जामिया के शिक्षकों का आरोप, 'बाहरी लोग प्रदर्शन को दे रहे हवा'
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के शिक्षकों ने चिंता जताते हुए कहा कि सियासी दल यूनिवर्सिटी के आंतरिक मामले को बड़े राजनीतिक टकराव में बदलने की कोशिश कर रहे. शिक्षकों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन का समर्थन किया.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के शिक्षकों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में शैक्षणिक गतिविधियां बाधित होने पर चिंता जताई है. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीति से जुड़े लोग और बाहरी व्यक्ति छात्रों के प्रदर्शन को हवा देने की कोशिश कर रहे हैं. यूनिवर्सिटी ने मंगलवार (27 अक्टूबर) को जारी एक बयान में यह जानकारी दी.
यूनिवर्सिटी ने बताया कि ये चिंताएं 26 अक्टूबर को हुई एक बैठक में जताई गईं. बैठक में डीन, विभागाध्यक्षों, केंद्रों के निदेशकों और सीनियर अधिकारियों ने मौजूदा स्थिति का आकलन किया, ऑनलाइन क्लास की समीक्षा की और प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों पर चर्चा की.
शिक्षकों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन की घोषणा का किया समर्थन?
शिक्षकों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के 26 अक्टूबर को छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन के भीतर चुनाव कराए जाने की घोषणा का भी समर्थन किया. प्रशासन के आदेश के तहत प्रदर्शनकारी छात्रों को निलंबन आदेश और ‘कारण बताओ’ नोटिस भी रद्द कर दिए गए थे. साथ ही, सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार की जांच का आश्वासन दिया गया था.
शिक्षकों ने की पूर्व जज मार्कंडेय काटजू की पोस्ट की आलोचना
यूनिवर्सिटी के बयान के अनुसार, शिक्षकों ने ‘फेसबुक’ पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू की पोस्ट की आलोचना की. जस्टिस काटजू ने पोस्ट में छात्र संघ बनाने के छात्रों के अधिकार के समर्थन में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(सी) का हवाला दिया था. शिक्षकों ने कहा कि प्रशासन को छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ दिखाने की उनकी कोशिश यूनिवर्सिटी की ओर से उठाए गए कदमों के विपरीत है.
शिक्षकों ने राजनीतिक दलों को घेरा
शिक्षकों ने कहा कि हिंसा की बार-बार होने वाली घटनाओं और तत्कालीन कुलपति सहित विभिन्न शिक्षकों पर हुए हमलों के बाद 2006 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ को भंग कर दिया गया था. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा प्रशासन दो दशक में पहला ऐसा प्रशासन है, जिसने छात्र संघ को बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. शिक्षकों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि राजनीतिक दल यूनिवर्सिटी के आंतरिक मामले को बड़े राजनीतिक टकराव में बदलने की कोशिश कर रहे हैं.
इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद पर केस दर्ज
बयान के अनुसार, यूनिवर्सिटी ने 25 अक्टूबर को कांग्रेस सांसदों- इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद के कथित तौर पर बिना अनुमति परिसर में प्रवेश करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई. शिक्षकों ने समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्ला नदवी को परिसर की ओर जाते समय हिरासत में लिये जाने और प्रशासन को पहले से सूचना दिए बिना अन्य नेताओं के परिसर में आने का भी जिक्र किया.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी के बाहर के लोगों ने 24 अक्टूबर से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विभागों वाले भवन पर कब्जा कर रखा है तथा उसमें ताला लगा दिया है.
'1 नवंबर को ही होगी कांग्रेस की रैली', राहुल गांधी के रुख से व्यापारियों की बढ़ी चिंता





















