NDA सरकार ने महिलाओं के साथ विश्वासघात किया? जानिए तेजस्वी यादव ने ऐसा क्यों कहा
Tejashwi Yadav News: तेजस्वी का कहना है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत पंजीकृत 18 लाख महिलाओं को पहली किश्त के रुपये नहीं मिले हैं. पढ़िए उन्होंने और क्या कहा है.

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को लेकर एनडीए सरकार पर हमला किया है. सोमवार (27 अप्रैल, 2026) को तेजस्वी ने एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि बिहार की महिलाओं के साथ एनडीए सरकार ने विश्वासघात किया है. सफेद झूठ बोल उनकी भावनाओं का दोहन कर करोड़ों महिलाओं के साथ दिनदहाड़े धोखेबाजी की है.
तेजस्वी यादव का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव में हार का अंदेशा होते ही, बीच चुनाव में मतदान के दिन तक, बैंक खुलवाकर मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए एनडीए सरकार ने महिलाओं और जीविका दीदियों के बैंक खातों में 10 हजार रुपये भेजे.
उन्होंने कहा कि लालच देकर, कड़ी चेतावनी और धमकी के साथ डराकर कहा गया कि मतदान केंद्र में कैमरा लगा है अगर अमुक पार्टी के अमुक निशान पर बटन नहीं दबाएंगे तो आपके खाते में आए पैसे वसूलेंगे. प्रलोभन दिया गया कि चुनाव के बाद आगे की दो लाख की किश्त उम्मीद दी गई कि चुनाव के बाद छह महीने के अंदर शेष दूसरी किश्त को अविलंब महिलाओं के खाते में 2 लाख भेजे जाएंगे. छह महीने हो गए हैं, अब ये धोखेबाज-दगाबाज नेता अपनी कुर्सी के खेल में लीन हैं. खजाना खाली है. वित्तीय स्थिति बदतर है.
18 लाख महिलाओं को नहीं मिली पहली किश्त
आरजेडी नेता ने दावा किया है कि चुनाव बाद पूर्व से इस योजना (मुख्यमंत्री महिला रोजगार) में पंजीकृत 18 लाख महिलाओं को पहली किश्त के रुपये नहीं मिले. 1 करोड़ 81 लाख जीविका दीदियों और महिलाओं को दूसरी किश्त नहीं मिली. चुनाव के समय वादा किया गया था कि इस योजना के तहत महिलाओं को 2 लाख रुपये दिए जाएंगे.
सरकार पर हमला करते हुए तेजस्वी ने कहा कि केवल चुनावी लाभ लेने के लिए एनडीए ने बिहार की मातृशक्ति के साथ धोखेबाजी की है. उनके बाल-बच्चों के वर्तमान और भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है. युवाओं के सपनों का कत्ल किया है. शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों को जोखिम डाल दिया है. बिहार में अराजक स्थिति उत्पन्न हो चुकी है.
एक्स पोस्ट के जरिए तेजस्वी ने कहा कि सरकार जानती थी कि बिहार के पास सीमित संसाधन होने के बावजूद उधार लेकर चुनावों के अंतिम दिनों में वोट लूटने के लिए विभिन्न मदों में 41,000 करोड़ रुपये नकद बांटना आत्मघाती कदम है, लेकिन कुर्सी के लालची लोगों ने राज्यहित पर स्वार्थ को प्राथमिकता दी.





















