पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के लिए BJP ने किया 'खेल'? रोहिणी आचार्य बोलीं- 'लगभग 90 लाख…'
West Bengal Elections 2026: रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया है कि बंगाल में वैध दस्तावेज होने के बावजूद लोगों के नाम हटाए गए हैं. परिवार के कुछ सदस्य वोटर लिस्ट में हैं और कुछ नहीं हैं.

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की बेटी रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya) ने बंगाल चुनाव को लेकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने गुरुवार (09 अप्रैल, 2026) को एक्स हैंडल से पोस्ट करते हुए कहा कि बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए बंगाल में चुनाव आयोग सारी हदें लांघ गया.
रोहिणी आचार्य ने कहा कि बंगाल में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नामों को हटाया गया है. रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 90 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. कुछ क्षेत्रों में तो करीब 25% वोटर्स हटाए जाने की बात सामने आई है. ये सीधे तौर पर जनतांत्रिक अधिकारों (वोट देने के अधिकार) से वंचित किए जाने का मामला है.
'एसआईआर की प्रक्रिया में मनमानी'
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि वैध दस्तावेज होने के बावजूद लोगों के नाम हटाए गए हैं. परिवार के कुछ सदस्य वोटर लिस्ट में हैं और कुछ नहीं हैं. ऐसे अनेकों मामले सामने आए हैं. एसआईआर (SIR) की पूरी प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां और मनमानी की गई है. चुनाव आयोग के द्वारा पूरी प्रक्रिया बिना पारदर्शिता के निष्पादित की गई है और दर्ज कराई गई आपत्तियों को बिना किसी पड़ताल के सिरे से खारिज व नजरअंदाज व खारिज किया गया है.
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एक्स पोस्ट में आगे रोहिणी लिखती हैं, "हैरान करने वाली बात है कि आयोग द्वारा लाखों वोटर्स तक नोटिस एक अप्रमाणित सॉफ्टवेयर के जरिए भेजे गए और मानवीय जांच की जगह ऑटोमेटेड फैसले लिए गए. पूरी प्रक्रिया बहुत कम समय में अव्यवस्थित तरीके से हड़बड़ी में एक साजिश की तरह संचालित की गई और बीजेपी के निर्देश पर चिह्नित जायज वोटर्स को भी वोटर लिस्ट से बाहर रखने का निर्णय लिया गया."
कहा कि गंभीर चिंता का विषय तो ये रहा कि वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए बनाया गया अपील सिस्टम भी महज खानापूर्ति करता दिखा. कहीं भी अपील ट्रिब्यूनल सही से काम नहीं कर रहे थे. अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को जानबूझकर निशाना बनाया गया. बिल्कुल साफ है कि वोट चोरी के मकसद से, बीजेपी को चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग सारी हदें लांघ गया.
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