DU कुलपति के खिलाफ आंदोलन तेज, भूख हड़ताल पर DUSU उपाध्यक्ष
Delhi University Protest News: दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहा सत्याग्रह और उग्र हो गया है. DUSU उपाध्यक्ष समेत कई छात्र भूख हड़ताल पर हैं.

दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ चल रहा “सेव डेमोक्रेसी, सेव DU” सत्याग्रह लगातार तेज होता जा रहा है. आंदोलन को सोमवार को आठ दिन पूरे हो गए, जबकि छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल छठे दिन भी जारी रही. इस बीच, DUSU उपाध्यक्ष राहुल झांसला भी सोमवार (3 अगस्त) से भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं, जिससे आंदोलन को नया राजनीतिक और छात्र नेतृत्व का समर्थन मिला है.
इससे पहले 29 जुलाई से पांच छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं. इनमें सागर चौधरी (DBS), पार्थ राव (KMC), कुलदीप गुर्जर (CLC), सिद्धांत तिवारी (DSSW) और दीपक चौधरी शामिल हैं.
अधिकारियों से बातचीत, पर प्रशासन की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं
सोमवार दोपहर दिल्ली विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, प्रॉक्टर और दूसरे अधिकारी जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल पर पहुंचे और राहुल झाँसला समेत आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत की. अधिकारियों ने कहा कि कुलपति ने छात्रों और शिक्षकों के हित में उन्हें आंदोलन में शामिल न होने की अपील की थी. हालांकि, छात्र नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक आंदोलन को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की है.
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NSUI का आरोप: एडवाइजरी के जरिए छात्रों को धमकाया गया
NSUI का आरोप है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से जारी की गई एडवाइजरी में छात्रों को आंदोलन में शामिल होने पर अप्रत्यक्ष रूप से धमकाया गया और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का गलत हवाला देकर भ्रम फैलाने की कोशिश की गई. छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक कुलपति इस पोस्ट पर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते और उनकी मांगें स्वीकार नहीं होतीं, तब तक सत्याग्रह और भूख हड़ताल जारी रहेगी. उनका यह भी आरोप है कि कुलपति ने न तो आंदोलनकारियों से सीधे संवाद की कोई पहल की है और न ही इस पूरे विवाद पर X पर कोई नया स्पष्टीकरण जारी किया है.
विवाद की शुरुआत: विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई चेतावनी
विवाद की शुरुआत दिल्ली विश्वविद्यालय की उस एडवाइजरी से हुई, जिसमें छात्रों और शिक्षकों से जंतर-मंतर पर किसी भी प्रदर्शन या जमावड़े से दूर रहने की अपील की गई थी. विश्वविद्यालय ने अपनी पोस्ट में कहा था कि जंतर-मंतर पर होने वाली “गैरकानूनी सभाओं या प्रदर्शनों” में शामिल होने पर कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है. प्रशासन ने यह भी कहा था कि ऐसी गतिविधियों से छात्रों की व्यक्तिगत सुरक्षा, शैक्षणिक प्रगति और भविष्य के अवसर प्रभावित हो सकते हैं. साथ ही विश्वविद्यालय ने यह दावा भी किया कि इस पूरे मामले में भ्रामक और फर्जी सामग्री सोशल मीडिया पर publish की जा रही है, इसलिए छात्रों और शिक्षकों को सतर्क रहने की ज़रूरत है.
छात्रों का तर्क: शांतिपूर्ण विरोध हमारा संवैधानिक अधिकार
हालांकि, आंदोलनकारी छात्र इस एडवाइजरी को लोकतांत्रिक अधिकारों पर दबाव बनाने की कोशिश बता रहे हैं. उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध करना उनका संवैधानिक अधिकार है और विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों से संवाद करना चाहिए, न कि उन्हें चेतावनी देनी चाहिए.
दीपेंद्र हुड्डा पहुंचेंगे जंतर-मंतर
इस बीच आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है. कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा मंगलवार दोपहर 12:30 बजे जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल पहुंचकर सत्याग्रह में शामिल छात्रों से मुलाकात करेंगे और अपना समर्थन देंगे. माना जा रहा है कि उनके दौरे से आंदोलन को और राजनीतिक तूल मिल सकता है. वहीं, अब सबकी नजर इस बात पर है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया देता है या नहीं.
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