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Bihar Election: बीजेपी, जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस का क्या रहा स्ट्राइक रेट?

बीजेपी का साल 2015 के चुनाव के बाद उम्मीदवारों की जीत की दर (स्ट्राइक रेट) बेहतर हुई है जबकि आरजेडी और कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत की दर में गिरावट आई है .

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में बेहद रोमांचक मुकाबले में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 243 सीटों में से 125 सीटों पर कब्जा कर जीत हासिल की जिसमें बीजेपी उम्मीदवारों की जीत की बेहतर दर का महत्वपूर्ण योगदान रहा . बीजेपी का साल 2015 के चुनाव के बाद उम्मीदवारों की जीत की दर (स्ट्राइक रेट) बेहतर हुई है जबकि आरजेडी और कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत की दर में गिरावट आई है .

बीजेपी उम्मीदवारों की साल 2015 में जीत की दर 33.75 प्रतिश्त रही थी और 2020 के चुनाव में यह बेहतर होकर 67. 30 प्रतिशत हो गयी . वहीं, आरजेडी का स्ट्राइक रेट 79.20 प्रतिशत से घटकर इस बार 52 प्रतिशत हो गया.

आरजेडी नीत महागठबंधन के उम्मीदवारों जीत की दर में कुल मिलाकर काफी गिरावट दर्ज की गई जिसमें कांग्रेस का स्ट्राइक रेट साल 2015 के 65.85 प्रतिशत के मुकाबले इस बार 27.14 प्रतिशत दर्ज किया गया जो 38 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है.

बीजेपी साल 2015 में 157 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 53 सीटों पर जीत हासिल की थी . उस समय बीजेपी का मुकाबला जेडीयू  और आरजेडी के साथ था . लेकिन बिहार चुनाव 2020 में पिछली बार की तुलना में 47 सीटें कम पर चुनाव लड़ने के बावजूद बीजेपी ने इस बार 74 सीटें जीतीं.

आरजेडी ने 2015 में 101 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 80 सीटें जीतने में सफल रही थी और उसका स्ट्राइक रेट 79.2 प्रतिशत था . इस बार आरजेडी ने 144 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किये और 75 सीटें जीतने में सफल रही . आरजेडी को इस बार पिछली बार की तुलना में पांच सीटों का नुकसान हुआ है और उसके उम्मीदवारों की जीत की दर घटकर 52 प्रतिशत रह गयी. आरजेडी का वोट प्रतिशत 23.1 रहा और वह बीजेपी से केवल एक सीट अधिक जीत सकी .

वहीं, नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू  2015 में 101 सीटों से लड़ी थी और 69.1 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के साथ वह 71 सीट जीतने में सफल रही थी. वहीं साल 2020 के चुनाव में जेडीयू  ने 115 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 37.4 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के साथ 43 सीट जीतने में सफल रही . जेडीयू  के लिये चुनाव में 32 प्रतिशत का नकारात्मक प्रभाव देखने को मिला हालांकि बीजेपी के पक्ष में 33 प्रतिशत के झुकाव के कारण एनडीए संतुलन बनाने में सफल रही.

आरजेडी की सहयोगी कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी और 19 सीटें जीतने में सफल रही जबकि साल 2015 में कांग्रेस ने 41 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 27 सीट जीतने में सफल रही थी . कांग्रेस का वोट प्रतिशत हालांकि 6.6 प्रतिशत से बेहतर होकर 9.4 प्रतिशत हो गया.

चुनाव में जीतने की दर के हिसाब से सबसे अधिक फायदा तीन वाम दलों को हुआ . भाकपा-माले के उम्मीदवारों के जीतने की दर 63.15 प्रतिशत रही जो पहले चार प्रतिशत से कम थी जबकि माकपा के उम्मीदवारों के जीतने की दर 50 प्रतिशत और भाकपा के उम्मीदवारों के जीतने की दर 33.33 प्रतिशत रही . असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएमआईएम के उम्मीदवारों की जीतने की दर 35 प्रतिशत रही .

वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी केवल एक सीट जीतने में सफल रही लेकिन उसका वोट प्रतिशत बेहतर होकर पिछले चुनाव के 4.83 से बढकर 5.66 प्रतिशत दर्ज किया गया .

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