बिहार: CM, डिप्टी CM से लेकर सरकार के फॉर्मूले तक, BJP-JDU के मन में क्या है? पूरी डिटेल
Bihar New CM: सूत्रों की मानें तो बिहार में बीजेपी का सीएम बनना तय है. जेडीयू से दो डिप्टी सीएम हो सकता है. सीएम की रेस में बीजेपी से छह और जेडीयू से डिप्टी सीएम की रेस में भी कुछ नाम हैं.

नीतीश कुमार बिहार की राजनीति से विदा लेकर राष्ट्रीय राजनीति में जाने वाले हैं. दो दशक तक बिहार में सत्ता की धुरी रहे नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का फैसला हर किसी को हैरान कर रहा है. जेडीयू के समर्थक और कार्यकर्ता इस फैसले को साजिश मान रहे हैं. नीतीश कुमार ने आज (5 मार्च) राज्यसभा के लिये नामांकन दाखिल कर दिया है. 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी. सूत्र बता रहे हैं कि नीतीश 10 अप्रैल तक बिहार के सीएम बने रहेंगे. लेकिन सवाल ये है कि विरोधियों को हमेशा मात देने वाले नीतीश कुमार गच्चा कैसे और कहां खा गये? 24 घंटे में कैसे बिहार की राजनीति कैसे बदली.
बिहार में ऐसे बदली पूरी सियासी तस्वीर
बिहार की एक खासियत है कि जब जब आपको लगता है कि आप बिहार को समझ गये तभी बिहार आपको झटका देता है. किसी पॉलिटिकल पंडित ने होली की सुबह तक इस बात की भविष्यवाणी नहीं की थी कि नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने वाले हैं. खबर कल शाम से चलने लगी थी. आज सुबह नीतीश कुमार के सरकारी निवास यानी एक अणे मार्ग के बाहर सैकड़ों की संख्या में समर्थक जमा हो गये.
लालू यादव, सुशील मोदी, उपेंद्र कुशवाहा के बाद अब नीतीश कुमार की बारी, बनाएंगे ये रिकॉर्ड
हंगामा हो रहा था, नारेबाजी हो रही थी. जेडीयू के कार्यकर्ता आक्रोशित थे. विरोध इस बात का हो रहा था कि नीतीश को जबरन सीएम की कुर्सी से हटाया जा रहा है. इन खबरों पर न तो जेडीयू का कोई नेता कुछ बोल रहा था और ना ही बीजेपी के लोग चुप्पी तोड़ रहे थे. तभी सुबह 10 बजकर 54 मिनट पर नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर ये पोस्ट किया और तमाम अटकलें हवा हो गई. तय हो गया है कि नीतीश बिहार से विदा हो रहे हैं.
नीतीश की इस विदाई की स्क्रिप्ट कब लिखी गई?
नीतीश की इस विदाई की स्क्रिप्ट कब लिखी गई, किसने लिखी और किसकी मर्जी से लिखी, ये तमाम सवाल पूछे जा रहे हैं. जवाब चंद लोगों को पता होगा. हो सकता है सालों बाद इससे पर्दा उठे. मुमकिन है ना भी उठे. लेकिन नीतीश बिहार की राजनीति से ऐसे विदा लेंगे इसकी कल्पना उनकी पार्टी ने नहीं की थी. लोग जानना चाहते हैं कि नीतीश के साथ खेल हुआ या नीतीश ने कोई खेल किया है?
20 नवंबर 2025: 10वीं बार CM बने नीतीश
20 नवंबर 2025 को आज से 100 दिन पहले नीतीश ने पटना में सीएम पद की शपथ ली थी. तामझाम के साथ शक्ति प्रदर्शन हुआ था. इसके बाद से बिहार की सियासत में सबकुछ सामान्य चल रहा था. फिर अचानक तस्वीर बदल गई.
ये राह नहीं आसान! नीतीश कुमार के बाद BJP के CM के सामने होंगी ये 5 बड़ी चुनौतियां
24 घंट में क्या क्या हुआ?
3 मार्च 2026: दोपहर 1 बजे जेडीयू दफ्तर में पार्टी दफ्तर में जेडीयू नेताओं की एक अनौपचारिक बैठक हुई. तय हुआ कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत 5 मार्च को जेडीयू में शामिल होंगे. कार्यक्रम की तैयारी के लिए रणनीति बनाई गई.
3 मार्च 2026: शाम 5 बजे होली से पहले वाले दिन सीएम हाउस में शाम को नीतीश कुमार के करीबी नेता पहुंचे । राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम को लेकर चर्चा हुई. सूत्रों के मुताबिक निशांत को राज्यसभा भेजे जाने पर नेताओं की आपस में बात हुई.
4 मार्च 2026: दोपहर 3 बजे होली के रंग में बिहार सराबोर था. लेकिन सीएम हाउस में बहुत शोरगुल नहीं था. सन्नाटे में अचानक से खबर आई कि नीतीश राज्यसभा जा सकते हैं.
4 मार्च 2026: शाम 4 बजे जैसे ही नीतीश को लेकर खबर आई वैसे ही अटकलों का बाजार गर्म हो गया. सीएम हाउस में जेडीयू के बड़े नेता पहुंचने लगे. नीतीश कुमार के साथ कोर टीम की बैठक शुरू हुई.
4 मार्च 2026: रात 8 बजे जेडीयू एमएलसी संजय गांधी बैठक से निकलकर प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के घर गये. सूत्रों के मुताबिक नीतीश ने उमेश कुशवाहा को अगला प्रदेश अध्यक्ष बनने की हरी झंडी दी और जरूरी संदेश देकर संजय गांधी को उनके पास भेजा.
4 मार्च 2026: रात 9 बजे सीएम हाउस में बैठक जारी थी. मंत्री विजय चौधरी रात 9 बजे बाहर निकले और नीतीश के राज्यसभा जाने की अटकलों को ये कहते हुए गर्म कर दिया कि फैसला सीएम लेंगे. और फिर रात होते होते तस्वीर साफ हो गई. नीतीश के दिल्ली जाने का रास्ता तय हो गया. अब इसके पीछे क्या रणनीति है ये आने वाला वक्त बताएगा.
अमूमन होली के दिन नीतीश की कोई न कोई तस्वीर सामने आती रही है लेकिन कल कोई तस्वीर नहीं आई. तमाम चर्चा के बीच नीतीश पहली बार आज उस वक्त दिखे जब उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह का स्वागत किया. नीतीश ने गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में अपना नामांकन भर दिया.
नीतीश कुमार लोकसभा के साथ ही विधान सभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं. अब राज्यसभा के साथ ही चारों सदनों का सदस्य बनने का गौरव हासिल कर लें.
नीतीश कुमार भी अप्रत्याशित फैसला लेने वाले नेता माने जाते हैं. इस बार उन्होंने 24 घंटे में बिहार की पूरी सियासी तस्वीर पलट दी. अब आगे वो कौन सी चाल चलेंगे ये देखने वाली बात होगी.
बिहार में अगला सीएम कौन होगा?
नीतीश के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद अब लाख टके का सवाल है कि बिहार का अगला CM कौन बनेगा? सूत्र बता रहे हैं कि गृह मंत्री अमित शाह और नीतीश कुमार के बीच आज भावी सरकार की रूपरेखा पर चर्चा हुई है. सरकार का फॉर्मूला भी तय किया गया है. एबीपी न्यूज़ के पास इससे जुड़ी एक्सक्लूसिव जानकारी है.
जो सबसे पुख्ता जानकारी है वो ये कि बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाने जा रही है. बीजेपी के अंदर इसकी चर्चा भी तेज हो गई है. बिहार में आज तक कभी बीजेपी का सीएम नहीं बना. 2005 से ही बीजेपी नीतीश के साथ सत्ता में साझीदार रही. लेकिन कभी भी इस कुर्सी पर अपने नेता को बिठा नहीं पाई. उत्तर भारत में बिहार ही एक मात्र ऐसा राज्य बचा है जहां बीजेपी अब तक अपना सीएम बनाना का सपना देखती रही है. बीजेपी के पास भले ही कोई सर्वमान्य चेहरा न हो लेकिन दावेदार आधा दर्जन से कम नहीं हैं.
- कोईरी जाति से आने वाले सम्राट चौधरी
- भूमिहार जाति के विजय सिन्हा
- ब्राह्मण जाति के मंगल पांडेय
- दलित बिरादरी के जनक राम
- ईबीसी समाज से आने वाले संजीव चौरसिया
- यादव जाति के नित्यानंद राय का नाम राजनीतिक गलियारों में लिया जा रहा है
इन नामों की चर्चा की वजह इनकी अपनी अपनी ताकत है तो इनके नाम के साथ कमजोरी भी कम नहीं है. सम्राट चौधरी को फ्रंटरनर माना जा रहा है. क्योंकि अभी सरकार में वो डिप्टी सीएम हैं. गृह मंत्रालय भी संभाल रहे हैं. खास बात ये है कि उसी कुर्मी-कोइरी फोल्ड से आते हैं जिसके नेता नीतीश कुमार हैं. माना जाता है कि नीतीश को इनके सीएम बनने से कोई दिक्कत नहीं होगी.
सम्राट चौधरी को बीजेपी नेतृत्व का आशीर्वाद भी हासिल हैं. लेकिन माइनस प्वाइंट ये है कि सम्राट मूल रूप से बीजेपी के नेता नहीं हैं. आरजेडी, जेडीयू, हम से होते हुए 7 साल पहले बीजेपी में शामिल हुए थे. बीजेपी को चूंकि पहली बार सीएम बनाना है तो हो सकता है कि मूल भाजपाई न होना सम्राट के रास्ते की रुकावट बन जाए.
दूसरे दावेदार विजय सिन्हा हैं जो बिहार में अभी दूसरे नंबर के डिप्टी सीएम हैं. लगातार चुनाव जीत रहे हैं. नेता विपक्ष और स्पीकर भी रहे हैं. इन दिनों तो बिहार में सबसे ज्यादा उन्हीं के काम की चर्चा भी है. लेकिन भूमिहार जाति से होना उनका माइनस प्वाइंट हो सकता है. कुछ ऐसी ही निगेटिव मार्किंग की लिस्ट में मंत्री मंगल पांडेय का नाम भी लिया जा रहा है.
गैर सर्वण बीजेपी की प्राथमिकता!
अभी तक जो चर्चा है उसके मुताबिक बीजेपी की प्राथमिकता गैर सवर्ण सीएम है. चूंकि पहली बार बीजेपी का कोई सीएम होगा तो तमाम पैमाने पर फिट होने के बाद ही उनके नाम पर मुहर लगेगी. वैसे सवर्ण सीएम की वकालत करने वाले यूजीसी नियम की दलील दे रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि यूजीसी विवाद को दबाने के लिए बीजेपी सवर्ण कार्ड खेल सकती है. रेस में दलित बिरादरी के जनक राम भी हैं जो पहले मंत्री रह चुके हैं. अभी विधान परिषद के सदस्य हैं. लो प्रोफाइल रहते हैं.
इसी तरह संजीव चौरसिया की भी सियासी कहानी है. तीन बार के विधायक संजीव के पिता गंगा प्रसाद संघ से जुड़े रहे हैं. छठे दावेदार नित्यानंद राय केंद्र में राज्य मंत्री हैं. इनके साथ दिक्कत ये है कि ये यादव जाति से आते हैं और बिहार में यादवों को आरजेडी का कोर वोटर माना जाता है. वैसे बीजेपी चौंकाने में माहिर मानी जाती है इसलिए हो सकता है कि इन नामों के अलावा कोई और नया नाम भी आखिरी वक्त में सामने आ जाए.
सरकार का फॉर्मूला क्या होगा?
सूत्रों की मानें तो सरकार का मौजूदा फॉर्मूला ही लागू रहेगा. बीजेपी का सीएम होगा तो जेडीयू का दो डिप्टी बनेगा. मौजूदा समीकरण के हिसाब से गृह मंत्रालय पर जेडीयू दावा करेगी. स्पीकर और मंत्रालयों का बंटवारा भी नए सिरे से होगा. बाकी सहयोगी दलों की भूमिका में बदलाव संभव है.
डिप्टी सीएम के लिये जेडीयू से जिन नामों की चर्चा है उनमें एक तो नीतीश के बेटे निशांत की हो रही है. जबकि दूसरा नाम दलित बिरादरी से आने वाले अशोक चौधरी या फिर भूमिहार जाति के विजय चौधरी की है.
Source: IOCL
























