बिहार: सरकारी स्कूलों को गोद लें, भूमिहीन विद्यालयों के लिए भी अच्छी खबर
Bihar Government School News: बिहार बोर्ड की ओर से 'मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान' नाम से डिजिटल पोर्टल को लॉन्च किया गया है. पढ़िए शिक्षा के क्षेत्र में क्या कुछ पहल की जा रही है.

बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार प्रयासरत है. इसी क्रम में अच्छी खबर भी सामने आई है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से सरकारी स्कूलों को पूर्ववर्ती छात्रों, आम नागरिक, एनआरआई, एनजीओ और कॉरपोरेट से जोड़ने की दिशा में पहल की गई है. बीते रविवार (09 अगस्त, 2026) को बिहार बोर्ड की ओर से 'मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान' नाम से डिजिटल पोर्टल को लॉन्च किया गया.
आजीवन गोद लेने का भी विकल्प
इसके माध्यम से बिहार के 73 हजार से अधिक सरकारी विद्यालयों के पूर्ववर्ती छात्र अपने विद्यालय अथवा राज्य के किसी भी सरकारी विद्यालय से जुड़कर उसके विकास में योगदान कर सकेंगे. रविवार को अधिवेशन भवन में शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित प्रशिक्षण सह चिंतन शिविर में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसएम ने बताया कि पूर्व छात्र समूह, संगठन, कॉरपोरेट या एनआरआई किसी एक सरकारी विद्यालय को तीन वर्ष, पांच वर्ष या आजीवन अवधि के लिए गोद ले सकेंगे.
भूमिहीन विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर जमीन
उधर दूसरी ओर राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने सोमवार (10 अगस्त, 2026) को आश्वासन दिया कि राज्य के भूमिहीन विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी. अधिवेशन भवन में चल रहे राज्यस्तरीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर के दूसरे दिन (सोमवार) डॉ. संजय जायसवाल कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.
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जानकारी दी गई कि दो महीने में 20 केंद्रीय विद्यालयों के लिए पांच-पांच एकड़ भूमि दी गई है. दिलीप जायसवाल ने बताया कि शिक्षा विभाग के भूमि संबंधी कार्यों के निष्पादन के लिए अलग से डीसीएलआर या एडीएम स्तर के पदाधिकारी को नोडल अफसर के रूप में तैनात किया जाएगा.
डॉ. जायसवाल ने कहा कि राजस्व विभाग के पास अबतक ऐसे 147 विद्यालयों की सूची आई है जहां पर अतिक्रमण है. यह संख्या और बढ़ सकती है. ऐसे विद्यालयों को अतिक्रमणमुक्त कराने और विद्यालयों तक पहुंच पथ के लिए जमीन देने की दिशा में त्वरित कार्रवाई की जा रही है.
राजस्व मंत्री ने सुझाव दिया कि विभागीय सचिव, डीईओ, आरडीडी और डीपीओ सहित सभी पदाधिकारी महीने में कम से कम एक दिन किसी विद्यालय में जाकर बच्चों से संवाद करें और कक्षा लें. इससे शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति को समझने में मदद मिलेगी.
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