दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदारों पर बढ़ेगा बोझ? कांग्रेस नेता देवेंद्र यादव ने DDA की नई नीति पर उठाए सवाल
Delhi News: कांग्रेस नेता देवेन्द्र यादव के मुताबिक, केन्द्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के निर्देश पर 2 जनवरी 2026 से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.

- DDA की नई नीति से प्रॉपर्टी फ्रीहोल्ड कराने में मुश्किल.
- 2 जनवरी 2026 से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन पर लगेगी रोक.
- सर्कल रेट लागू होने से प्रॉपर्टी के शुल्क बढ़ेंगे.
- आम जनता पर पड़ेगा आर्थिक दबाव, प्रक्रिया होगी महंगी.
दिल्ली में घर खरीदने या अपनी प्रॉपर्टी को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कराने की योजना बना रहे लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने आरोप लगाया है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की नई नीति आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकती है. उनका कहना है कि फ्रीहोल्ड कन्वर्जन प्रक्रिया पर रोक और सर्कल रेट लागू करने की तैयारी से संपत्तियों की कीमतों में तेज उछाल आएगा.
देवेन्द्र यादव के मुताबिक, केन्द्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के निर्देश पर 2 जनवरी 2026 से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. इस फैसले ने हजारों प्रॉपर्टी मालिकों को असमंजस में डाल दिया है, क्योंकि पहले से आवेदन करने वालों का काम भी ठप हो गया है. उन्होंने बताया कि फ्रीहोल्ड कन्वर्जन के लिए ऑनलाइन पोर्टल पिछले तीन महीनों से बंद है. जिन लोगों ने पहले रजिस्ट्रेशन कराया था, उनका प्रोसेस भी आगे नहीं बढ़ रहा है. इससे लोगों को न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि उनकी संपत्ति से जुड़े जरूरी काम भी अटक गए हैं.
सर्कल रेट लागू होते ही बढ़ेंगे चार्जेस
देवेन्द्र यादव ने कहा कि DDA अब दिल्ली सरकार द्वारा तय सर्कल रेट को अपनाने की तैयारी में है. इससे कन्वर्जन शुल्क, लैंड यूज चार्ज, ग्राउंड रेंट और लाइसेंस फीस जैसे कई शुल्क बढ़ जाएंगे. उनका दावा है कि 2011 के बाद से इन दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ था, लेकिन अब एक साथ भारी बढ़ोतरी की जा सकती है. फ्रीहोल्ड स्टेटस के बिना दिल्ली में प्रॉपर्टी को बेचना, ट्रांसफर करना या गिरवी रखना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में इस प्रक्रिया पर रोक लगने से रियल एस्टेट ट्रांजेक्शन पर भी असर पड़ सकता है. हजारों मकान मालिक इस फैसले से सीधे प्रभावित हो रहे हैं.
आम लोगों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव
पहले फ्रीहोल्ड न कराने पर तीन साल तक कोई पेनाल्टी नहीं लगती थी, लेकिन अब नियमों में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. देरी से कन्वर्जन कराने पर हर साल पेनाल्टी बढ़ सकती है, जिससे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा. देवेन्द्र यादव ने आरोप लगाया कि DDA और सरकार की यह नीति मिलकर आम जनता पर आर्थिक बोझ डालने वाली है. उनका कहना है कि घर खरीदने, बेचने या फ्रीहोल्ड कराने वाले लोगों के लिए आने वाले समय में यह प्रक्रिया और महंगी और जटिल हो सकती है.




















