Bihar News: कोरोना काल में मूर्ति व्यवसाय पर लगा ग्रहण, कारीगरों ने सरकार के सामने रखी मांग
Supaul: सुपौल में कोरोना काल के कारण सरकारी और गैर सरकारी शैक्षणिक संस्थाएं बंद हैं. ऐसे में अब ये संक्रमण मूर्ति व्यवसाय के लिए ग्रहण बन गया है. अब मूर्तिकारों ने सरकार से अपनी मांग रखी है.

Saraswati Puja: सुपौल में इन दिनों कोरोना संक्रमण काल को लेकर विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी शैक्षणिक संस्थाएं बंद है. इस बीच कुछ दिनों बाद सरस्वती पूजा आने वाली है. जिसको लेकर मूर्ति कला के कारीगर सरस्वती मां की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगे हैं. चूंकि कोरोना काल चल रहा है ऐसे में जो लोग सरस्वती जी की प्रतिमा बनाकर बेचते हैं, उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि यही हाल रहा तो उनकी मूर्तियां कहीं बनकर तैयार ही न रह जाए.
मूर्तिकारों का डर
कोरोना काल के कारण मूर्तियां बनाने वालों के बीच डर बैठा हुआ है. क्योंकि स्कूल या शैक्षणिक अन्य संस्था अगर इसी तरह बंद रहती है तो वहां सरस्वती की पूजा भी प्रभावित होंगी. सुपौल जिले के पिपरा बाजार में करीब चालीस साल से मूर्ति बनाने का कारोबार करने वाले गोपाल पोद्दार ने बताया कि उन्होंने करीब डेढ़ सौ मूर्तियां बनाई हैं. लेकिन मुश्किल से अस्सी नब्बे के खरीदार ही आ पाए हैं. ऐसे में बाकी की मूर्तियां अगर नहीं बिकती है तो उन्हें भारी आर्थिक क्षति भुगतना पड़ेगा. उन्होंने कहा की छोटी और बड़ी सभी तरह की उन्होंने मूर्तियां बनाई हैं. जिसका मूल्य पांच सौ से लेकर दस हजार तक है. लेकिन महंगी मूर्तियां इस बार नहीं बिक रही है.
क्या है सरकार से मांग
मूर्ति बनाने वाले गोपाल पोद्दार कहते हैं कि उन्हें यह आशंका सता रही है की कोरोना के कारण लॉकडाउन की यही स्थिति रही तो कई बनी हुई मूर्तियां बच जाएगी. जिससे उन्हें भारी क्षति होने की संभावना है. लिहाजा उन्होंने सरकार से अपील किया है कि सरकार या तो शैक्षणिक संस्थाओं को खोल दें या फिर उन्हें कर्ज दें ताकि वे अपनी क्षति की भरपाई कर सकें. यह सिर्फ एक कारीगर की समस्या नहीं है बल्कि जिले भर के तमाम मूर्ति बनाने वाले कारीगरों की यही समस्या है. ये लोग करीब दो महीने से दिन रात एक कर मूर्ति बना तो बना लिए हैं पर खरीदार नहीं मिल रहे हैं.
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