बिहार बाढ़: गंडक के दबाव से चंपारण तटबंध टूटा, कई जिलों में बिगड़े हालात
तटबंध के टूटने के बाद जल संसाधन विभाग एवं जिला प्रशासन पश्चिम चंपारण की टीम एक्शन मोड में आ गई है. कहा जा रहा है कि गंडक के दबाव के चलते तटबंध टूटा है.

बिहार में गंडक के दबाव के चलते चंपारण तटबंध टूट गया है. मंगलवार (29 सितंबर) की सुबह जल संसाधन विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि सोमवार की रात पश्चिम चंपारण में गंडक नदी के बाएं तट पर निर्मित चंपारण तटबंध दो जगहों (ग्राम- खैरतवा, प्रखंड-बगहा, और ग्राम-फुलियाखाड़, प्रखंड-बैरिया) क्षतिग्रस्त हुआ है.
इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश में कुशीनगर में गंडक नदी के दाएं तट पर निर्मित तटबंध एक स्थल पर क्षतिग्रस्त हुआ है. बिहार में जल संसाधन विभाग एवं जिला प्रशासन पश्चिम चंपारण की टीम की ओर से आवश्यक कदम उठाए गए हैं.
जानकारी के अनुसार, गंडक नदी के दबाव के चलते तटबंध टूटने की खबर है. गंडक नदी के पानी को रोके रखने के लिए ये बांध बनाया गया था. सोमवार को ये पानी का भारी दबाव नहीं झेल पाया और टूट गया. रात करीब 10 के आसपास बांध टूटा है. इसके चलते कई इलाकों में पानी घुस गया है.
सोमवार को गंडक बराज से 5,43,500 क्यूसेक जलस्राव प्रवाहित हुआ जो अभी अपने निम्नप्रवाह क्षेत्रों पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर एवं वैशाली से होकर गुजर रहा है. इस दौरान वाल्मिकीनगर स्थित गंडक बराज पर नदी का जलश्राव 13 घंटे तक 5 लाख क्यूसेक से अधिक और 32 घंटे तक 4 लाख क्यूसेक से अधिक बना रहा.
तटबंधों पर भारी दबाव की स्थिति
26 और 27 सितंबर के बीच बिहार स्थित गंडक नदी के सीमावर्ती जिलों में भी काफी अधिक वर्षा हुई है. इसके कारण जलस्तर पूर्व से ही बढ़ा हुआ है. गंडक नदी से अत्यधिक जलस्राव के फलस्वरुप नदी पर निर्मित तटबंधों पर भारी दबाव की स्थिति बनी हुई है.
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अलग-अलग जिलों में गईं चार टीमें
जल संसाधन की ओर से बताया गया कि क्षेत्रीय अभियंता लगातार बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में लगे हुए हैं. तटबंधों पर काफी दबाव है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यालय से रात्रि में ही कार्यपालक अभियंता की अध्यक्षता में चार दलों को बगहा, बेतिया, मोतिहारी और गोपालगंज भेजा गया है.
अप्रत्याशित जलस्राव को देखते हुए पूर्व में भी अतिरिक्त अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति स्थल पर की गई है. अपस्ट्रीम में जल स्तर के घटने तथा डाउन स्ट्रीम में बढ़ने की प्रवृत्ति है. वरीय पदाधिकारियों द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है.
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