ऑपरेशन सिंदूर: भारत ने कैसे ट्रंप, US मीडिया और ट्रेड टॉक को एकसाथ किया मैनेज, पढ़ें रिपोर्ट
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने कई चैनलों के जरिए अमेरिका से संपर्क साधे रखा. राजनयिक वार्ता से लेकर विदेश मंत्री स्तर तक बातचीत का सिलसिला जारी रहा.

पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की तो उस दौरान नई दिल्ली ने वॉशिंगटन के साथ कई तरीकों से राजनयिक संपर्क बनाए रखा. इस दौरान सुरक्षा, व्यापार, राजनीतिक और मीडिया चैनलों के माध्यम से ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत की गई.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल के अंत से अक्टूबर 2025 तक भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार फोन कॉल, बैठकों और ब्रीफिंग की अपील की. 24 अप्रैल 2025 को भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर, वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के कार्यालय के साथ बातचीत की अपील की. इनके जरिए व्यापार संबंधी चर्चाओं को जल्द से जल्द आगे बढ़ाने की कोशिशें की गईं.
ऑपरेशन सिंदूर के बीच बातचीत जारी रही
ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के बावजूद मई की शुरुआत तक व्यापार संबंधी बातचीत जारी रही. 7 मई को जिस दिन ऑपरेशन शुरू हुआ, वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने फॉक्स न्यूज़ के ब्रेट बेयर को एक इंटरव्यू के लिए फोन किया, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर का साफतौर पर जिक्र किया गया था. राष्ट्रपति ट्रंप और उनके वरिष्ठ सलाहकार फॉक्स न्यूज़ पर कड़ी नज़र रखते हैं और इस चैनल से संपर्क को व्हाइट हाउस के भीतर चीजों को प्रभावित करने के एक तरीके के रूप में देखा जाता है.
मई के अंत तक भारत ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा प्रतिष्ठान को जानकारी देना शुरू कर दिया. 27 मई को भारतीय अधिकारियों ने विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ बैठक के लिए अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ और रक्षा उप सचिव से अपील की. 31 मई को वाशिंगटन डीसी में भारतीय अधिकारियों ने उपराष्ट्रपति वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मिलने की अपील की. इस तरह के प्रयास अक्सर कई एजेंसियों के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए किए जाते हैं.
जयशंकर की वेंस और रुबियो से मुलाकात
भारत ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुलाकात के लिए 1 जून को अपील की. इसके अलावा भारत ने कैपिटल हिल से भी संपर्क बनाए रखा. वॉशिंगटन में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा के बीच बिजनेस टॉक जारी रहीं. रिकॉर्ड बताते हैं कि मई, जून और जुलाई 2025 के दौरान भारतीय अधिकारियों और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ग्रीर तथा वाणिज्य सचिव लटनिक के बीच बार-बार बातचीत हुई. अगस्त तक व्यापार संबंधी चर्चाएं और तेज हो गईं.
भारत ने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से बातचीत की अपील की, जिससे वित्त विभाग भी उन वार्ताओं में शामिल हो गया जो पहले केवल व्यापार और वाणिज्य विभाग तक केंद्रित थीं. सितंबर और अक्टूबर 2025 में भारतीय अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी कई लोगों से मुलाकात की, जिनमें व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन असिस्टेंट और वरिष्ठ राजनीतिक सलाहकार शामिल थे.
वॉशिंगटन की बहस से गायब हो गया ऑपरेशन सिंदूर
इन मामलों पर टिप्पणी के लिए वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. महीनों की बातचीत के बावजूद भारत को व्हाइट हाउस से लगातार टैरिफ संबंधी झटके और सार्वजनिक निंदा ही मिली. ये राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल के बिल्कुल विपरीत है, जब इस तरह के मतभेद शायद ही कभी सार्वजनिक रूप से सामने आते थे. अक्टूबर 2025 के अंत तक बातचीत जारी रही, जबकि ऑपरेशन सिंदूर वॉशिंगटन की सार्वजनिक बहस से काफी हद तक गायब हो गया.
ये भी पढ़ें
Source: IOCL






















