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SIR को लेकर EC में घमासान? 14 आपत्तियों पर मनोज झा का बड़ा हमला

SIR को लेकर EC में 14 बार आपत्ति की रिपोर्ट पर मनोज झा ने CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगा, रिपोर्ट में Form-6, वोटर डेटा और अपील प्रक्रिया पर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां बताई गई हैं.

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कामकाज और कई फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई. इनमें वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने, अपील और चुनावी डेटा के सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दे शामिल हैं.

RJD सांसद मनोज झा ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह रिपोर्ट बताती है कि एक संवैधानिक संस्था, जिसका काम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है, उसके भीतर फैसले किस तरह लिए जा रहे थे. उन्होंने दावा किया कि 10 महीनों में 14 बार लिखित असहमति जताई गई, स्पष्टीकरण मांगे गए और चेतावनी देने की कोशिश हुई, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इन्हें दरकिनार किया.

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'जनता का 10% विश्वास बचा है, वह भी खत्म हो जाएगा'

मनोज झा ने कहा कि अगर रिपोर्ट सामने आने के बाद भी CEC अपने पद पर बने रहते हैं तो जनता का जो 10% विश्वास बचा है, वह भी खत्म हो जाएगा उन्होंने उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की. झा ने यह भी आरोप लगाया कि लोकतंत्र को “अंधे कुएं” में भेजने की कोशिश थी, लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने इसे सामने ला दिया.

SIR और Form-6 को लेकर उठे सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अहम आपत्तियों में Form-6 में बदलाव शामिल था. यह नया मतदाता पंजीकरण कराने का फॉर्म है. रिपोर्ट में कहा गया कि इसमें SIR से जुड़ा एक अतिरिक्त सवाल जोड़ा गया था. चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने मई में इसकी वैधानिकता पर सवाल उठाए थे. बाद में संधू ने बदलाव को “अनधिकृत” और “अवैध” बताते हुए हटाने की मांग की.

वोटर डेटा और पश्चिम बंगाल की अपील पर भी विवाद

दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता डेटा के केंद्रीकरण और EROs की तकनीकी पहुंच को लेकर भी चिंता जताई. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े अपील मामलों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए. गोवा में 97 ऐसे मतदाताओं का मामला भी रिपोर्ट में सामने आया, जिन्हें ERO ने योग्य माना था, लेकिन सॉफ्टवेयर में अंतिम सूची में उनका फैसला दर्ज नहीं हो सका.

चुनाव आयोग ने रिपोर्ट पर क्या कहा?

रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग के सूत्रों ने अंदरूनी मतभेद की बात से इनकार किया. आयोग के मुताबिक SIR समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं.

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नूरनैन अली एक कंसल्टेंट राइटर हैं, जिनकी विशेषज्ञता राजनीति, राज्य सरकार की नीतियों और क्राइम रिपोर्टिंग में है. उन्हें चुनावी कवरेज का लंबा अनुभव है. उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018, लोकसभा चुनाव 2019 और 2024 तथा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 और 2022 जैसे महत्वपूर्ण चुनावों को कवर किया है.  
नूरनैन अली साल 2014 से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, बिहार और हरियाणा से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग की है. वे टोटल टीवी, रफ्तार न्यूज, एसएमबीसी स्वराज, ईटीवी भारत, वे2न्यूज और लल्लूराम जैसे मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. पत्रकारिता के अलावा उन्हें खाना बनाना, किताबें पढ़ना और सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्में देखना पसंद है. वे गजल, कव्वाली और 90 के दशक के हिंदी गानों के भी शौकीन हैं.  
उन्होंने बीए (राजनीति शास्त्र एवं भूगोल) की शिक्षा प्राप्त की है. इसके साथ ही पत्रकारिता एवं विज्ञापन में 2 वर्षीय डिप्लोमा और ग्रामीण विकास में मास्टर्स किया है.  

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