'सम्राट चौधरी को चूड़ियां पहन लेनी चाहिए', बिहार के CM पर कौन भड़का?
रोहिणी आचार्य ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ-साथ पुलिस-प्रशासन को भी घेरा है. रोहिणी ने हमला किया कि बिहार में सरकार कहने को है, दरिंदगी का सिलसिला जारी है.

जमुई, समस्तीपुर और बांका से वायरल हुए वीडियो को लेकर आरजेडी प्रमुख लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने बिहार के सीएम और पुलिस-प्रशासन पर हमला बोला है. शुक्रवार (25 सितंबर) को रोहिणी आचार्य ने एक्स हैंडल से एक पोस्ट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के साथ-साथ बिहार की सरकार में बैठे लोगों और पुलिस-प्रशासन के लोगों को चूड़ियां पहन लेनी चाहिए.
रोहिणी आचार्य ने कहा कि पहले जमुई, फिर दरभंगा, उसके बाद समस्तीपुर और अब बांका में एक बेटी हैवानियत की शिकार हुई है. बिहार में केवल कहने को सरकार है, बहन-बेटियों के साथ दरिंदगी का सिलसिला जारी है.
सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए रोहिणी ने कहा कि सरकार की कमान संभाल रहे लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस की नाकामी के कारण राज्य में बहन-बेटियों की आबरू से खिलवाड़ करने वाले हैवानों के हौसले बुलंद हैं. ऐसा लगता है कि सुरक्षा देने का दावा करने वाले तमाम लोगों ने हाथों में चूड़ियां पहन रखी हैं.
मुख्यमंत्री के साथ - साथ बिहार की सरकार में बैठे लोगों और पुलिस - प्रशासन के लोगों को चूड़ियाँ पहन लेनी चाहिए ..
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) September 25, 2026
पहले जमुई , फिर दरभंगा , उसके बाद समस्तीपुर और अब बांका में हैवानियत की शिकार हुई एक और बेटी, बिहार में केवल कहने को सरकार है , अंतहीन सिलसिला जारी है बहन - बेटियों… pic.twitter.com/pdtGrNCkCD
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'तत्काल घटनाओं को रोकने की जरूरत'
रोहिणी ने कहा, "दिखावे की कार्रवाई और कोरी बयानबाजी कर सरकार में बैठे लोगों के साथ-साथ पूरा प्रशासनिक अमला अपनी ड्यूटी निभाने का सिर्फ कोरम पूरा करता दिखता है. तत्काल जरूरत घटनाओं के घटने से रोकने की है. घटना घटने के बाद कार्रवाई की बात कर अपनी पीठ खुद थपथपाना समाधान नहीं है."
उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस-प्रशासन तंत्र में इच्छाशक्ति की इतनी कमी हो चुकी है कि अपराधियों में कानून का नाममात्र का खौफ भी नहीं बचा है. जब-जब बहन-बेटियों की सुरक्षा पर सवाल उठता है, तब-तब जिम्मेदार लोग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. राज्य की यह दयनीय स्थिति साफ बयां करती है कि सरकार पूरी तरह से संवेदनहीन और विफल हो चुकी है.
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