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Delhi News: यमुना के 32 घाटों की बदलेगी तस्वीर, सफाई अभियान में निकला 116 मीट्रिक टन कचरा

Delhi News In Hindi: दिल्ली में यमुना नदी के 32 ऐतिहासिक घाटों का कायाकल्प होगा. 15 हजार लोगों ने महासफाई अभियान में 116 मीट्रिक टन कचरा निकाला. 7 लाख पेड़ और 35 वेटलैंड विकसित. जानें पूरी योजना.

राजधानी दिल्ली में यमुना नदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक घाटों की तस्वीर जल्द बदल सकती है. वर्षों से गंदगी, अतिक्रमण और उपेक्षा का सामना कर रहे 32 पुराने घाटों को नए स्वरूप में विकसित करने की योजना पर प्रशासन ने तेजी से काम शुरू कर दिया है. प्रस्तावित योजना के तहत इन घाटों को स्वच्छ, आकर्षक और लोगों के लिए सुविधाजनक बनाया जाएगा, ताकि यहां आने वाले लोग नदी किनारे सैर, सांस्कृतिक गतिविधियों और प्राकृतिक दृश्यों का आनंद ले सकें.

छह महीने में जमीन पर उतर सकती है योजना

यमुना कायाकल्प परियोजना की समीक्षा के दौरान उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने संबंधित एजेंसियों को विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों के मुताबिक अगले छह महीनों के भीतर 32 ऐतिहासिक घाटों के पुनर्विकास का काम शुरू होने की संभावना है. इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत ट्रस्ट (INTACH) की ओर से विस्तृत अध्ययन भी कराया गया है.

यमुना के बाढ़ क्षेत्र को व्यवस्थित करने के लिए बीते महीनों में बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया है. डीडीए के अनुसार लगभग 1700 हेक्टेयर क्षेत्र में नदी तट सुधार कार्य किए गए हैं. इस दौरान 88,574 मीट्रिक टन मलबा और 4,998 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया. इसके अलावा करीब 1,425 एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराया गया है.

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सात लाख से ज्यादा देशी पेड़ों ने बदला नदी किनारे का पर्यावरण

यमुना तट को पर्यावरणीय रूप से मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर हरित अभियान चलाया गया है. अधिकारियों के अनुसार नदी किनारे सात लाख से अधिक देशी प्रजातियों के पेड़ लगाए गए हैं. इसके साथ ही स्थानीय घास और वेटलैंड प्रजातियों का भी रोपण किया गया है. यमुना कॉरिडोर में अब तक 35 वेटलैंड विकसित किए जा चुके हैं, जिनसे भूजल रिचार्ज, जैव विविधता संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण क्षमता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

घाटों को मिलेगा नया जीवन, लोगों का बढ़ेगा जुड़ाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना किनारे बने ऐतिहासिक घाट केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखते, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. हालांकि बीते वर्षों में इन घाटों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका. अब पुनर्विकास योजना के जरिए इन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर रखरखाव के साथ विकसित किया जाएगा, जिससे लोगों का नदी से जुड़ाव और मजबूत हो सकेगा.

पहले से बदल रही है यमुना किनारे की तस्वीर

पिछले दो वर्षों में यमुना तट पर कई महत्वपूर्ण हरित परियोजनाएं विकसित की गई हैं. असिता, बांसेरा, अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क, यमुना वनस्थली, कालिंदी अविरल और यमुना वाटिका जैसे पार्कों ने नदी क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अब प्रशासन की नजर ऐतिहासिक घाटों के पुनर्जीवन पर है.

यमुना को कचरा मुक्त बनाने के लिए शुरू किए गए विशेष जनभागीदारी अभियान को पहले ही दिन व्यापक समर्थन मिला. दिल्ली सरकार के अनुसार अभियान के पहले दिन यमुना से 116.6 मीट्रिक टन कचरा निकाला गया. सफाई अभियान एक साथ 28 घाटों पर चलाया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों ने हिस्सा लिया.

15 हजार लोगों ने संभाला सफाई अभियान का मोर्चा

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री गोपाल राय के अनुसार पहले दिन करीब 15 हजार लोगों ने सफाई अभियान में भागीदारी की. इनमें स्वयंसेवक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के सदस्य, सरकारी विभागों के कर्मचारी और विभिन्न एजेंसियों के अधिकारी शामिल रहे. सामूहिक प्रयासों के जरिए कुछ ही घंटों में बड़ी मात्रा में कचरा हटाया गया.

मशीनों और तकनीक की मदद से चला सफाई ऑपरेशन

सफाई अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक उपकरणों और मशीनरी का भी व्यापक उपयोग किया गया. नदी और घाटों की सफाई के लिए 8 ट्रैश स्कीमर, वीड हार्वेस्टर मशीनें, 28 नावें, 28 जेसीबी मशीनें, 84 पीडब्ल्यूडी मेंटेनेंस वैन तथा उद्यान विभाग की 28 गाड़ियों को लगाया गया. प्रशासन का दावा है कि आने वाले दिनों में भी इसी तरह नियमित अभियान चलाकर यमुना को स्वच्छ बनाने की दिशा में काम जारी रहेगा.

यमुना की सफाई और पुनर्जीवन को लेकर वर्षों से योजनाएं बनती रही हैं, लेकिन इस बार प्रशासन इसे जनभागीदारी और जमीनी कार्रवाई से जोड़कर आगे बढ़ा रहा है. यदि घाटों का पुनर्विकास और नदी तट सुधार योजनाएं तय समयसीमा में पूरी होती हैं तो यमुना का यह इलाका दिल्ली के सबसे आकर्षक सार्वजनिक स्थलों में शामिल हो सकता है.

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अभिषेक कुमार वर्तमान में ABP न्यूज़ में चीफ कॉपी एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अभिषेक यहां चैनल के डिजिटल विंग में काम कर रहे हैं. इन्होंने अपनी पत्रकारिता की शुरूआत आजतक न्यूज़ चैनल से बतौर इंटर्न की. इसके बाद इंडिया न्यूज़ में कार्यरत हुए और बीते करीब 9 सालों से एबीपी न्यूज़ को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अभिषेक यहां बिजनेस सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. कई राज्यों के चुनाव, लोकसभा चुनाव और केंद्रीय बजट के दौरान अलग-अलग सीरीज में खबरें लिखते रहे हैं. अभिषेक ने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई दिल्ली के भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से की है. यहां अभिषेक ने टीवी और रेडियो पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है. अभिषेक राजनीति, चुनाव, समाज, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर लगातार लिखते रहे हैं. अपनी प्रोफेशनल लाइफ से इतर अभिषेक ट्रैवल और स्ट्रीट फोटोग्राफी का शोक भी रखते हैं.

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