बिहार: छात्र आंदोलन के बाद बड़ा फैसला, परीक्षा सुधार समिति का गठन
सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में परीक्षा संचालन, पारदर्शिता और भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव सामने आने की उम्मीद है और छात्रों की शिकायतें दूर हो सकती हैं.

बिहार में छात्र आंदोलन समाप्त होने के बाद छात्रों की मुख्य मांगे परीक्षा में व्यापक गड़बड़ी की सुधार के लिए बड़ी पहल शुरू कर दी है. अब सरकार के समान्य प्रशासन विभाग ने सभी परीक्षाओं में गड़बड़ी की सुधार के लिए समिति का गठन करने का निर्णय लिया है. इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है और इसमें पटना हाई कोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार को समिति का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है.
सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में परीक्षा संचालन, पारदर्शिता और भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव सामने आने की उम्मीद है और छात्रों-अभ्यर्थियों की शिकायतें दूर हो सकती हैं.
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मंगलवार शाम जारी हुई अधिसूचना
मंगलवार की देर शाम सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गयी है. उसके मुताबिक राज्य सरकार के अधीन विभिन्न परीक्षा बोर्ड, आयोग, विश्वविद्यालय और अन्य भर्ती एजेंसियों की ओर से आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में व्यापक सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रावधान किया गया है. इसी प्रावधान के तहत अब पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस हरीश कुमार को इस विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. समिति परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर सरकार को सुधार के संबंध में अपनी अनुशंसाएं देगी.
23 अगस्त को समिति गठन की अनुशंसा की गयी थी
सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 15498, दिनांक 24 अगस्त 2026 के अनुरोध के आलोक में पटना हाईकोर्ट के महाप्रबंधक की ओर से पत्रांक 78985, दिनांक 28 अगस्त 2026 के माध्यम से जस्टिस हरीश कुमार को परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव भेजा गया था. प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद राज्य सरकार ने जस्टिस हरीश कुमार को विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष नियुक्त करने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी.
छात्रों की मांग पर विभिन्न परीक्षाओं में सुधार के लिए 23 अगस्त को समिति के गठन का की प्रवधान लाने की अनुशंसा की गई थी. इसी प्रावधान के तहत राज्य में परीक्षा सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की व्यवस्था की गयी है.अब समिति के अध्यक्ष के रूप में जस्टिस हरीश कुमार की नियुक्ति के बाद परीक्षा सुधार से जुड़ी आगे की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है.
छात्रों की 15 सूत्रीय मांगों को ध्यान में रखा जाएगा
विशेषज्ञ समिति गठन होने के बाद राज्य सरकार के अधीन आने वाले विभिन्न सभी परीक्षा बोर्ड, आयोग, विश्वविद्यालय और अन्य भर्ती एजेंसियों की ओर से आयोजित की जाने वाली परीक्षाएं शामिल हो सकती हैं जिसके द्वारा परीक्षा ली जाती है. उसमें क्या गड़बड़ियां हैं, जिससे छात्रों को शिकायत रहती है उस पर समिति उन कमियों को दूर करने का प्रस्ताव सरकार को भेजेगी.
बता दें कि छात्रों की 15 सूत्रीय मांग थी जिसमें कई परीक्षाओं में गड़बड़ियां को सुधार करने की मांग की गई थी. इसके अलावा बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को लेकर भी लगातार आंदोलन हो रहे हैं.समिति परीक्षा आयोजन से लेकर प्रक्रिया, पारदर्शिता और परीक्षा संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार कर सकती है. इसके आधार पर सरकार को व्यापक परीक्षा सुधार के लिए सुझाव और अनुशंसाएं दिए जाने की उम्मीद है.
परीक्षा और भर्ती सुधार को लेकर महत्वपूर्ण कदम
राज्य में समय-समय पर प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं को लेकर सामने आने वाली चुनौतियों के बीच सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विशेषज्ञ समिति की अनुशंसाओं के आधार पर परीक्षा प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं.
हालांकि, समिति की ओर से किन-किन बिंदुओं पर सुझाव दिए जाएंगे और सरकार उन अनुशंसाओं को किस तरह लागू करेगी, यह आगे की प्रक्रिया में स्पष्ट होगा.सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी अधिसूचना की प्रतिलिपि बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC), बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC), बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC), बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग और बिहार पुलिस सेवा आयोग के अलावे वित्त विभाग, महालेखाकार, सभी विभागों एवं विभागाध्यक्षों, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, पटना हाईकोर्ट के महाप्रबंधक समेत संबंधित अधिकारियों और संस्थानों को भेजी है.
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