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US Presidential Election: सिर्फ पॉपुलर वोट से जीत तय नहीं, इलेक्टोरल कॉलेज से चुना जाता है अमेरिकी राष्ट्रपति, जानिए कैसे

अमेरिकी संविधान में इसे 1787 में शामिल किया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मतदाता सीधे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को वोट नहीं देते हैं. हर राज्य के निवासी इलेक्टर्स चुनते हैं.

अमेरिका का अगला राषट्रपति कौन होगा इसका फैसला जल्द हो जाएगा. अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग कर रहा है. इस बार सीधी टक्कर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बिडेन और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदार व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच है. अब देखना होगा कि ट्रंप एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति की कुर्सी संभालते हैं या इसबर जनता जो बाइडेन को मौका देती है.

आपको बता दें कि अमेरिका का चुनाव काफी पेचिदा है. यहां सबसे ज्यादा वोट से नहीं, इलेक्टोरल कॉलेज से चुना जाता है अमेरिकी राष्ट्रपति. पिछले चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को ज्यादा वोट मिले थे लेकिन इलेक्ट्रोरल कॉलेज में उन्हें ट्रंप से हार का सामना करना पड़ा. ऐसे में आपके मन में सवाल होगा कि आखिर ये इलेक्ट्रोरल कॉलेज क्या है, तो आइए जानते हैं क्या है इलेक्ट्रोरल कॉलेज.

क्या है इलेक्ट्रोरल कॉलेज

अमेरिकी संविधान में इसे 1787 में शामिल किया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मतदाता सीधे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को वोट नहीं देते हैं. हर राज्य के निवासी इलेक्टर्स चुनते हैं. हर राज्य में एक निश्चित संख्या में इलेक्टोरल कॉलेज वोट होते हैं. यह राज्य की जनसंख्या पर निर्भर करता है. हरेक राज्य से उतने ही प्रतिनिधि होते हैं जितने कि उस राज्य से संसद की दोनों सदनों में सांसद. सबसे कम आबादी वाले वायोमिंग से 3 इलेक्टर हैं जबकि सबसे ज्यादा आबादी वाले कैलिफोर्निया से 55 इलेक्टर हैं.

कुल 538 वोट होते हैं जिनमें से 270 या फिर उससे ज्यादा वोट जीतने के लिए हासिल करने होते हैं. जिस उम्मीदवार को 270 इलेक्टर्स का समर्थन मिल जाता है वह अमेरिका अगला राष्ट्रपति बनता है. भारत की तरह अमेरिकी संसद में भी दो सदन होते हैं. पहला हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव जिसे प्रतिनिधि सभा भी कहा जाता है. इसके सदस्यों की संख्या 435 है. दूसरे सदन सीनेट में 100 सदस्य होते हैं. इसके अतिरिक्त अमेरिका के 51वें राज्य कोलंबिया से तीन सदस्य आते हैं. इस तरह संसद में कुल 538 सदस्य होते हैं. इन्हीं के वोट को इलेक्ट्रोरल वोट कहा जाता है.

सिर्फ पॉपुलर वोट से जीत नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2016 में डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंकटन को करीब 29 लाख ज्यादा लोगों ने वोट किया लेकिन वह चुनाव हार गईं. इसकी वजह यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में इलेक्टोरल वोट ज्यादा पड़ा. है. ऐसा 2000 में जॉर्ज डब्ल्यू बुश के साथ हुआ था. वह भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अलगोर के मुकाबले पॉपुलर वोट में पिछड़ गए थे लेकिन इलेक्टोरल वोट उन्हें 266 के मुकाबले 271 मिले थे. 19वीं शताब्दी में जॉन क्विंसी एडम्स, रदरफोर्ड बी हायेस और बेंजामिन हैरिसन भी पॉपुलर वोट में पिछड़ने के बाद इलेक्टोरल वोट के जरिए जीते थे.

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