बिहार: BJP के पुराने नेता, संघ से जुड़े रहे, शिवराज सिंह चौहान को क्यों बनाया गया पर्यवेक्षक?
Bihar New CM: केंद्रीय नेतृत्व पर्यवेक्षक तय करता है. दमदार पर्यवेक्षक को इसलिए रखा जाता है ताकि मामले को संभाल सके. शिवराज सिंह चौहान के बारे में जानिए.

बिहार में पहली बार बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाने जा रही है. विधायक दल के नेता का चुनाव कराने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. कल (14 अप्रैल) शिवराज सिंह चौहान पटना आएंगे. ऐसी चर्चा है कि 15 को मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण होगा. सबसे बड़ा सवाल है कि विधायक दल के नेता का चयन करने के लिए शिवराज सिंह चौहान को ही केंद्रीय पर्यवेक्षक क्यों बनाया गया?
कई वरिष्ठ पत्रकार और नेताओं का मानना है कि यह कोई बड़ी बात नहीं है. इससे पहले विधायक दल के नेता के चयन के लिए केशव प्रसाद मौर्य को भेजा गया था. राजस्थान में विधायक दल के नेता को चुनने के लिए राजनाथ सिंह गए थे. अन्य राज्य में भी ऐसा होता रहा है.
पत्रकारों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व पर्यवेक्षक तय करता है. यह दिल्ली से ही होता है. पर्यवेक्षक विधायकों के बीच विधायक दल के नेता की घोषणा करता है. कई बार इसमें विधायकों का विरोध भी होता है और इसी के लिए दमदार पर्यवेक्षक को रखा जाता है ताकि मामले को संभाल सके.
कौन हैं शिवराज सिंह चौहान? (Who is Shivraj Singh Chouhan)
बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है. ऐसे में पुराने और नए नेता का भी सवाल उठ सकता है. इसलिए शिवराज सिंह चौहान पर केंद्रीय नेतृत्व ने भरोसा जताया है. शिवराज सिंह चौहान बीजेपी के काफी पुराने नेता हैं. जनसंघ के समय से जुड़े हुए हैं. 13 वर्ष की आयु में ही वे संघ से जुड़ गए थे.
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67 वर्षीय शिवराज सिंह चौहन बीजेपी के दिग्गज नेता हैं. वर्तमान में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री हैं. मध्य प्रदेश के सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुख्यमंत्रियों में से एक हैं. वे 'मामा' के रूप में लोकप्रिय रहे हैं. अतिपिछड़ा समाज से आते हैं.
वे मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से आते हैं. 1976-77 में जेल भी जा चुके हैं. बताया जाता है कि शिवराज सिंह चौहान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे और कई बड़े पदों पर भी रहकर जिम्मेदारी को संभालते रहे हैं. 1991 से 2005 के बीच विदिशा से पांच बार लोकसभा सदस्य रहे. 2005 से 2023 के बीच चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.
2023 के बाद जब केंद्रीय नेतृत्व ने मोहन यादव को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया तो उनके समर्थक रोने लगे थे. केंद्रीय नेतृत्व ने भले उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया लेकिन केंद्र में उन्हें जगह दी. संघ से जुड़े रहने के साथ बीजेपी के बड़े नेताओं में से वे एक माने जाते हैं.
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