14 या 15 जनवरी... मकर संक्रांति को लेकर फिर बना संशय, जानें कब मनाना होगा लाभकारी
Makar Sankranti Date Confusion: मकर संक्रांति 2026 को लेकर संशय बना हुआ है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य 14 जनवरी की रात मकर राशि में प्रवेश करेगा. इसलिए स्नान-दान और पूजा के लिए 15 जनवरी को ही संक्रांति मनाना शुभ है.

धार्मिक मानता का विशेष महत्व रखने वाले हिंदुओं का महत्वपूर्ण त्योहार मकर संक्रांति की तैयारी लोग जोर से कर रहे हैं. बिहार में इस त्योहार को लेकर लोग काफी उत्साहित रहते हैं. इस दिन दही, चुरा और तिलकुट का भोजन होता है. इस त्योहार के बाद खरमास की समाप्ति हो जाती है और शुभ कार्य हो जाते हैं.
मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी को हमेशा से मनाया जाता रहा है. लेकिन पिछले 5-6 सालों से संसय की स्थिति बनी रही है और कोई 14 जनवरी को मकर संक्रांति मानते हैं तो कोई 15 जनवरी को. क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और सूर्य उत्तरायण हो जाते है. इसके बाद खरमास की समाप्ति हो जाती है. सूर्य जब से मकर राशि में प्रवेश करता है उसके बाद से ही मकर संक्रांति मानना उचित माना जाता है.
किस दिन मनाया जाएगा मकर संक्रांति त्योहार
14 जनवरी या 15 जनवरी यह संसय की स्थिति बनी हुई है. कई पंडितों का मानना है कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाया जा सकता है इस दिन 3:30 बजे के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. लेकिन कई पंडितों का कहना है मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाना उचित है. पटना के प्रख्यात पंडित अशोक द्विवेदी का कहना है कि बिहार में सबसे ज्यादा महावीर पंचांग, ऋषिकेश पंचांग और मिथिला पंचांग से लोग धार्मिक कार्य करते हैं. इन पंचांगों में साफ तौर पर लिखा हुआ है कि सूर्य कन्या राशि में है और 14 जनवरी की रात्रि 9:19 पर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. उसी वक्त सूर्य उत्तरायण हो रहे हैं. चूंकि रात्रि में मकर संक्रांति का स्नान दान नहीं हो सकता है और सूर्य उदय दूसरे दिन 15 जनवरी को ही होगा, तो वैसे स्थिति में 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मानना लाभकारी है.
15 जनवरी को शुभ मानी जाती है मकर संक्रांति
उन्होंने बताया कि हर हाल में 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति का दिन शुभ माना जा रहा है. इस दिन धर्मालंबी व्यक्तियों के लिए स्नान, दान और पूजन करना लाभकारी होगा. 15 जनवरी को सूर्य उदय के साथ ही पुण्यकाल की शुरुआत हो जा रही है. लेकिन दोपहर 1:19 पर तक ही पुण्यकाल रहेगा. इस दौरान श्रद्धालु स्नान दान पूजन करके मकर संक्रांति का त्योहार मना सकते हैं. इस दिन सुबह 8:31 से 10:02 तक का समय विशेष शुभ मुहूर्त है. इस समय के दौरान स्नान दान पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी. क्योंकि उस वक्त में कुम्भ लग्न चलेगा, जो स्थिर लग्न कहा जाता है और शुभ मुहूर्त में यह आता है.
संक्रांति के दिन संगम में स्नान करना माना जाता है महत्वपूर्ण
अशोक द्विवेदी ने बताया कि मकर संक्रांति काफी महत्वपूर्ण त्यौहार में से एक है. इस दिन संगम या प्रसिद्ध नदी जैसे गंगा, जमुना या प्रसिद्ध बड़ी में स्नान करना बेहद लाभकारी और पूण्य की प्राप्ति माना जाता है. अगर कहीं बड़ी नदियां ना हो तो किसी भी छोटी नदी, तालाब, कुआं पर भी खुले में स्नान करना लाभकारी होता है. स्नान के बाद दान का विशेष महत्व है. इसमें ऊनी कपड़े, काला कंबल के साथ-साथ धार्मिक पुस्तक पंचांग का भी दान का काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन काला तिल, गुड़ दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. गरीबों को भोजन अवश्य कराएं.
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Source: IOCL























