'700 परिवारों की रोजी-रोटी पर आफत', बक्सर इथेनॉल फैक्ट्री के मालिक की पीड़ा, सरकार पर भी लगाए आरोप
Buxar Ethanol Plant: बक्सर के नवानगर में निर्मित इथेनॉल फैक्ट्री के मालिक अजय सिंह ने कहा कि हम दिवालिया (Bankrupt) होने की कगार पर हैं. ना केंद्र सरकार न बिहार सरकार हमारी मदद कर रही है.

भारत प्लस इंडस्ट्री के CMD और बीजेपी नेता अजय सिंह ने इथेनॉल फैक्ट्री को लेकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है. अजय सिंह इथेनॉल फैक्ट्री के मालिक हैं. बक्सर के नवानगर में लगभग 300 करोड़ की लागत से इन्होंने इथेनॉल की फैक्ट्री लगाई थी. इनका कहना है कि केंद्र सरकार के पॉलिसी की वजह से इनके साथ बिहार के कुल 12 एथेनॉल फैक्ट्री बंद होने के कगार पर हैं.
अजय सिंह ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, ''इस फैक्ट्री से 700 परिवार का रोजी-रोटी चल रहा था जिस पर अब आफत आ गई है. हमारी बात कोई सुनने वाला नहीं है. ना केंद्र सरकार न बिहार सरकार हमारी मदद कर रही है. हम दिवालिया (Bankrupt) होने के कगार पर हैं.
सारी संपत्ति को मॉर्गेज रखकर लोन लिया- अजय सिंह
उन्होंने आगे कहा, ''हम अपनी सारी संपत्ति को मॉर्गेज रखकर लोन लिए हुए हैं लोन चुकाना आफत बन गया है. अगर केंद्र सरकार ने हमसे एग्रीमेंट नहीं किया होता तो हम यह फैक्ट्री नहीं लगाते.'' उन्होंने सरकार पर उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया.
सरकार ने इथेनॉल खरीदने से मुंह मोड़ लिया- अजय सिंह
भारत प्लस इंडस्ट्री के CMD ने आगे कहा, ''दिन का चैन और रात की नींद खो गई है. इतना बड़ा जो प्लांट हमने लगाया है, जो ये टैंक देख रहे हैं, हम इसमें इथेनॉल भरते हैं और सरकार ने खरीदने से मुंह मोड़ लिया है. ये बिहार में सिर्फ हमारे प्लांट की दशा नहीं है, बल्कि सारे प्लांट की यही स्थिति है. हमारे साथ-साथ मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में यही हालत है.
'हमारी पीड़ा भी सुनने वाला कोई नहीं'
अजय सिंह ने आगे कहा, ''अगर 2021 में हमसे नहीं कहा गया होता कि आप प्लांट लगाइए, आप निवेश कीजिए और केंद्र सरकार आपसे पूरा इथेनॉल खरीदेगी तो हम ये काम नहीं करते. आज हम इतने पैसे लगाकर उतने विवश है कि हमारी पीड़ा भी सुनने वाला कोई नहीं है. हम जाएं तो जाएं कहां. बहुत तकलीफ है, दिक्कत है, प्लांट में इथेनॉल टैंक्स भरे हुए हैं, पैसे लगे हुए हैं, यहां 600-700 लोग काम कर रहे हैं, उनकी रोजी रोटी आफत में है.
उन्होंने कहा कि हमारी मजबूरी को कोई समझने वाला नहीं है. हम क्या करें? क्या इतने बड़े प्लांट के लोहे-लक्कड़ को बेच दें? हम लोग पटना, दिल्ली लगातार विजिट कर रहे हैं. सरकार ने हमें बीच मझधारमें छोड़ दिया है. इससे सिर्फ मेरा ही घर नहीं चलता है, इससे 700 परिवारों का घर चलता है.''
Source: IOCL
























