नेपाल की बारिश से बिहार में बढ़ा बाढ़ का खतरा, कोसी उफान पर, बैराज के 33 गेट खुले
Bihar News In Hindi: नेपाल में भारी बारिश के चलते कोसी नदी उफान पर है. कोसी बैराज से 2.43 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया और 33 फाटक खोले गए है. प्रशासन ने तटवर्ती इलाकों में अलर्ट जारी किया है.

नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब बिहार की जीवनरेखा कही जाने वाली कोसी नदी पर दिखने लगा है. नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे सीमावर्ती इलाकों और तटबंध के अंदर रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है. गुरुवार को कोसी बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है.
कोसी बैराज से गुरुवार दोपहर 2 बजे तक कुल 2 लाख 43 हजार 170 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. बढ़ते जल दबाव को नियंत्रित करने के लिए बैराज के 33 फाटक खोल दिए गए हैं. जल संसाधन विभाग लगातार नदी के जलस्तर और प्रवाह पर नजर बनाए हुए है.
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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, डाउन स्ट्रीम (D/S) में पानी का बहाव 2 लाख 39 हजार 270 क्यूसेक दर्ज किया गया. वहीं पूर्वी कोसी मुख्य नहर में पानी का प्रवाह शून्य रहा, जबकि पश्चिमी कोसी मुख्य नहर में 3,900 क्यूसेक पानी छोड़ा गया.
नेपाल के बराहक्षेत्र में भी बढ़ा जलप्रवाह
नेपाल के बराहक्षेत्र स्थित बीकेएस स्टेशन पर दोपहर 2 बजे जलप्रवाह 1 लाख 77 हजार 750 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया. अधिकारियों का कहना है कि नेपाल के ऊपरी इलाकों में बारिश जारी रहने से आने वाले घंटों में कोसी नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है. जल संसाधन विभाग के अधिकारी स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहे हैं और संवेदनशील इलाकों में तैनाती बढ़ाई जा रही है.
तटबंध के अंदर रहने वालों को सतर्क रहने की अपील
कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है. स्थानीय अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें.
बारिश जारी रही तो बढ़ सकती है परेशानी
नेपाल के कैचमेंट एरिया में अगर बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहता है तो कोसी नदी में जलप्रवाह और बढ़ने की संभावना है. ऐसे में सुपौल समेत कोसी क्षेत्र के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. प्रशासन ने राहत और बचाव तैयारियों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है. नदी के जलस्तर में हो रहे बदलाव की हर घंटे निगरानी की जा रही है, ताकि समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें.
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