Samastipur News: समस्तीपुर के अभिषेक चौहान ने रचा इतिहास, UPSC में 102वीं रैंक लाकर बने IPS, बधाईयों का लगा तांता
UPSC Result 2026: समस्तीपुर के अभिषेक चौहान ने इतिहास रच दिया है. उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 102वीं रैंक हासिल की है. उनका सपना है कि वह देश की सेवा करेंगे.

बिहार के समस्तीपुर जिले का नाम एक बार फिर देश में छा गया है. यहां मोहिउद्दीननगर प्रखंड के राजाजान गांव निवासी प्रो. डॉ. अभय कुमार सिंह और अनुराधा राजपूत का पुत्र अभिषेक चौहान ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में इतिहास रच दिया है.
अभिषेक चौहान पहली बार में ही 102वीं रैंक लाकर आईपीएस बन गए हैं. इस बड़ी उपलब्धि से उन्होंने पूरे जिले को गौरवान्वित किया है. अभिषेक चौहान का जन्म 18 नवंबर 1999 को पूसा स्थित अस्पताल में हुआ था. बचपन से ही वह मेघावी छात्र रहे हैं.
हाजीपुर से की है अभिषेक ने आरम्भिक शिक्षा
अभिषेक चौहान ने आरम्भिक पढ़ाई हाजीपुर में अक्षरा स्कूल से शुरू की थी. जहां से उन्होंने एक साथ सैनिक स्कूल और आर के मिशन में छठी क्लास में नामांकन की परीक्षा निकालकर अपनी पढ़ाई की दुनिया में कदम रखा था. जहां से उन्होंने एम टेक पुरा करते हुए गोल्ड मेडलिस्ट बनकर जिले का नाम रौशन किया था.
साथ ही अभिषेक ने 2022 में अपनी बहन मेधा चौहान की शादी होने के बाद लोक सेवा आयोग की तैयारी शुरू कर दी थी. 2025 में पहली बार में ही संघ लोक सेवा आयोग की पीटी और मेंस परीक्षा पास कर 2026 में इंटरव्यू में भी शानदार तरीके से सदस्यों द्वारा पूछे जा रहे सवाल का सटीक जबाव देते हुए अपनी काबलियत सामने रखी थी.
रिजल्ट आते ही खिले सभी के चेहरे
शुक्रवार (6 मार्च) को जैसे ही संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा का रिजल्ट घोषित हुआ तो उन्हें 102वीं रैंक में आईपीएस पद प्राप्त हुआ है. बताते चले कि अभिषेक चौहान के पिता प्रो. डॉ. अभय कुमार सिंह नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) हैं. उनके चाचा पैक्स अध्यक्ष अजय कुमार सिंह सहित उनके ननिहाल में भी खुशी का माहौल है. अभिषेक के नाना अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष नवल किशोर सिंह, नानी सुशीला सिंह कई रिश्तेदारों ने उन्हें बधाई दी है.
आईआईटी क्रैक कर चुके हैं अभिषेक
बता दें कि अभिषेक चौहान ने आर के मिशन स्कूल के लिए क्वालिफाई करने के बाद फिर इंटर करते ही आईआईटी क्रैक किया. आईआईटी के बाद विदेशों मे शानदार पैकेज का अवसर था, लेकिन यहां तो अपने देश में ही रहने की जिद थी. उस तरफ ध्यान ही नहीं था.
अभिषेक का ध्यान था तो बस सिविल सर्विस पर. एकाग्रता थी, डेडिकेशन था जिसकी वजह से आज वह सफल हो गया. अभिषेक एक रूम में पिछले दो सालों से बड़ी शिद्दत से इस घड़ी के लिए तपस्या में लगे हुए थे.
उन्होंने कोई कोचिंग और न ही कोई ट्यूशन का सहारा लिया. अभिषेक ने सिर्फ सेल्फ स्टडी और इंटरनेट के माध्यमों को आधार बनाया और झंडा गाड़ दिया. साथ ही साथ यह भी बताते चले कि भारतीय क्रिकेट टीम का भविष्य वैभव सूर्यवंशी उनका भांजा है.
Source: IOCL

























