अशोक चौधरी बोले- 'लोग प्रोफेसर होकर मंत्री बनते हैं और मैं…', पिता के नाम किया भावुक पोस्ट
Ashok Choudhary News: सहायक प्रोफेसर के रूप में एएन कॉलेज के राजनीति शास्त्र विभाग में अशोक चौधरी ने योगदान दिया है. अपने पिता को याद करते हुए उन्होंने कहा कि आज वो होते तो सबसे अधिक वो खुश होते.

असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के बाद जेडीयू के मंत्री अशोक चौधरी ने एएन कॉलेज को जॉइन कर लिया है. कॉलेज जॉइन करने के साथ ही मंगलवार (17 फरवरी, 2026) को उन्होंने भावुक पोस्ट किया और अपने पिता को याद किया. अशोक चौधरी ने कहा कि लोग प्रोफेसर होकर मंत्री बनते हैं और मैं मंत्री बनने के बाद प्रोफेसर बन रहा हूं.
पिता को याद करते हुए अशोक चौधरी लिखते हैं, "आपका सपना साकार हुआ, पापा. जो आप देखना चाहते थे... वो आज हो रहा है… आज आप स्वयं यहां नहीं हैं, लेकिन जो आपने मेरे लिए सोचा था वो सपना आज आंखों के सामने पूरा होता दिख रहा है. आप कभी नहीं चाहते थे कि मैं राजनीति की उठापटक में उलझूं. आपकी इच्छा थी कि मैं शिक्षा की राह चुनूं, प्रोफेसर बनूं, और एक स्थिर, सम्मानित जीवन जीऊं, इसीलिए आपने पीएचडी करवाई, मेरी आर्थिक स्थिरता के लिए, मेरे सुरक्षित भविष्य के लिए."
'…और एक पिता की तरह समझौता किया'
अशोक चौधरी ने कहा कि उस समय आपकी बात जिद लगती थी लेकिन आज समझ आता है वो जिद नहीं, दूरदर्शिता थी. शिक्षा के प्रति आपका वो प्रेम, वो समर्पण आज भी मेरे भीतर जीता है, लेकिन आपने मेरा जज्बा देखा, जनसेवा का पैशन देखा और एक पिता की तरह समझौता किया, जो हर पिता अपने बेटे के लिए करता है.
आगे लिखते हैं, "आपने प्रोफेसर एसपी शाही जी को कभी मेरे सामने, कभी मेरी पीठ पीछे बार-बार यही बताया कि आपकी दिली इच्छा है कि आपका बेटा प्रोफेसर बने. वो लम्हे जब आप उनसे यह कहते थे... शायद उस समय मुझे उसका मोल नहीं पता था, लेकिन आज जब उसी राह पर चल रहा हूं तो आपकी हर बात याद आती है. प्रोफेसर शाही जी के सामने की गई वो बातें, आपकी वो उम्मीद आज साकार हो रही है."
'आज आप होते तो सबसे ज्यादा खुश होते'
उन्होंने कहा, "लोग प्रोफेसर होकर मंत्री बनते हैं और मैं मंत्री बनने के बाद प्रोफेसर बन रहा हूं. आज बिहार विभूति डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह को नमन करते हुए प्रो. एसपी शाही जी, एएन कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. रेखा रानी जी एवं सम्मानित शिक्षकों की उपस्थिति में सहायक प्रोफेसर के रूप में एएन कॉलेज के राजनीति शास्त्र विभाग में अपना योगदान देने जा रहा हूं. यह आपकी शिक्षा, आपके आशीर्वाद और आपके संस्कारों का ही फल है. यह संभव हुआ तो सिर्फ इसलिए क्योंकि आप थे. मुझे पता है आज आप होते तो सबसे ज्यादा खुश होते. आपका स्नेह और आशीर्वाद सदैव बना रहे. कोटि-कोटि नमन."
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