दिल्ली में 1 अप्रैल से बदल जाएगा नियम, हफ्ते में कितने दिन उठेगा गीला और सूखा कचरा? पढ़ें डिटेल
Delhi News: एमसीडी एक अप्रैल से शहर में कूड़ा उठाने के तरीके में बड़ा बदलाव ला रहा है. नए 'सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026' के तहत अब गीला और सूखा कचरा अलग-अलग दिनों में घर-घर से उठाया जाएगा.

दिल्ली नगर निगम (MCD) ने शहर में कूड़ा उठाने के तरीके को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर ली है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो राजधानी के सभी वार्डों में एक दिन छोड़कर कचरा संग्रहण की व्यवस्था लागू की जाएगी.
नई रूपरेखा के अनुसार गीला कचरा सप्ताह में चार दिन यानी सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और रविवार को घरों से उठाया जाएगा. वहीं सूखा कचरा बाकी बचे दिनों में संग्रहित किया जाएगा. इस बदलाव का मकसद घर-घर स्तर पर कचरे को अलग करने की आदत को मजबूत करना है ताकि प्रोसेसिंग आसान हो सके.
1 अप्रैल से लागू होंगे नए सॉलिड वेस्ट नियम
यह कदम हाल ही में अधिसूचित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 के अनुरूप उठाया जा रहा है, जो 2016 के नियमों की जगह लेंगे. नए प्रावधानों के तहत कचरे को चार हिस्सों—गीला, सूखा, सैनिटरी और स्पेशल केयर—में अलग करना अनिवार्य होगा. ये नियम शहर और ग्रामीण दोनों इलाकों में समान रूप से लागू किए जाएंगे.
निगम मुख्यालय में हुई रणनीतिक बैठक
निगम अधिकारियों के मुताबिक विस्तृत बायलॉज जारी किए जाने बाकी हैं, लेकिन प्रमुख बिंदुओं को लागू करने पर सहमति बन चुकी है. इस सिलसिले में 7 फरवरी को कमिश्नर संजीव खिरवार की अध्यक्षता में जोनल डिप्टी कमिश्नरों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ लंबी समीक्षा बैठक की गई, जिसमें क्रियान्वयन की रूपरेखा पर मंथन हुआ.
पायलट प्रोजेक्ट से होगी शुरुआत
पूरे शहर में एक साथ बदलाव लागू करने के बजाय पहले चुनिंदा वार्डों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा. स्थानीय आंकलन के आधार पर डिप्टी कमिश्नर चरणबद्ध योजना बनाएंगे और सफल परिणाम मिलने पर इसे अन्य वार्डों तक विस्तार दिया जाएगा.
वार्ड स्तर पर बनेगी अलग कार्ययोजना
नगर निगम प्रत्येक वार्ड के लिए अलग रणनीति तैयार करेगा ताकि 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कलेक्शन का लक्ष्य हासिल किया जा सके. इस मॉडल के जरिए पहले सीमित क्षेत्रों में सुधार लागू कर उनकी समीक्षा की जाएगी और फिर चरणों में अन्य इलाकों में लागू किया जाएगा.
डंपिंग साइट पर दबाव कम करने की कवायद
सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अलग किए गए कचरे को केंद्रीकृत और विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग इकाइयों तक पहुंचाया जाएगा ताकि मौजूदा डंप साइट पर बोझ कम हो. साथ ही ऐसे नए स्थानों की पहचान की जाएगी जहां भविष्य में प्रोसेसिंग सुविधाएं विकसित की जा सके.
हर वार्ड में नोडल अधिकारी की तैनाती
प्रत्येक वार्ड में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो कचरा पृथक्करण, डोर-टू-डोर कलेक्शन की निगरानी और बड़े कचरा उत्पादकों द्वारा नियमों के पालन को सुनिश्चित करेगा. यह अधिकारी जीरो-वेस्ट कॉलोनियों और स्थानीय प्रोसेसिंग यूनिट्स को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी भी संभालेगा.
311 ऐप पर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
निगम के ‘311’ ऐप के जरिए सभी बल्क वेस्ट जेनरेटर की पहचान और पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा. बैंक्वेट हॉल, रिसॉर्ट, फार्महाउस, शैक्षणिक संस्थान, होटल और मोटल जैसे प्रतिष्ठानों पर विशेष नजर रखी जाएगी ताकि वे नियमों का पालन करें.
नियम तोड़ने पर जुर्माना, पालन पर राहत
प्रस्ताव में साफ किया गया है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वालों को पेनल्टी नोटिस जारी किए जाएंगे. वहीं जो संस्थान नियमों का पालन करेंगे उन्हें प्रॉपर्टी टैक्स में छूट जैसे प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं. निगम का मानना है कि दंड और प्रोत्साहन की यह दोहरी रणनीति राजधानी को साफ-सुथरा बनाने में अहम भूमिका निभाएगी.























