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Chhattisgarh Election 2023 News: चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ में सीएम फेस पर चर्चा, कांग्रेस से कौन?जानें- क्या कहते हैं समीकरण

CG Vidhansabha Chunav 2018 में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों का 2023 के चुनाव में क्या रोल होगा? इसके अलावा नेताओं के बीच चल रहे अनबन के मैटर क्या सुलझ गया है. जानें यहां-

Chhattisgarh politics: छत्तीसगढ़ में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले है. कांग्रेस 2018 की जीत को रिपीट करने की कोशिश में है. लेकिन इस साल चुनावी समीकरण दिलचस्प होने वाली है. क्योंकि इस साल सिर्फ बीजेपी(BJP) और कांग्रेस(Congress) के बीच टक्कर नहीं है. इस साल आम आदमी पार्टी(AAP) भी पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतर रही है. साथ ही सर्व आदिवासी समाज क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की फिराक में है. बहुजन समाज पार्टी (BSP) और जेसीसी जे (JCC J)अलग अलग चुनाव लड़ने जा रही है. यानी कुल मिलाकर चुनावी मैदान में सभी पार्टियों के घोड़े दौड़ने वाले है. ऐसे में कांग्रेस पार्टी किसके नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरेगी ये आज समझते है.

2018 में ये थे मुख्यमंत्री पद के दावेदार
साल 2018 में दिसंबर का महीना जब छत्तीसगढ़ में 15 साल बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई. लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसपर फैसला नहीं हो पा रहा था. क्योंकि दावेदारों में 4 लोगों के नाम सामने आए थे. तात्कालिक पीसीसी चीफ भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel), विधानसभा में नेताप्रतिपक्ष रहे टी एस सिंहदेव (TS Singh deo) केंद्रीय मंत्री रहे डॉ. चरणदास महंत(Charandas mahant) और लोकसभा सांसद रहे ताम्रध्वज साहू(Tamrdhwaj sahu) इन चारों की तस्वीर राहुल गांधी के साथ जारी की गई और भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बनाया गया.

2023 विधानसभा चुनाव में इन चारों नेताओं का क्या रोल है?
टी एस सिंहदेव मंझे हुए राजनेता है, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के ताकतवर ननेताओं में सिंहदेव का नाम आता है.कांग्रेस की सरकार आने के बाद सियासी उथल पुथल में बाबा -भूपेश की लड़ाई पूरे देश ने देखी है. जिस संभाग(सरगुजा) से टी एस सिंहदेव आते है वहां पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 14 के 14 सीट में जीत दर्ज की थी. इस लिए अगर सिंहदेव की नाराजगी कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है. इस लिए राजनीतिक एक्सपर्ट प्रो. अजय चंद्राकर मान रहे है सिंहदेव 2018 के चुनाव में घोषणा पत्र के अलावा कई पीढ़ियों का विरासत लेकर के 2018 के चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण प्रबंधन आर्थिक क्षेत्र में भी बहुमूल्य योगदान पार्टी को प्रदान किए थे. साथ ही साथ महाराजा होने के बाद भी उनका व्यक्तित्व जन मानस तक पहुंचा है. तो पार्टी उनके अनुभव और सेवाओं को फिर से प्राप्त करना चाहती.

विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत की  क्या है भूमिका!
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के सीनियर लीडर डॉ चरणदास महंत.लगभग 40 साल से राज्य और केंद्र सरकार का हिस्सा रहे है. राजनीति का लंबा अनुभव के साथ कांग्रेस के संगठन में मजबूत पकड़ रखते है. महंत छत्तीसगढ़ सबसे ज्यादा विधानसभा सीट वाले संभाग बिलासपुर संभाग से आते है. यहां 24 विधानसभा सीट है. जहां कांग्रेस के पास इस वक्त 13 सीट है. इस लिहाजा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत की भूमिका भी काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि केवल यही संभाग ऐसा है जहां आधे सीट कांग्रेस के पास और आधे बीजेपी, जेसीसी जे और बसपा के पास है. इस लिए बिलासपुर संभाग में कांग्रेस किसी भी हाल में कमजोर नहीं होना चाहती है. इस लिए महंत की भूमिका अहम मानी जाती है.

गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ओबीसी वोट बैंक का बड़ा चेहरा!
2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद छत्तीसगढ़ में ताम्रध्वज साहू ने जीत हासिल की थी. राज्य के 11 लोकसभा सीट में कांग्रेस केवल 1 सीट ही जीत सकी थी. छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू राज्य में सबसे बड़े वोट बैंक से साहू समाज यानी ओबीसी वर्ग से आते है. राज्य में 40 प्रतिशत से अधिक की जनसंख्या ओबीसी वर्ग की है. ताम्रध्वज साहू की 2023 के चुनाव में काफी अहम रोल है. पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रो अजय चंद्राकर कहते है कि इसमें कोई शक नहीं कि छत्तीसगढ़ में ओबीसी(OBC) की राजनीति में साहू समाज सामाजिक रूप से सशक्त और संख्या बल में भी बहुलता रखता है. तो इस फैक्टर को कांग्रेस पार्टी सकारात्मक रूप से आगामी चुनाव में बरकरार रखना चाहती है.

सीएम भूपेश ने पलट दिए समीकरण!
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस वक्त केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं ओबीसी वर्ग के देश में बड़े नेताओं में जाने पहचाने जा रहे है. राज्य में सीएम की कुर्सी में बैठने के बाद साढ़े चार साल की सरकार में सीएम बघेल ने अपनी पॉलिसी से घर घर तक पहुंचे है. इसके साथ अपने छत्तीसगढ़िया अंदाज के चलते राज्य के बड़े वोट बैंक में गहरा रिश्ता जुड़ा है. हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में बघेल की भूमिका और राज्य के कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन करा कर केंद्र के सामने भी बघेल ने अपना लोहा मनवाया है.

कांग्रेस के लिए SC-ST को जोड़ना हो सकता है बड़ी चुनौती
इसलिए छत्तीसगढ़ की राजनीति की गहरी समझ रखने वाले पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रो अजय चंद्राकर का मानना है कि अगर अनहोनी नहीं हुआ तो वर्तमान नेतृत्व में ही होने वाले विधानसभा चुनाव (Vidhansabha Chunav)में कांग्रेस पार्टी जाएगी और पार्टी 2018 चुनाव के एक्सपीरियंस से सामूहिक नेतृत्व को महत्व दे सकती है.इसके अलावा चंद्रकार ने ये भी कहा कि इन चारों के अलाव आदिवासी वर्ग और अनुसूचित वर्ग का कोई भी सदस्य इसमें शामिल नहीं होना कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है.

राजस्थान की तरह छत्तीसगढ़ में अनबन सुलझाने की कोशिश
चंद्राकर के अलाव पोलिटिकल एक्सपर्ट उचित शर्मा से भी हमने बातचीत की तो उनका कहना है कि पार्टी छत्तीसगढ़ में फिर से चुनाव जीतने के लिए सुलह करवाना चाहती है. इसके लिए हालही में सीएम हाउस में प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की मौजूदगी में चारों की बैठक हुई है. राजस्थान के हालात को देखते हुए पार्टी ने छत्तीसगढ़ का मैटर सुलझाने की कोशिश की है. मीटिंग सुलह किया गया है.उम्मीद है मीटिंग के बाद मन का गुबार निकला होगा. इस बार आपसी मनमुटाव कांग्रेस की डूबा सकती है. क्योंकि इस बार चुनाव बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व लड़ रही है. पिछले चुनाव(2018) में केवल राज्य की इकाई ने चुनाव लड़ा था. तो अनुमान है कि चुनाव आते तक सीटों का अंतर कम हो जाएगा और बराबरी की टक्कर हो सकती है.

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