देहरादून में एंजेल चकमा हत्याकांड के खिलाफ दिल्ली के छात्रों का गुस्सा, जंतर-मंतर पर NSUI ने निकाला कैंडल मार्च
Angel Chakma Murder Case: देहरादून में नस्लीय हिंसा के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर एनएसयूआई ने कैंडल मार्च निकाला. छात्रों ने अंजेल चकमा को न्याय, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की.

देहरादून में नस्लीय घृणा से जुड़ी हिंसा की घटना को लेकर राजधानी दिल्ली में छात्रों का आक्रोश सड़कों पर देखने को मिला. नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने जंतर-मंतर पर कैंडल मार्च निकालकर पीड़ित छात्र अंजेल चकमा को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. इस दौरान केंद्र और उत्तराखंड सरकार की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए.
एनएसयूआई के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं जंतर-मंतर पर एकत्र हुए. हाथों में मोमबत्तियां लेकर उन्होंने नस्लवाद और घृणा अपराधों के खिलाफ एकजुटता दिखाई. छात्रों ने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि नफरत किस हद तक बढ़ती जा रही है.
पहचान बनी हिंसा की वजह
बताया गया कि उत्तर-पूर्व से आने वाले अंजेल चकमा को उसकी पहचान और शक्ल-सूरत के कारण निशाना बनाया गया. आरोप है कि हमलावरों ने उसे नस्लीय गालियां दीं और चीनी जैसे अपमानजनक शब्द कहे. छात्रों का कहना है कि ऐसी घटनाएं बताती हैं कि नस्लीय सोच अभी भी समाज में गहराई से मौजूद है.
कार्रवाई में देरी पर उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड की भाजपा शासित सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाए गए. छात्रों ने कहा कि घटना के बाद करीब बीस दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और आरोपी खुलेआम घूमते रहे. जनाक्रोश बढ़ने और अंजेल की मौत के बाद ही एफआईआर दर्ज होना सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है.
एनएसयूआई नेताओं का कहना है कि यह घटना अलग नहीं है, बल्कि नफरत और विभाजन के माहौल का नतीजा है. संगठन ने आरोप लगाया कि इस तरह की सोच अपराधियों को बेखौफ बनाती है और उन्हें दंडमुक्ति का भरोसा देती है.
कैंडल मार्च को संबोधित करते हुए एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने कहा कि अंजेल चकमा की हत्या नफरत की सोच का नतीजा है, लेकिन न्याय की हत्या सरकार की चुप्पी ने की. उन्होंने कहा कि बीस दिनों तक कोई कार्रवाई न होना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि मिलीभगत की आशंका भी पैदा करता है.
उत्तर-पूर्व के लोगों के खिलाफ नफरत पर चिंता
वरुण चौधरी ने कहा कि उत्तर-पूर्व के लोगों के खिलाफ बढ़ती नफरत बेहद चिंताजनक है. बार-बार हो रहे हमले और आरोपियों का बेखौफ रवैया राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करता है. एनएसयूआई ने दोषियों को कड़ी सजा देने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की.
संविधान और समानता की बात
एनएसयूआई ने संविधान के मूल्यों का हवाला देते हुए कहा कि भारत हर भारतीय का है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र या समुदाय से हो. किसी को भी उसकी पहचान या रूप-रंग के आधार पर निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. संगठन ने अंजेल चकमा के परिवार के साथ खड़े रहने और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया.
नस्लवाद के खिलाफ संघर्ष जारी
कैंडल मार्च के जरिए एनएसयूआई ने साफ संदेश दिया कि नस्लवाद, घृणा अपराध और हिंसा के खिलाफ उसका संघर्ष जारी रहेगा. संगठन ने सरकार से त्वरित और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने, भेदभाव खत्म करने और दंडमुक्ति की संस्कृति पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की.
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Source: IOCL






















