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इजरायल में चार साल में 5वीं बार चुनाव; एग्जिट पोल में नेतन्याहू चल रहे आगे, फिलीस्तीनियों की उम्मीदों पर एक बार फिर छायी उदासी

इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जीत की राह पर हैं. नेतन्याहू की वापसी के संकेत से फिलीस्तीनियों की उम्मीदों पर एक बार फिर उदासी छा गई है. जानिए क्या है राजनीतिक और सामाजिक स्थिति.

Israel Elections: इजरायल में लोगों ने चार साल से कम समय में पांचवीं बार एक नई संसद का चुनाव करने के लिए अपना वोट डाल दिया है. ये बात जगजाहिर है कि अप्रैल 2019 से स्थिर सरकार बनाने में राजनेताओं की अक्षमता के कारण देश को एक लंबे राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ा है. एग्जिट पोल के अनुसार, मंगलवार को हुए चुनाव में इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जीत की राह पर हैं. उन्होंने यरूशलेम में अपने समर्थकों से कहा, "हम एक बड़ी जीत के करीब हैं." 

एग्जिट पोल के ट्रेंड तो यही दिखा रहे हैं कि बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. हालांकि, यहां ये समझना भी बेहद जरूरी हो जाता है कि इस बार फिलिस्तीनियों ने किस सोच के साथ मतदान किया है. अल जजीरा पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, हाइफा स्थित राजनीतिक विश्लेषक अमीर मखौल का कहना है कि इजरायल में फिलिस्तीनियों के पास "राजनीतिक दलों और केसेट में आशा की कमी है." उन्होंने कहा कि फिलीस्तीनियों में निराशा और हार की भावना है और उन्हें चुनाव में कोई दिलचस्पी नहीं है.

इजरायल में रहने वाले फिलिस्तीनी आबादी का 20 प्रतिशत हिस्सा है और उनके पास इजरायल के पासपोर्ट हैं. 1947 से 1949 तक "यहूदी राज्य" बनाने के लिए फिलिस्तीन की हिंसक जातीय सफाई के दौरान वे एक अनैच्छिक अल्पसंख्यक बन गए. उसी समय से उनके खिलाफ दमनकारी इजरायली नीतियों के कारण, इजरायल में फिलिस्तीनी क्षेत्रों में भीड़भाड़, उच्च अपराध दर, घरेलू विध्वंस के साथ-साथ इजरायल के अधिकारियों द्वारा हिंसा और भारी निगरानी का सामना करना पड़ता है.

फिलीस्तीनियों ने क्या कहा?

निवासियों का कहना है कि ये लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे इजरायल की राजनीति में फिलिस्तीनी दलों की भागीदारी के बावजूद बदतर हो गए हैं. जट्ट गांव के 30 वर्षीय खलील घर्रा हाइफा में रहते हैं, जबकि वह तजामू को वोट देते थे. उन्होंने इस साल मतदान नहीं किया, क्योंकि उनका मानना ​​​​है कि राजनीतिक दल "नेसेट के अंदर कुछ भी करने में सक्षम नहीं हैं" और "राज्य को अंदर से अधिक लोकतांत्रिक बनाने की कोशिश करने से कोई फायदा नहीं हुआ है."

हाइफा के बाहरी इलाके तामरा की रहने वाली 32 साल के निजमेह हिजाज़ी ने भी घर्रा के विचारों का समर्थन किया. उन्होंने अल जजीरा से कहा, "कुछ लोग कह रहे हैं: बेन-गवीर और सुदूर दक्षिण के स्मोट्रिच के साथ हमें डराना बंद करो. हम उससे ज्यादा जागरूक हैं. हमसे कुछ तर्कसंगत बात करें, इस बारे में कि आपने क्या हासिल किया है, आपने क्या प्रभाव डाला है."

उन्होंने कहा, "फिलिस्तीनी समाज में जो कुछ भी हो रहा है, उसमें से आप बेन-गवीर से डरते हैं, लेकिन आप हमारे समुदायों में होने वाली हिंसा से अपराध से क्यों नहीं डरते? उन्होंने हमारे सभी शहरों में कैमरे लगाए और उन्होंने उन्हें इस बहाने पुलिस व्यवस्था से बांध दिया कि निगरानी अपराध को रोकेगी और कम करेगी."

इजरायल में फिलीस्तीनियों की स्थिति

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले एक दशक के दौरान, अपराध और हत्याओं ने इजरायल के अंदर फिलीस्तीनी समुदाय को तेजी से त्रस्त कर दिया है, जिसमें पिछले साल 100 से अधिक फिलीस्तीनी मारे गए थे. हाइफा स्थित अदला कानूनी अधिकार समूह के अनुसार, 1948 से इजरायल ने कम से कम 900 नए यहूदी शहरों का निर्माण किया है, लेकिन एक भी फिलिस्तीनी नहीं बनाया है.

इजरायल में फिलिस्तीनियों को इजरायल की नीतियों के कारण शहरी नियोजन, विकास और विस्तार पर गंभीर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है. इजरायल में अधिकांश फिलिस्तीनी अरब शहरों और गांवों में रहते हैं, जबकि अल्पसंख्यक तथाकथित "मिश्रित शहरों" जैसे हाइफ़ा और जाफ़ा में रहते हैं. इन शहरों को 1948 में जातीय रूप से साफ कर दिया गया था और अब ये एक इजरायली यहूदी बहुमत के घर हैं.

इजरायल चुनाव में नेतन्याहू आगे

मंगलवार को इजरायल में मतदान संपन्न हो चुका है और अभी के ट्रेंड की मानें तो नेतन्याहू एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं. इस चुनाव को व्यापक रूप से नेतन्याहू की वापसी के पक्ष या विपक्ष में वोट के रूप में देखा गया. वहीं अब आने वाले कुछ घंटों में तस्वीर बिल्कुल साफ हो जाएगी और नेतन्याहू की किस्मत का फैसला भी हो जाएगा. हालांकि, उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी, वर्तमान प्रधानमंत्री यायर लापिड ने कहा, "अभी कुछ भी तय नहीं किया गया है."

73 वर्षीय नेतन्याहू, इजरायल के सबसे विवादास्पद राजनीतिक शख्सियतों में से एक हैं, जिन्हें केंद्र में कई लोग घृणा करते हैं. हालांकि, लिकुड के जमीनी समर्थक उन्हें काफी प्यार भी करते हैं. नेतन्याहू वर्तमान में कथित रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वास के उल्लंघन के आरोपों का सामना कर रहे हैं. लिकुड के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में उनके संभावित सहयोगियों ने कहा है कि वे कानून में सुधार करेंगे, एक ऐसा कदम जो उनके मुकदमे को रोक देगा.

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