दिल्ली का उस्मानपुर गांव पूरी तरह पानी में समाया, राहत शिविर में बुनियादी सुविधाओं का आभाव
Delhi Floods: दिल्ली में यमुना नदी के उफान से उस्मानपुर गांव जलमग्न है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. राहत शिविरों में सुविधाओं की कमी है. प्रशासन चेतावनी जारी कर रहा है.

दिल्ली में यमुना नदी लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और इसके चलते राजधानी के कई निचले इलाके बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं. वहीं, तीसरे पुस्ते रोड के पास बसा उस्मानपुर गांव अब पूरी तरह पानी में समा गया है. यहां घरों से लेकर गलियों तक, हर जगह पानी ही पानी नजर आ रहा है. लोग आवाजाही के लिए नावों का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं.
गांव के एक बुजुर्ग ने कहा कि, “2023 में भी पानी आया था, लेकिन इस बार हालात बहुत बिगड़ गए हैं. पूरा गांव डूब चुका है, बच्चों और बुजुर्गों को ले जाना-लाना बेहद मुश्किल हो गया है.” ग्रामीणों के मुताबिक, बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है और हालात दिन-ब-दिन गंभीर होते जा रहे हैं.
राहत टेंट बने लेकिन सुविधाएं नदारद
हालांकि, प्रशासन ने गांव के पास राहत टेंट लगाए हैं, लेकिन वहां बुनियादी सुविधाओं का संकट है. लोगों का आरोप है कि वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. ग्रामीणों का कहना है कि इस संकट की घड़ी में न तो कोई जनप्रतिनिधि और न ही कोई बड़ा अधिकारी उनसे मिलने पहुंचा है.
लाउडस्पीकर से लोगों से की जा रही अपील
नगर निगम के कर्मचारी लगातार लाउडस्पीकर से ग्रामीणों को सचेत कर रहे हैं. उन्हें नदी की तरफ न जाने और सुरक्षित जगह पर बने टेंटों में ठहरने की सलाह दी जा रही है. हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि टेंट में रहना भी आसान नहीं है क्योंकि वहां जरूरत के मुताबिक इंतजाम नहीं हैं.
'पानी उतरने में लगेगा वक्त'
वहीं, अधिकारियों का कहना है कि, हालात पर पैनी नजर रखी जा रही है और प्रभावित लोगों के लिए खाने-पीने से लेकर दवाइयों तक की पूरी व्यवस्था की गई है. प्रशासन का अनुमान है कि यमुना का जलस्तर सामान्य होने में अभी कम से कम 2 से 3 दिन और लग सकते हैं.
गांववालों के लिए मुसीबत बनी बाढ़
फिलहाल, उस्मानपुर गांव के लोग बाढ़ के पानी से जूझ रहे हैं. नावों पर जिंदगी चल रही है और रोजमर्रा का जीवन ठप हो चुका है. प्रशासन मदद का दावा कर रहा है, लेकिन ग्रामीणों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं.
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Source: IOCL






















