हत्या के दोषी ने जेल से बाहर आकर किया एक और कत्ल! ली मासूम की जान
Delhi News In Hindi: 15 साल से फरारा आरोपी ने 10 साल के मासूम के अपहरण के बाद 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी, मगर रकम ना मिलने पर आरोपी ने बच्ची की बेरहमी से हत्या कर दी.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 15 साल से कानून की आंखों में धूल झोंक रहे एक ऐसे उम्रकैद के दोषी को गिरफ्तार किया है. जिसने 10 साल के मासूम के अपहरण के बाद 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी और रकम नहीं मिलने पर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी थी. आरोपी 2011 में एक महीने की पैरोल पर जेल से बाहर आया था लेकिन वापस लौटने के बजाय फरार हो गया. आखिरकार लंबी तलाश के बाद क्राइम ब्रांच ने उसे गाजियाबाद से दबोच लिया.
20 लाख की फिरौती के लिए उठाया था मासूम
गिरफ्तार आरोपी की पहचान 48 वर्षीय नरेंद्र चौहान के रूप में हुई है. वह शालीमार बाग थाने में दर्ज वर्ष 2002 के अपहरण, हत्या और फिरौती के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था. दिल्ली हाईकोर्ट ने अप्रैल 2011 में उसे एक महीने की पैरोल दी थी. लेकिन तय समय पूरा होने के बाद उसने जेल में आत्मसमर्पण नहीं किया और फरार हो गया. इसके बाद से वह लगातार पुलिस से बचता रहा.
पुलिस के मुताबिक 4 जनवरी 2002 को नरेंद्र चौहान ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर10 साल के एक बच्चे का अपहरण किया था. आरोपियों ने बच्चे के परिवार से 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी. जब परिवार रकम का इंतजाम नहीं कर पाया तो मासूम की हत्या कर दी गई. जांच के दौरान सभी आरोपी गिरफ्तार हुए और अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
जेल से बाहर आएंगे उमर खालिद? जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस
बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर चला रहा था गुजारा
क्राइम ब्रांच के मुताबिक पैरोल पर बाहर आने के बाद नरेंद्र चौहान लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा ताकि पुलिस उसे पकड़ न सके. पहले वह गाजियाबाद के संजय नगर में रहा फिर ग्रेटर नोएडा के कासना चला गया. इसके बाद गोविंदपुरम में रहा और पिछले कुछ सालों से गाजियाबाद के छपरौला गांव में किराये के मकान में रह रहा था. हर कुछ साल में पता बदलना उसकी गिरफ्तारी से बचने की रणनीति थी.
फरारी के दौरान आरोपी ने अपनी पहचान छिपाकर सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश की. वह छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपना और परिवार का खर्च चला रहा था. उसके परिवार में पत्नी और एक बेटा है. पुलिस का कहना है कि वह बेहद सतर्क रहता था और अपनी गतिविधियां सीमित रखता था ताकि किसी को शक न हो.
खुफिया सूचना बनी गिरफ्तारी की वजह, 15 साल बाद शिकंजे में
क्राइम ब्रांच की टीम को आरोपी की गाजियाबाद में मौजूदगी की गुप्त सूचना मिली. टीम ने कई दिनों तक तकनीकी निगरानी और मुखबिरों के जरिए जानकारी जुटाई. 29 जुलाई को मिली पुख्ता सूचना के आधार पर छपरौला गांव में जाल बिछाया गया और आरोपी को किराये के मकान से गिरफ्तार कर लिया गया.
15 साल बाद कानून के शिकंजे में
क्राइम ब्रांच का कहना है कि आरोपी पिछले 15 साल से कानून से भाग रहा था और बार-बार ठिकाने बदलकर गिरफ्तारी से बचता रहा.उसकी गिरफ्तारी के साथ एक लंबे समय से लंबित पैरोल जंपर का मामला भी सुलझ गया. अब उसे दोबारा जेल भेजने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
'कंगना रनौत को भी स्टूडेंट होना चाहिए', सौरव दास ने ऐसे दिया जवाब























