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लाठियां, कंटीले तारों के बैरिकेड्स और जिद… किस उलझन में फंसी झारखंड सरकार?

Jharkhand Protests: छात्रों पर पुलिस द्वारा पानी की बौछार, आंसू गैस के गोले छोड़ने और लाठीचार्ज किए जाने की बीजेपी ने निंदा की. बीजेपी ने राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाया है.

झारखंड की राजधानी रांची में 10 अगस्त 2026 को प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठियां बरस रही थी और उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए कंटीले तारों के बैरिकेड्स भी लगाए गए थे. इन सबसे बड़ी थी आंदोलनकारी छात्रों की जिद., जिसने उन्हें झारखंड की सोरेन सरकार के सामने लाकर खड़ा कर दिया है और आज वो ही जिद इन्हें झारखंड विधानसभा की दहलीज तक ले गई. झारखंड सरकार का दावा है कि छात्रों की 98 फीसदी मांगे मान ली गई हैं. लेकिन छात्र साफ कह रहे हैं कि अभी बात पूरी नहीं हुई है. सरकार वादा कर रही है कि जांच होगी, लेकिन छात्र पूछ रहे हैं कि जांच कौन करेगा? छात्रों का सबसे अहम सवाल ये है कि सीबीआई की जांच के बिना भरोसा कैसे करें?

देश के कोने-कोने में सुनाई दे रही रांची की हुंकार

सीबीआई की इसी फांस के नहीं सुलझने की वजह से झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों ने विधानसभा तक मार्च किया. रोकने की कोशिश तो बहुत हुई, लेकिन छात्र ना तो डरे और ना ही रुके. दरअसल ये सिर्फ परीक्षा का विवाद नहीं है ये उस भरोसे की लड़ाई है जो एक युवा अपने सिस्टम से मांग रहा है. ये उसके सपनों की लड़ाई है. जिसके लिए वो कई साल तक मेहनत करता है, लेकिन एक झटके में सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है. रांची की सड़कों से उठने वाली ये हुंकार देश के कोने-कोने में सुनाई दे रही है. पूरे झारखंड से रांची में जुटे ये छात्र बता रहे हैं कि बात जब न्याय और उनके हक की होगी तो वो उसे लेकर रहेंगे. सरकार और पूरा सिस्टम कितना भी जोर लगा ले उन्हें रोक नहीं पाएगा.

छात्रों को रोकने के लिए कंटीले तारों वाले बैरिकेड

रांची में छात्रों को रोकने के लिए कंटीले तारों वाले बैरिकेड लगाए गए थे, जिसे छात्रों ने नंगे हाथों से ही रास्ते से हटा दिया. छात्रों ने एक दो नहीं एक-एक करके पांच बैरिकेड तोड़ दिए. जब एक के बाद एक बैरिकेड टूटते चले गए तो झारखंड पुलिस ने वॉटरकैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन ये तो जेन जी हैं पानी की बौछार देखते ही रेन डांस शुरू हो गया. जैसा जंतर मंतर के छात्र आंदोलन में देखा था ठीक उसी तरह जब पुलिस छात्रों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया तो उसी का मजाक बना दिया गया. छात्र कहने लगे कि पानी में तो प्रेशर ही नहीं है यहां भी घोटाला है.

छात्रों पर दागे गए आंसू गैस के गोले

एक सुर में विधानसभा की तरफ मार्च कर रहा हर छात्र पानी की बौछार का स्वागत कर रहा था और सरकार के खिलाफ तंज के लिए भी उन्हीं के पानी का इस्तेमाल कर रहा था. झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन का बर्थडे भी दस अगस्त को होता है और छात्र बर्थडे गिफ्ट के तौर पर अपनी मांगें पूरी करने को कह रहे थे. वाटरकैनन के बाद पुलिस के लाठीचार्ज करने की तस्वीरें सामने आईं. हल्के लाठीचार्ज के बाद भी जब छात्रों की भीड़ नहीं रुकी तो एक बार फिर से लाठीचार्ज किया गया और फिर सामने आईं ये तस्वीरें जब एक के बाद एक आंसू गैस के कई गोले भीड़ की तरफ दागे गए, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा एक्सपायर हो चुके आंसू गैस के गोले की हुई.

छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग पर रांची के एसपी ने कहा है कि आंदोलनकारी छात्रों की भीड़ में कुछ अऱाजक तत्व मौजूद हैं जो किसी की बात नहीं सुन रहे हैं इसलिए व्यवस्था बनाए रखने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. छात्रों के मार्च में 9 दिन से अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो भी शामिल हुए थे और वो एंबुलेंस से मार्च में शामिल होने के लिए आए थे. इसके बाद देवेंद्र महतो स्ट्रेचर पर सवार होकर विधानसभा की तरफ कूच करते हुए दिखाई दिए.

सरकार और आंदोलनकारियों के बीच रविवार को रांची के स्टेट गेस्ट हाउस में बातचीत हुई थी, जिसमें 14वीं जेपीएससी यानि झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने और एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाने की मांग पर सहमति बनी थी. छात्र परीक्षाओं की जांच सीबीआई से कराने की मांग पर अड़े हैं. रांची का छात्र आंदोलन की नींव 21 जुलाई से पड़ी जब भर्ती परीक्षा गड़बड़ी पर CID की जेपीएससी ऑफिस में रेड हुई थी और 8 लोग हिरासत में लिए गए थे.

कैसे शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन

22 जुलाई को जेपीएससी चेयरमैन एल ख्यांगते का इस्तीफा ले लिया गया जबकि सिविल सेवा मेंस समेत 9 परीक्षाएं स्थगित की गईं. 24 जुलाई को जेपीएससी-जेएसएससी नियुक्तियों में अनियमितता के खिलाफ छात्रों ने आंदोलन शुरू किया. 29 जुलाई को छात्रों ने रांची में संविधान यात्रा निकाली. अगस्त में आंदोलन ने रफ्तार पकड़ी जब छात्र मशाल और तख्तियां लेकर पैदल मार्च करते दिखाई दिए. आंदोलन के 12 वें दिन यानि 5 अगस्त को सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की कमेटी बनाई और बातचीत का न्योता दिया.

ऐसा लग रहा है कि जंतर मंतर से लेकर रांची तक के छात्र आंदोलन की तस्वीर में कहीं कोई फर्क ही नहीं है. 17 दिन बीत गए, लेकिन छात्र परीक्षा में धांधली के खिलाफ जिन मांगों को लेकर सड़क पर हैं उस पर सरकार के साथ सहमति नहीं बन पा रही है और देश एक बार फिर से लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छात्रों पर बरसते हुए देख रहा है. दरअसल इन छात्रों का अब सिर्फ एक सवाल है कि परीक्षा निष्पक्ष होगी या नहीं? सरकार मांगों की लिस्ट गिना रही है बता रही है कि हमने इतना मान लिया, जबकि छात्र भरोसे की कमी गिना रहे हैं छात्र जो पूछ रहे हैं कि जो नहीं माना उसका हिसाब कौन देगा?

बैठक में इन मांगों पर नहीं बनी सहमति

धरना से लेकर अनशन तक और मूसलाधार बारिश में भीगने से लेकर भीषण गर्मी तक इनके हौसले को कमजोर नहीं कर पाया और अब पुलिस की कार्रवाई भी झेल ली. दिल्ली में जो बीजेपी छात्रों के खिलाफ खड़ी दिख रही थी वो ही पार्टी यहां छात्रों के साथ दिख रही है और रांची की सोरेन सरकार कह रही है कि हमें अपना दुश्मन मत समझिए. 7, 8 और 9 अगस्त को छात्रों के दो डेलिगेशन की सरकार के साथ 3 राउंड बैठक हुई, रविवार को तीसरी बैठक में ज्यादातर मांग मान ली गई लेकिन CBI जांच और झारखंड CGL परीक्षा रद्द की मांग पर बात नहीं बनी, छात्रों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को विधानसभा का घेराव कर दिया.ॉ

आखिर सीबीआई पर पेच क्यों फंसा है?

जिस वक्त छात्र विधानसभा घेराव की तरफ बढ़ रहे थे उसी वक्त CID ने JPSC के पूर्व चेयरमैन को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन ये कार्रवाई भी छात्रों को रोक नहीं पाई क्योंकि छात्रों का राज्य की जांच एजेंसियों पर भरोसा नहीं है. 
 
पहली वजह - राज्य की जांच व्यवस्था पर भरोसा

सरकार का तर्क है कि सरकार CBI के बजाय राज्य स्तर पर CID जांच और एक्सपर्ट कमेटी और फास्ट-ट्रैक कोर्ट जैसे विकल्पों की बात कर रही है. सरकार का संदेश है-जांच से इनकार नहीं है, लेकिन जांच CBI ही करे ये जरूरी नहीं.

दूसरी वजह- सरकार के सिस्टम पर सवाल

यानि पब्लिक सर्विस कमीशन जैसी परीक्षाएं राज्य की संस्थाओं के जरिए होती हैं. अगर सरकार खुद कहती है कि मामले की CBI जांच होनी चाहिए तो उसका संदेश ये जाएगा कि राज्य की मौजूदा जांच व्यवस्था पर सरकार का ही भरोसा नहीं है . 

तीसरी वजह- हेमंत सरकार के लिए बड़ा जोखिम

झारखंड सरकार के लिए सीबीआई जांच एक जोखिम भी है क्योंकि CBI केंद्र के अधीन काम करती है. झारखंड में सरकार और केंद्र की राजनीति के बीच पहले से टकराव रहा है. ऐसे में राज्य सरकार अगर जांच सीबीआई को सौंपती है तो राजनीतिक रूप से ये फैसला ना सिर्फ मुश्किल बल्कि जोखिम वाला हो सकता है

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