अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारत को क्या है समस्या? जानें वो रेड लाइन, जिस पर नहीं बन पा रही बात
India USA Trade Deal: भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताएं डेयरी और कृषि पर मतभेदों के कारण अटक गई हैं. भारत ने डेयरी पर समझौते से साफ इनकार किया है, जबकि अमेरिका इस क्षेत्र में रियायत चाहता है.

India USA Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. जहां एक ओर अमेरिका चाहता है कि भारत डेयरी और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क में रियायत दे. वहीं, भारत ने ऐसा करने से इनकार कर दिया है. यह सब कुछ ऐसे समय पर हो रहा है जब दोनों देश एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं. यह समझौता आगे चलकर एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) का आधार बन सकता है. यह वार्ता जून के अंत से वॉशिंगटन में जारी है और अब इसका छठा दिन है, लेकिन अभी तक किसी ठोस सहमति की घोषणा नहीं हुई है.
भारत ने डेयरी सेक्टर को बताया 'रेड लाइन'
भारत सरकार के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, अमेरिका की ओर से डेयरी उत्पादों पर टैरिफ में छूट देने की मांग को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है. इस क्षेत्र से भारत में 8 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है, जिनमें अधिकतर छोटे किसान हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने दो टूक कहा, “डेयरी पर कोई रियायत देने का सवाल ही नहीं है. यही हमारी रेड लाइन है.” सरकार का मानना है कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में छूट देना भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी हो सकता है.
राजेश अग्रवाल की यात्रा बढ़ी, जयशंकर भी जुटे प्रयास में
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे वाणिज्य मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश अग्रवाल ने गतिरोध को दूर करने के उद्देश्य से वॉशिंगटन में अपनी यात्रा एक दिन और बढ़ा दी है. यह वार्ता 26 जून से शुरू हुई थी और अब मंगलवार को छठे दिन में प्रवेश कर चुकी है. बुधवार को भी वार्ता जारी रहने की संभावना है.
इसी बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी अमेरिका में हैं और अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो से एक कूटनीतिक बैठक के दौरान मुलाकात करने वाले हैं. यह मुलाकात भी व्यापार वार्ता में गतिरोध को तोड़ने की दिशा में अहम मानी जा रही है.
भारत की प्राथमिकताएं- श्रम-प्रधान क्षेत्रों में टैरिफ रियायत
भारत की ओर से मांग की जा रही है कि अमेरिका श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे कि वस्त्र, परिधान, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, प्लास्टिक, रसायन, झींगे, तिलहन, अंगूर और केले पर आयात शुल्क में छूट दे. सरकारी सूत्रों के अनुसार, “इन उत्पादों पर रियायत से अमेरिका के घरेलू हितों को कोई खतरा नहीं है, इसलिए इसके विरोध की संभावना भी बेहद कम है.” भारत मानता है कि इन क्षेत्रों में छूट से उसके निर्यातकों को राहत मिलेगी और घरेलू रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा. इस अंतरिम समझौते का उद्देश्य भारतीय निर्यात पर लगे भारी शुल्क (26% तक) को खत्म करना है. अमेरिका इस समझौते को 9 जुलाई की डेडलाइन से पहले पूरा करना चाहता है.
टैरिफ डेडलाइन और अमेरिकी दबाव
अगर वार्ता विफल होती है तो अमेरिका फिर से 26% तक का टैरिफ लागू कर सकता है. PTI के अनुसार, एक अधिकारी ने कहा, “अगर व्यापार वार्ता विफल रही, तो 26 प्रतिशत शुल्क फिर से प्रभाव में आ जाएगा.” अमेरिका ने 2 अप्रैल को भारतीय उत्पादों पर जो पारस्परिक शुल्क लगाए थे, उन्हें 90 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया था. लेकिन 10% का मूल टैरिफ अब भी लागू है. भारत चाहता है कि इन अतिरिक्त शुल्कों से स्थायी छूट मिले ताकि निर्यात में बाधा न आए.
अमेरिका की मांगें और भारत की चुनौती
अमेरिका भारत से डेयरी और कृषि उत्पादों पर रियायत की मांग कर रहा है. इनमें औद्योगिक सामान, इलेक्ट्रिक वाहन, वाइन, पेट्रोकेमिकल उत्पाद, सेब, ड्राई फ्रूट्स (ट्री नट्स), और जीन-संशोधित फसलें (GM Crops) शामिल हैं. लेकिन भारत के लिए यह सब स्वीकार करना मुश्किल है, क्योंकि देश के अधिकांश किसान पारंपरिक और सीमांत खेती पर निर्भर हैं और किसी भी तरह की बाहरी प्रतिस्पर्धा उन्हें सीधे प्रभावित करेगी.
2030 तक 500 अरब डॉलर का लक्ष्य
भारत और अमेरिका इस साल सितंबर-अक्टूबर तक अपने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण को अंतिम रूप देना चाहते हैं. इसका लक्ष्य है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए. फिलहाल यह व्यापार 191 अरब डॉलर के आसपास है.
हालांकि यदि कृषि और डेयरी जैसे विवादित विषयों पर समझौता नहीं हुआ, तो यह लक्ष्य मुश्किल हो सकता है. भारत का कहना है कि वह अपने किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कीमत पर कोई विदेशी दबाव स्वीकार नहीं करेगा.
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Source: IOCL






















