दिल्ली: लाल किला घूमने जाने वालों के लिए खुशखबरी! अब पूरे हफ्ते खुलेगा, ASI ने लिया फैसला
Delhi Red Fort: लाल किला परिसर को भारतीय पुरातत्व विभाग की तरफ अहम फैसला लिया गया है. पर्यटकों और आम जनता के लिए लाल किला हफ्ते के हर दिन खुलेगा. इस आदेश पर महानिदेशक यदुबीर सिंह ने हस्ताक्षर किए हैं.

राजधानी दिल्ली की मशहूर और ऐतहासिक इमारत लाल किला में घूमने जाने वाले पर्यटकों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. लाल किला परिसर अब हर दिन खुलेगा. यानी जो पहले सोमवार को बंद रहता था, अब नहीं रहेगा. लाल किला परिसर को भारतीय पुरातत्व विभाग की तरफ अहम फैसला लिया गया है. भारतीय पुरातत्व विभा ने 13 फरवरी को इसका आदेश जारी किया था.
आदेश में कहा गया है कि पर्यटकों और आम जनता के लिए लाल किला हफ्ते के हर दिन खुला रहेगा. इस आदेश पर महानिदेशक यदुबीर सिंह ने अपने हस्ताक्षर किए हैं. बता दें कि लाल किला स्मारक प्रत्येक हफ्ते सोमवार के दिन बंद रहता था.
टूर ऑपरेटरों ने किया फैसले का स्वागत
भारतीय पुरातत्व विभाग के इस फैसले का टूर ऑपरेटरों और पर्यटकों ने स्वागत किया. इस बीच लाल किले के संरक्षण और स्टाफिंग को लेकर भी सवाल उठाए गए. अधिकारियों ने कहा कि वर्कर्स, टिकटिंग स्टाफ, बागवानी-संसकृति टीमों और संरक्षण श्रमिकों के ड्यूटी रोस्टर को पुनर्गठित किया जाएगा.
इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि रख-रखाव के नियमों को लेकर इस पर कोई समझौता न किया जा सके. लाल किला स्मारक की गहन सफाई और मरम्मत कार्य के लिए एक निश्चित साप्ताहिक बंदी के बजाय, स्मारक अब अलग-अलग रख-रखाव कार्यक्रम और कर्मचारियों की नियमित छुट्टी का पालन करेगा.
फैसले पर क्या बोले संरक्षण विशेषज्ञ?
इस फैसले को लेकर संरक्षण विशेषज्ञों ने कहा कि इस बदलाव के लिए कड़ी निगरानी की आवश्यकता होगी. एक अधिकारी ने कहा कि कोई पूर्ण बंदी दिवस नहीं होने के कारण, निवारक संरक्षण और नियमित मरम्मत की योजना बनानी होगी.
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक पहुंच को पूरी तरह से बंद किए बिना बहाली, पत्थर की सफाई और संरचनात्मक निरीक्षण की अनुमति देने के लिए क्षेत्रों को चरणों में बंद किया जा सकता है. लाल किला, एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन का स्थान, साल भर भारी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है.
पर्यटकों के लिए परिवर्तन में अधिक लचीलापन है. कर्मचारियों और संरक्षण टीमों के लिए यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित स्मारकों में से एक को पूर्व-सेवा मानकों को कम किए बिना पहुंच योग्य बनाए रखने के उद्देश्य से अधिक निरंतर और सावधानीपूर्वक प्रबंधित परिचालन मॉडल में बदलाव का संकेत देता है.
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