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मखाने की खेती पर कितनी सब्सिडी देती है सरकार? जान लें फायदे की बात

मखाना विकास योजना के तहत खेती की कुल लागत पर किसानों को मिल रही 75% तक की भारी सब्सिडी. साथ ही प्रति हेक्टेयर 72,750 की सरकारी मदद और प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए मिलने वाले लाखों के अनुदान.

भारत के साथ-साथ दुनिया भर में मखाने की मांग तेजी से बढ़ रही है. भारत में होने वाले कुल मखाना उत्पादन में अकेले बिहार की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से भी ज्यादा है. मखाने की बढ़ती लोकप्रियता और किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना चलाई है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शुरू की गई मखाना विकास योजना के तहत सरकार मखाने की खेती को बढ़ावा देने के लिए तगड़ी वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है.

मखाना की खेती पर 75 फीसदी सब्सिडी

चूंकि देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी करीब 80 से 90 फीसदी है, इसलिए राज्य सरकार ने भी किसानों के लिए खास योजना शुरू की है. इस योजना के तहत मखाने की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर यूनिट लागत 97,000 रुपये तय की गई है, जिसमें से सरकार 75 फीसदी यानी 72,750 रुपये प्रति हेक्टेयर की सब्सिडी सीधे किसानों को दो किस्तों में देती है. यह लाभ राज्य के मधुबनी, सहरसा, सुपौल, अररिया, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, दरभंगा, समस्तीपुर सहित कुल 16 जिलों के किसानों को मिलता है.

बीज और उपकरण पर भी अनुदान

खेती की सब्सिडी के अलावा सरकार बीज पर भी अलग से मदद देती है. स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 जैसी उन्नत किस्मों के बीज पर अधिकतम 225 रुपये प्रति किलो तक सब्सिडी मिलती है. अगर बीज की कीमत इससे ज्यादा हो, तो बाकी रकम किसान को खुद देनी पड़ती है. इसके साथ ही मखाने की पारंपरिक खेती में इस्तेमाल होने वाले औजारों जैसे औका, कारा, खैंचि, चटाई और थापी वाली किट पर भी अनुदान मिलता है. इस किट की अनुमानित कीमत करीब 22,100 रुपये है, जिसमें से सरकार 75 फीसदी यानी करीब 16,575 रुपये की मदद देती है.

प्रोसेसिंग और मशीनों पर बड़ी सब्सिडी

सिर्फ खेती ही नहीं, बल्कि मखाना तैयार करने और उसे बाजार तक पहुंचाने से जुड़े कामों पर भी सरकार सब्सिडी देती है. मखाना भूनने और पॉप कराने वाली मशीन यानी पॉपिंग मशीन पर किसानों और युवाओं को 5 लाख रुपये तक का अनुदान मिल सकता है. वहीं जो किसान बड़े स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट या मखाना आधारित व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उन्हें बिहार सरकार की योजना के तहत 3.5 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है.

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आवेदन के लिए पात्रता

इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान का बिहार कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत होना जरूरी है. एक किसान न्यूनतम 0.25 एकड़ यानी 0.1 हेक्टेयर और अधिकतम 5 एकड़ यानी 2 हेक्टेयर तक जमीन पर इस योजना का लाभ ले सकता है. इच्छुक किसान बिहार उद्यान निदेशालय की वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in या बिहार कृषि ऐप के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.

किसानों को क्या होगा फायदा

पिछले कुछ सालों में मखाने की कीमतें भी काफी बढ़ी हैं. जहां साल 2020-22 में मखाना करीब 500 रुपये प्रति किलो बिकता था, वहीं अब इसकी औसत कीमत करीब 1,250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है. ऐसे में सब्सिडी की मदद से कम लागत में खेती शुरू करने वाले किसानों को अच्छी कमाई का मौका मिल रहा है, साथ ही जीआई टैग मिलने से बिहार के मखाने को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान मिल रही है.

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मंदसौर, मध्यप्रदेश के दीनदयाल पाटीदार ABP न्यूज में बतौर इंटर्न कार्यरत हैं. मंदसौर यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रहे दीनदयाल की जनरल नॉलेज (GK) और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है. वह खबरों को सटीक और ज्ञानवर्धक तरीके से पेश करने का हुनर रखते हैं.

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