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न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी तो वर्जीनिया में गजाला हाशमी... भारतीय मूल के वो दावेदार, जिनके नाम पर मचा बवाल

हाशमी की प्रचार वेबसाइट के मुताबिक, प्रमुख क्षेत्रों में सार्वजनिक शिक्षा, मताधिकार, बंदूक हिंसा की रोकथाम और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच शामिल है. वो लोकतंत्र के संरक्षण को महत्व देती हैं.

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न्यूयॉर्क शहर में मेयर पद का चुनाव लड़ रहे भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जोहरान ममदानी को लेकर अमेरिका में काफी बवाल मचा है. वहीं दूसरी ओर भारतीय मूल की डेमोक्रेट गजाला हाशमी भी वहां सुर्खियां बटोर रही हैं. गजाला वर्जीनिया में लेफ्टिनेंट गवर्नर पद के लिए अपनी दावेदारी पुख्ता कर रही हैं. 

अमेरिकी सर्वे के मुताबिक, गजाला हाशमी ने भारतीय और पाकिस्तानी मूल समेत दक्षिण एशियाई लोगों को भी अपने पक्ष में कर लिया है. ताजा सर्वे के मुताबिक वो अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी जॉन रीड से आगे चल रही हैं. चार साल की उम्र में अपनी मां और बड़े भाई के साथ अमेरिका पहुंचीं हाशमी का वर्जीनिया की राजनीति में लंबे समय से दबदबा है. 

कैसे हासिल कर रही हैं सबका समर्थन?

गजाला हाशमी का अभियान शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अप्रवासी प्रतिनिधित्व पर जोर देता है, जो भारतीय और पाकिस्तानी-अमेरिकी दोनों समुदायों के साथ जुड़ता है. अमेरिका में उनके समावेशी दृष्टिकोण और दक्षिण एशियाई समुदायों के साथ गहरे संबंधों के कारण उन्हें सभी का समर्थन मिलता दिख रहा है.

हाशमी की प्रचार वेबसाइट के मुताबिक, उनके अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सार्वजनिक शिक्षा, मताधिकार, बंदूक हिंसा की रोकथाम, जलवायु परिवर्तन, आवास और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच शामिल है. वो लोकतंत्र के संरक्षण को भी महत्व देती हैं. उनका प्रचार अभियान न्यूयॉर्क शहर में ममदानी द्वारा अपने प्रचार अभियान में किए गए वादों को प्रतिबिंबित करता है.

कौन हैं गजाला हाशमी ?

गजाला हाशमी का जन्म 1964 में हैदराबाद में हुआ. उनका पैतृक मूल पाकिस्तान के कराची में है. हाशमी 4 साल की उम्र में अपने परिवार के साथ भारत से अमेरिका आ गईं. हाशमी का पालन-पोषण जॉर्जिया के एक छोटे से कस्बे में हुआ. वहां उन्होंने सीखा कि कैसे खुला संवाद सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक विभाजनों को पाट सकता है और सभी वर्गों के लोगों को एकजुट कर सकता है.

हाशमी ने जॉर्जिया सदर्न यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में बीए और एमोरी यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है. वो अपने पति अजहर के साथ 1991 में रिचमंड में आ गई, जहां वे अभी रहती हैं. फॉक्स न्यूज़ के अनुसार, वर्जीनिया स्टेट सीनेट की सदस्य बनने से पहले हाशमी ने रिचमंड विश्वविद्यालय और रेनॉल्ड्स कम्युनिटी कॉलेज, दोनों में लगभग तीन दशक तक प्रोफेसर के रूप में काम किया है. वो वर्तमान में वर्जीनिया में स्टेट सीनेटर हैं.

पहले ही प्रयास में डेमोक्रेट हाशमी ने वर्जीनिया के 10वें सीनेट जिले के लिए मौजूदा रिपब्लिकन राज्य सीनेटर ग्लेन स्टर्टवेंट को हराकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. पाकिस्तानी और भारतीय समुदाय उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं कि कब वो वर्जीनिया की पहली मुस्लिम और एशियाई-अमेरिकी लेफ्टिनेंट गवर्नर बनेंगी. 

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