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ऐतिहासिक मुगल गार्डन में गिरने वाला अच्छाबल झरना सूखा, आसपास के इलाकों में पैदा हुआ जल संकट
Jammu Kashmir News: कश्मीर घाटी में जलवायु परिवर्तन का असर दिखने लगा है. इस साल सर्दियों में कम बारिश और बर्फबारी का प्रभाव झरनों पर पड़ा है. झरना सूखने से पानी की कमी हो गई है.
ऐतिहासिक मुगल गार्डन में झरना लगभग सूख गया है. विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन का असर बता रहे हैं.
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कश्मीर घाटी में ग्लोबल वार्मिंग का असर दिखने लगा है. ऐतिहासिक मुगल गार्डन में अच्छाबल झरना लगभग सूख गया है. इतिहास में पहली बार झरने का प्रवाह थम गया.
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सामाजिक कार्यकर्ता शब्बीर अहमद ने कहा, "हमने अच्छाबल में मुगल गार्डन के सूखने के बाद ऐसा बदलाव कभी नहीं देखा. पहली बार निराशाजनक दृश्य देखने को पड़ रहा है." झरना सूखने से पानी की कमी हो गई है.
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इस साल सर्दियों में कम बारिश और बर्फबारी का प्रभाव झरनों पर पड़ा है. प्राकृतिक झरने दूर दराज के गांव में महत्वपूर्ण जल स्रोत हैं. अब अच्छाबल मुगल गार्डन में गिरने वाला झरना अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है.
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अच्छाबल झरना 12 से अधिक गांवों में पीने के पानी का स्रोत भी है. 17वीं शताब्दी में मुगल महारानी नूरजहां का बनवाया गार्डन पर्यटकों को आकर्षित करता है. झरने के चारों ओर इमारतों की श्रृंखला है. भव्य गार्डन आज पानी की कमी से जूझ रहा है.
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फव्वारे और धाराएं बंजर हो गई हैं. शबीर ने कहा, "जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश और बर्फबारी में कमी बिगड़ती स्थिति का मुख्य कारण है." एक अन्य शख्स ने बताया कि पानी की अनुपलब्धता का प्रभाव बागवानी और कृषि दोनों पर पड़ेगा.
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आस-पास के इलाकों में पानी की कमी शुरू हो गई है. प्रभावित इलाकों जल आपूर्ति के लिए अब टैंकरों का आसरा है. विशेषज्ञ संकट के लिए बढ़ते तापमान, कम बारिश और घटते भूजल स्तर को जिम्मेदार मानते हैं.
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भूगोलवेत्ता डॉ. मासून ए बेग ने कहा, "ग्लोबल वार्मिंग ने कश्मीर में बारिश के पैटर्न को बदल दिया है. सदियों से अचबल गार्डन को बनाए रखने वाले प्राकृतिक झरने प्रभावित हुए हैं." जल शक्ति के एईई गौहर अहमद ने कहा कि अचबल झरना एक दर्जन से अधिक गांवों की जरूरतों को पूरा करता था.
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स्रोत पर 15 से अधिक जलापूर्ति योजनाएं निर्भर हैं. झरने के सूखने का असर लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र पर पड़ा है. झरना पीने के पानी का प्राथमिक स्रोत था. प्रभावित गांवों में पानी की आपूर्ति के लिए टैंकर भेजा जा रहा है. इस साल कश्मीर घाटी में अप्रत्याशित मौसम देखने को मिला है.
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दिसंबर में 71 फीसद से अधिक कम बारिश रिकॉर्ड हुई. जनवरी के महीने में 83 फीसद से अधिक कम बारिश और बर्फबारी हुई है. फरवरी के पहले दो सप्ताह उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में 40 प्रतिशत से कम वर्षा हुई है. परिणामस्वरूप घाटी में चिंताजनक स्थिति पैदा हो गई है. विशेषज्ञों ने आने वाले बुवाई के मौसम में पानी की कमी की भविष्यवाणी की है.
Published at : 16 Feb 2025 11:28 PM (IST)
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