बिहार: अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले पर इस पार्टी के नेता का बड़ा बयान, 'BJP को इस…'
Bihar Politics: मुकेश सहनी का कहना है कि विरोधियों को डराने, धमकाने या उन पर शारीरिक हमला करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया जाएगा तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी. पढ़िए और क्या कुछ कहा है.

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी पर बीते शनिवार (30 मई 2026) को सोनारपुर में अंडे, जूते और पत्थर फेंके गए. अभिषेक बनर्जी ने यहां तक दावा किया है कि उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट भी की गई. इस बीच विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने इस हमले पर बीजेपी को घेरा है.
अभिषेक बनर्जी के साथ हुई इस घटना की मुकेश सहनी ने कड़ी निंदा की. बीते रविवार (31 मई, 2026) को सहनी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक दल या नेता के खिलाफ असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसा और मारपीट का कोई स्थान नहीं है.
वीआईपी प्रमुख ने कहा यदि विरोधियों को डराने, धमकाने या उन पर शारीरिक हमला करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया जाएगा तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी. किसी भी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक कार्यकर्ता पर हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था पर भी हमला माना जाना चाहिए.
'गंभीरता से ले भारतीय जनता पार्टी'
मुकेश सहनी ने कहा, "भारतीय जनता पार्टी को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और अपने कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों पर अंकुश लगाना चाहिए. बीजेपी का चाल-चलन और चेहरा लगातार असहिष्णु राजनीति को बढ़ावा देने वाला दिखाई दे रहा है. राजनीतिक विरोधियों के प्रति आक्रामक रवैया लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है."
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सलाह देते हुए सहनी ने कहा कि देश की राजनीति संवाद, बहस और जनहित के मुद्दों पर आधारित होनी चाहिए, न कि हिंसा और टकराव की संस्कृति पर. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संयम और जिम्मेदारी का परिचय देना आवश्यक है. राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को व्यक्तिगत हमलों और हिंसक घटनाओं में बदलना देशहित में नहीं है.
उन्होंने मांग की कि अभिषेक बनर्जी के साथ हुई घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन हिंसा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती.
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Source: IOCL
























