साउथ अफ्रीका से हार के बाद एक्शन मोड में टीम मैनेजमेंट, अगले मैच में बदल जाएगी प्लेइंग 11
साउथ अफ्रीका से हार के बाद टीम इंडिया की प्लेइंग 11 में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है. इस टूर्नामेंट में भारत की शुरुआत लगातार कमजोर रही है. पावरप्ले में रन गति धीमी रही और विकेट भी जल्दी गिरे हैं.

आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 मुकाबले में साउथ अफ्रीका से मिली 76 रन की हार ने भारतीय टीम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए इस मैच के बाद अब टीम मैनेजमेंट पर प्लेइंग इलेवन में बदलाव का दबाव बढ़ गया है. आगे जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीमों से मुकाबला हैं, ऐसे में प्रयोग की गुंजाइश कम बची है.
ओपनिंग जोड़ी पर सबसे बड़ा सवाल
इस टूर्नामेंट में भारत की शुरुआत लगातार कमजोर रही है. पावरप्ले में रन गति धीमी रही और विकेट भी जल्दी गिरे. मौजूदा ओपनिंग जोड़ी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई है. ऐसे में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है.
टी20 में पहले ओपनर के तौर पर अच्छा प्रदर्शन कर चुके संजू सैंमसन को दोबारा मौका देने की बात हो रही है. उनके आने से बल्लेबाजी क्रम में संतुलन आ सकता है. अगर उन्हें अभिषेक शर्मा के साथ ऊपर भेजा जाता है, तो टीम को तेज शुरुआत मिल सकती है.
मिडिल ऑर्डर में भी बदलाव संभव
नंबर तीन और चार पर भी स्थिरता की कमी दिखी है. युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा को मौके तो मिले, लेकिन बड़े मैच में जिम्मेदारी निभाने में वे सफल नहीं रहे है. ऐसे में टीम मैनेजमेंट अनुभव और फॉर्म को ध्यान में रखकर बदलाव कर सकता है. जिसके चलते ईशान किशन को नंबर 3 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा जा सकता है. कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि टॉप ऑर्डर में दाएं-बाएं हाथ के संयोजन पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि ऑफ स्पिनरों की रणनीति को तोड़ा जा सके.
गेंदबाजी संयोजन पर भी नजर
साउथ अफ्रीका के खिलाफ गेंदबाजों ने भी निराश किया है. डेथ ओवरों में रन रोकने में नाकामी साफ दिखी है. ऐसे में अतिरिक्त स्पिन विकल्प के तौर पर कुलदीप यादव को शामिल करने की चर्चा है. वहीं तेज गेंदबाजी में मजबूती के लिए मोहम्मद सिराज को भी मौका मिल सकता है. वहीं ऑलराउंड विकल्प के तौर पर वाशिंगटन सुंदर की जगह अक्षर पटेल की वापसी भी टीम को संतुलन दे सकती है.
अब नहीं बची गलती की गुंजाइश
सुपर-8 में हर मैच नॉकआउट जैसा है. अगर टीम इंडिया को सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहना है, तो अब सख्त फैसले लेने होंगे. बदलाव सिर्फ खिलाड़ियों का नहीं, रणनीति का भी होना जरूरी है.
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