3 साल की उम्र में तय कर लिया था सपना, अनिल कुंबले के बेटे मायस ने हासिल किया ये मुकाम
अनिल कुंबले के बेटे मायस ने 3 साल की उम्र में इंजीनियर बनने का सपना देखा था. अब अमेरिका से इंजीनियरिंग पूरी कर उन्होंने बचपन में किया अपना वादा निभाया.

हर इंसान को अपनी जिंदगी का मकसद समझने में कई साल लग जाते हैं. कुछ लोग लंबे समय तक यह तय नहीं कर पाते कि उन्हें जिंदगी में क्या बनना है. लेकिन भारतीय क्रिकेट के दिग्गज स्पिनर अनिल कुंबले के बेटे मायस कुंबले उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने बेहद छोटी उम्र में ही अपना सपना तय कर लिया था. सिर्फ 3 साल की उम्र में मायस ने अपने माता-पिता से कह दिया था कि वह बड़े होकर इंजीनियर बनेंगे. उस समय शायद यह एक बच्चे की मासूम बात लग रही थी, लेकिन आज उन्होंने अपना सपना सच कर दिखाया है. मायस ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है.
बचपन से ही इंजीनियर बनने का सपना
मायस कुंबले बचपन से ही मशीनों और डिजाइनिंग में दिलचस्पी रखते थे. उनकी मां चेतना कुंबले ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि उनका बेटा छोटी उम्र से ही इंजीनियर बनने की बातें करता था. उन्होंने लिखा कि जब मायस सिर्फ 3 साल के थे, तब वह छोटे-छोटे औजार उठाकर कहा करते थे कि एक दिन वह अपना नया स्कूटर बनाएंगे. उम्र बढ़ने के साथ उनका सपना भी बड़ा होता गया. जब वह 7 साल के हुए तो उन्होंने कार डिजाइन करने की इच्छा जाहिर की. इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी ड्रीम कार का नाम भी सोच लिया था. वह कार का नाम “MAK” रखना चाहते थे, जिसका मतलब था मायस अनिल कुंबले.
माता-पिता को नहीं था यकीन
चेतना कुंबले ने बताया कि शुरुआत में उन्हें अपने बेटे की बातों पर पूरी तरह विश्वास नहीं था. एक छोटे बच्चे की तरह वह भी अक्सर बड़े-बड़े सपने देखा करता था लेकिन समय के साथ मायस ने अपने सपने को सिर्फ कल्पना तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने लगातार मेहनत की और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे. आज इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर उन्होंने बचपन में किया अपना वादा पूरा कर दिया.
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बेटे की सफलता पर भावुक हुईं चेतना कुंबले
अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में चेतना कुंबले ने लिखा कि माता-पिता अक्सर बच्चों के सपनों पर मुस्कुरा देते हैं, लेकिन कभी-कभी बच्चे बहुत पहले ही समझ जाते हैं कि उन्हें जिंदगी में क्या करना है. उन्होंने कहा कि अपने बेटे को इंजीनियर बनते देखना उनके जीवन के सबसे गर्व वाले पलों में से एक है. मायस ने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत लगातार की जाए, तो बचपन के सपने भी हकीकत बन सकते हैं.
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अमेरिका से पूरी की इंजीनियरिंग
मायस कुंबले ने अमेरिका के इलिनॉय राज्य के शैंपेन शहर से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है. अब उनकी यह उपलब्धि सोशल मीडिया पर भी लोगों को काफी प्रेरित कर रही है.


















