Chandan Mishra Patna: 'कल मारूंगा...' ऐलान करके हत्या करता था चंदन, दोस्त ने अस्पताल में मरवा दिया
Chandan Mishra Patna: बक्सर के कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा, जिस पर कई हत्याओं के आरोप थे, की पटना के पारस अस्पताल में गोली मारकर हत्या कर दी गई. हत्या का आरोप उसके पुराने साथी शेरू पर है.

राजधानी पटना के मशहूर पारस अस्पताल में पांच लोग बेखौफ होकर घुसते हैं. दूसरी मंजिल पर बने कमरा नंबर 209 के सामने पहुंचकर पिस्टल में गोलियां लोड करते हैं और फिर कमरे में मौजूद मरीज को मारकर बड़े इत्मिनान से फरार हो जाते हैं. पता चलता है कि जिसे गोलियां मारी गईं हैं वो भी कोई सामान्य आदमी नहीं है बल्कि बक्सर का खूंखार अपराधी चंदन मिश्रा है, जिस पर दर्जनों हत्याओं के आरोप हैं और उसे हत्या के जुर्म में उम्रकैद तक की सजा हो चुकी है.
तब ये भी पता चलता है कि ये हत्या चंदन के ही पुराने साथी शेरू ने करवाई है जो एक वक्त में उसके जुर्म का साझीदार था और पिछले दिनों दोनों के रास्ते इस कदर अलग हुए थे कि दोनों एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए थे. तो क्या है कहानी बक्सर के शेरू-चंदन की, कैसे हुई दोस्ती, किन बड़ी वारदात में शामिल थे ये दोनों शातिर अपराधी, कैसे इनकी दोस्ती दुश्मनी में बदल गई और अब आखिर ऐसा क्या हुआ कि शेरू ने चंदन की जान ले ली, सब बताएंगे विस्तार से.
क्रिकेट खेलने के दौरान ही दोनों की हुई थी दोस्ती
बिहार के बक्सर जिले का एक गांव है सेमरी बड़ा गांव है. शेरू वहीं का रहने वाला है. उसका असली नाम है ओंकार नाथ सिंह. चंदन मिश्रा भी सिमरी के पड़ोसी गांव सोनबरसा का रहने वाला था. दोनों क्रिकेट के शौकीन थे और क्रिकेट खेलने के दौरान ही दोनों की दोस्ती भी हुई थी. ये दोस्ती कितनी गाढ़ी थी इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि साल 2009 में क्रिकेट खेलते वक्त जब अनिल सिंह से इनका विवाद हो गया तो दोनों ने मिलकर अनिल सिंह की हत्या कर दी. दोनों को जेल हुई.
बाहर आए तो पूरी तरह से अपराधी बन गए
नाबालिग थे तो जल्द ही रिहा भी हो गए. लेकिन बाल सुधार गृह में इनको अपराधी बनने की ट्रेनिंग मिल गई और जब ये बाहर आए तो पूरी तरह से अपराधी बन गए. इन्होंने बाकायदा अपना गिरोह बनाया और फिर रंगदारी मांगने का सिलसिला शुरू हो गया. पैसे आते गए, नए-नए लड़के जुड़ते गए, हथियार आते गए और इस गैंग ने बक्सर और उसके आस-पास के इलाके में अपना आतंक कायम कर लिया.
2011 में की कुल 6 हत्याएं की
अकेले साल 2011 में ही इन गैंग ने कुल 6 हत्याएं कीं, जिनमें मार्च 2011 में हुई मोहम्मद नौशाद की हत्या, अप्रैल 2011 में हुई भरत राय की हत्या, मई 2011 में हुई जेल के क्लर्क हैदर अली की हत्या, जुलाई 2011 में हुई शिवजी खरवार और मोहम्मद निजामुद्दीन की हत्या और अगस्त 2011 में हुई चूना व्यापारी राजेंद्र केसरी की हत्या शामिल है.
रंगदारी देने से इनकार करने पर हुई थी हत्या
राजेंद्र केसरी की हत्या 21 अगस्त 2011 को हुई थी. और वजह सिर्फ ये थी कि राजेंद्र केसरी ने रंगदारी देने से इन्कार कर दिया था. इस हत्या से ठीक एक दिन पहले 20 अगस्त को चंदन ने ऐलान किया था कि राजेंद्र केसरी को कल मारूंगा. और चंदन ने ऐसा ही किया भी. उसने बाकायदा एलान करके राजेंद्र केसरी की हत्या कर दी. ये काम चंदन और शेरू ने मिलकर अंजाम दिया था. लेकिन इसी हत्याकांड के बाद दोनों दोस्तों के बीच पैसे को लेकर अनबन हो गई. बताने वाले बताते हैं कि इसने जातिगत समीकरण भी थे, जिसने दोनों अपराधियों को अलग कर दिया और फिर दोनों के जातिगत समीकरणों के आधार पर अलग-अलग गैंग बना लिए.
राजेंद्र केसरी हत्याकांड में दोनों को हो गई सजा
यही वो हत्याकांड था, जिसमें शेरू और चंदन दोनों गिरफ्तार भी हुए. और इनकी गिरफ्तारी हुई थी कोलकाता से. क्योंकि दोनों राजेंद्र केसरी की हत्या करके कोलकाता फरार हो गए थे. बक्सर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया. बक्सर से उन्हें पहले भागलपुर और फिर पटना के बेऊर जेल शिफ्ट कर दिया गया. जेल में रहने के दौरान भी दोनों का आतंक कायम रहा और वो हत्याएं करवाते रहे. इस दौरान राजेंद्र केसरी हत्याकांड में दोनों को सजा हो गई.
शेरू अब भी है जेल में
इस हत्याकांड में शेरू को फांसी हुई जबकि चंदन को उम्रकैद की सजा हुई थी. जब जज चंदन को उम्रकैद की सजा सुना रहे थे तो चंदन ने कोर्ट में मौजूद पुलिस वाले का हथियार छीनकर उसे गोली मार दी और हत्या कर वो फरार हो गया. आरा पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर फिर से जेल भेज दिया. वहीं शेरू की फांसी की सजा भी हाईकोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दी. शेरू अब भी जेल में है. चंदन भी जेल में ही था.
वो इलाज के लिए पैरोल पर बाहर आया था. उसे पाइल्स था, जिसका ऑपरेशन हुआ था. 18 जुलाई को उसकी पेरोल खत्म हो रही थी.
16 जुलाई को ही शूटर सेल गठन करने का किया था ऐलान
लेकिन उससे पहले ही 17 जुलाई को दोस्त से दुश्मन बने शेरू गैंग के पांच लोगो ने अस्पताल के अंदर घुसकर चंदन की हत्या कर दी और फरार हो गए. इससे पहले भी आरा के तनिष्क शोरूम में जो 25 करोड़ रुपये की डकैती हुई थी, उसका आरोपी भी यही शेरू गैंग था. अब इस हत्याकांड की जांच के लिए एसटीएफ लगी हुई है. अपराधियों के चेहरे सीसीटीवी में कैद हैं, तो पुलिस को शिनाख्त करने में शायद ही कोई दिक्कत हो. लेकिन सबसे बड़ा सवाल बिहार पुलिस के इकबाल पर है, जिसने अपना दबदबा बनाए रखने के लिए 16 जुलाई को ही शूटर सेल गठन करने का ऐलान किया था.
इस ऐलान के 24 घंटे भी नहीं बीते कि पांच-पांच शूटरों ने अस्पताल में दाखिल होकर दूसरे बड़े शूटर की हत्या कर दी और फरार हो गए. अब एडीजी कह रहे हैं कि बिहार में मई, जून और जुलाई में तो हत्याएं होती ही हैं. जब एडीजी का ही ये बयान है, तो आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि बिहार में कितनी बहार है और इसके बावजूद भी नीतीशे कुमार हैं. तभी तो पप्पू यादव अब बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर रहे हैं.
अब बिहार में राष्ट्रपति शासन तो लगने से रहा. और एडीजी कह ही रहे हैं कि मई, जून, जुलाई में हत्याएं होती हैं. जुलाई में अब भी 10 दिन से ज्यादा का वक्त बचा है तो क्या बिहार एक बार फिर और ज्यादा हत्याओं के लिए तैयार है.
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Source: IOCL























