहीं है. एक समय था जब भारत के जंगलों में करीब 40 हजार बाघ विचरण करते थे, लेकिन आज इनकी संख्या सिमटकर मुश्किल से 4 हजार के आसपास रह गई है. हैरानी की बात यह है कि इतने सख्त कानूनों और सुरक्षा दावों के बावजूद शिकार और तस्करी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. ऐसे में हर नई घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर बाघों की सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हो रही है और वन्यजीव संरक्षण के दावे कितने मजबूत हैं.
धवल सतीशभाई आचार्य की रिपोर्ट.
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