दिल्ली में पानी के संकट को लेकर मंत्री प्रवेश वर्मा ने AAP की पिछली सरकार को बताया जिम्मेदार, जानें क्या कहा?
Delhi News in Hindi: दिल्ली जल संकट पर सरकार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री परवेश वर्मा ने पुरानी सरकारों को जिम्मेदार ठहराया. लेकिन स्थायी राहत का कोई निश्चित समय नहीं बताया.

नई दिल्ली में बढ़ते पानी संकट और गंदे पानी की शिकायतों को लेकर मंगलवार को दिल्ली सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जल मंत्री प्रवेश वर्मा और दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ विजय विधूड़ी ने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, लेकिन जब एबीपी न्यूज़ ने सबसे अहम सवाल पूछा कि दिल्लीवासियों को पानी की समस्या से स्थायी राहत कब मिलेगी, तो मंत्री कोई स्पष्ट समय सीमा बताए बिना प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त कर चले गए.
क्षमता 1000 MGD, जरूरत 1250 MGD
दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ विजय विधूड़ी ने बताया कि दिल्ली में 10 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 1000 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) है. गर्मियों में राजधानी को 1250 MGD पानी की जरूरत पड़ती है. यमुना नदी के जलस्तर में कमी और हरियाणा से कम पानी मिलने से संकट बढ़ गया है.
पुरानी सरकारों पर ठीकरा फोड़ा
जल मंत्री परवेश वर्मा ने कहा कि समस्या नई नहीं है. पिछली सरकारों ने समय रहते जरूरी काम नहीं किए, जिसकी वजह से आज यह स्थिति बनी है. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने पानी क्षेत्र में पिछले शासनकाल की तुलना में ढाई गुना ज्यादा बजट रखा है. मंत्री ने बताया कि दिल्ली में 135 MGD पानी बोरवेलों से निकाला जा रहा है. पिछली सरकार एक साल में औसतन 200 नए बोरवेल लगाती थी, जबकि इस सरकार ने एक साल में 560 नए बोरवेल लगाए हैं. टैंकर सप्लाई भी दोगुनी कर दी गई है.
पुरानी पाइपलाइनों की समस्या
परवेश वर्मा ने स्वीकार किया कि दिल्ली में 550 किलोमीटर पाइपलाइन 30 साल से ज्यादा पुरानी है, जिसमें 40% पानी लीकेज और बर्बादी के कारण खराब हो जाता है. सरकार ने पूरे शहर को 8 जोनों में बांटकर नई पाइपलाइन बदलने की योजना बनाई है. कंपनियां 15 साल तक सिस्टम संभालेंगी. आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी.
भविष्य की योजनाएं
मंत्री ने रेणुका डैम परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि 2032 तक दिल्ली को पाइपलाइन के जरिए अतिरिक्त पानी मिलेगा. ड्यूल पाइपलाइन सिस्टम को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे ट्रीटेड पानी टॉयलेट फ्लशिंग में इस्तेमाल होगा और पीने का पानी बचेगा. रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर भी जोर दिया गया. पिछले डेढ़ महीने में 500 नए और 1000 पुराने सिस्टम पर काम हुआ है. सरकार का लक्ष्य हर साल 1000 नए सिस्टम लगाने का है.
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