हिंदी न्यूज़फोटो गैलरीराजस्थानRanthambore Fort: जंगल सफारी के अलावा रणथंभौर किले की खूबसूरती भी मोह लेगी आपका, जानिए क्या है किले का इतिहास
Ranthambore Fort: जंगल सफारी के अलावा रणथंभौर किले की खूबसूरती भी मोह लेगी आपका, जानिए क्या है किले का इतिहास
Written By : ABP Live | Updated at : 01 Dec 2021 01:11 PM (IST)
रणथंभौर फोर्ट
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रणथंभौर फोर्ट: रणथंभौर का किला सवाई माधोपुर शहर के पास, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के अंदर बना हुआ है. भारत को आजादी मिलने तक ये पार्क जयपुर के महाराजाओं का शिकारगाह होता था. ये एक दुर्जेय किला है. जो राजस्थान के ऐतिहासिक विकास का केंद्र बिंदु रहा है. कहा जाता है कि इस किले को चौहानों ने बनवाया था. लेकिन 13वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत ने इस पर कब्जा कर लिया था. इन दिनों ये किला पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां लाखों पर्यटक किले में बने मंदिरों के दर्शन करते हैं....
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आपको बता दें कि साल 2013 में विश्व धरोहर समिति के 37 वें सत्र में राजस्थान के 5 किलों के साथ रणथंभौर किले को राजस्थान के पहाड़ी किले समूह के तहत यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया था.
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बताया जाता है कि किले का नाम पहले रणस्तंभ या रणस्तंभपुरा था. यहे 12वीं शताब्दी में चौहान वंश के पृथ्वीराज प्रथम के शासनकाल के दौरान जैन धर्म से जुड़ा था. 12वीं शताब्दी में रहने वाले सिद्धसेनसुरी ने इस स्थान को पवित्र जैन तीर्थों की सूची में शामिल किया है. वहीं मुगल काल में किले में मल्लीनाथ का एक मंदिर बनवाया गया था.
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पृथ्वीराज चौहान की हार के बाद, ये किला घोर के मुस्लिम घुरिद शासक मुहम्मद ने ले लिया. उनके बाद दिल्ली सुल्तान इल्तुतमिश ने 1226 में रणथंभौर पर कब्जा किया था. लेकिन चौहानों ने 1236 में उनकी मृत्यु के बाद इसे वापस ले लिया.
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इसके बाद भविष्य के सुल्तान बलबन के नेतृत्व में सुल्तान नसीरुद्दीन महमूद की सेनाओं ने 1248 और 1253 में किले पर हमला किया लेकिन 1259 में जैत्रसिंह चौहान ने इसपर कब्जा कर लिया. शक्ति देव ने1283 में जैत्रसिंह की जगह ली और रणथंभौर पर फिर से कब्जा कर लिया और राज्य का विस्तार किया.
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सुल्तान जलाल उद दीन फिरोज खिलजी ने 1290-91 में किले को कुछ समय के लिए घेर लिया था, लेकिन वो इसपर कब्जा करने में असफल रहे. 1299 में, हम्मीरदेव ने सुल्तान अला उद दीन खिलजी के एक विद्रोही सेनापति मुहम्मद शाह को आश्रय दिया और उसे सुल्तान को सौंपने से इनकार कर दिया. सुल्तान ने 1301 में किले को घेर लिया और जीत लिया.
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बता दें कि रणथंभौर किले के अंदर, लाल करौली पत्थर से 12 वीं और 13 वीं शताब्दी में निर्मित गणेश, शिव और रामललाजी को समर्पित तीन हिंदू मंदिर हैं. यहां भगवान सुमतिनाथ (पांचवें जैन तीर्थंकर) और भगवान संभवनाथ का एक जैन मंदिर भी बना हुआ है.