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Turkey Vs Greece: फिर दस्‍तक दे रहा ट्रॉय और स्‍पार्टा की जंग का वो इतिहास, जिसमें लड़े यूरोप के कर्ण-अर्जुन, नाम हैं- हेक्‍टर और एखिलिस!

Turkey Greece Relations: ट्रोजन युद्ध में अगामेमनन, जिस एजियन सागर पर कब्जा करने के लिए अपने भाई मेनीलेयस का साथ देता है, समंदर के उसी हिस्से को लेकर आज भी तुर्की और ग्रीस बीच जंग की संभावना है.

Turkey Greece Tension: तुर्की (Turkey) और ग्रीस (Greece) के तनावपूर्ण संबंध एक बार फिर ट्रॉय (Troy) और स्पार्टा (Sparta) की उस जंग का इतिहास (Trojan War History) याद दिला रहे हैं, जिसमें यूरोप (Europe) के कर्ण-अर्जुन (Karna-Arjuna) कहे जाने वाले योद्धा (Warriors) लड़े थे. उन योद्धाओं के नाम थे- हेक्टर (Hector) और एखिलिस (Achilles).

दिलचस्प बात यह है कि एक समय तक ट्रॉय केवल ग्रीक पौराणिक कथाओं (Greek Mythology) का हिस्सा था. तुर्की के एनाटोलिया (Anatolia) में जब 19वीं सदी में खुदाई में प्राचीन इमारतों और युद्ध के संकेतों के अवशेष मिले तब ट्रॉय शहर की हकीकत स्वीकार की गई. स्पार्टा को हमेशा प्राचीन यूनान (Ancient Greece) का वास्तविक शहर माना जाता रहा है. भूगोल के अनुसार, स्पार्टा ग्रीस के दक्षिण-पूर्वी पेलोपोनीज (South-East Peloponnese) में मौजूद रहा होगा. यूनेस्को (UNESCO) ने तुर्की के एनाटोलिया में मिले ट्रॉय के अवशेषों को विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Sites) के रूप में नामित किया है.

क्या है ट्रॉय-स्पार्टा की जंग?

ट्रॉय-स्पार्टा की जंग को ट्रोजन युद्ध भी कहा जाता है. ट्रोजन युद्ध का नाम समंदर के ट्रोजन बीच और ट्रोजन हार्स के कारण पड़ा. ट्रोजन हार्स यानी काठ का वह विशाल घोड़ा जो ट्रॉय की जंग में निर्णायक साबित हुआ. माना जाता है कि ट्रोजन का युद्ध 1194 से 1184 ईसा पूर्व में हुआ था. लगभग 10 वर्षों के युद्ध और घेराबंदी से यूनानियों को जब कुछ खास सफलता हाथ नहीं लगी तो उन्होंने एक छद्म तरकीब अपनाई. लकड़ी का एक विशाल घोड़ा बनाया. उसमें 30 कुशल यूनानी सिपाहियों को छिपा दिया और घोड़े को छोड़कर युद्ध क्षेत्र से निकल जाने का नाटक किया.

ट्रॉय के लोग घोड़े को जीत का ईनाम मानकर शहर में ले गए. रात में घोड़े में छिपे यूनानी सैनिक बाहर निकल आए और अपनी सेना के लिए द्वार खोल दिए. यूनानी सेना का यह छद्म तरीका काम कर गया था. सेना ने ट्रॉय में प्रवेश कर उसे तबाह कर दिया और युद्ध जीत लिया.

एक रानी के अपहरण ने रखी थी युद्ध की नींव

ट्रॉय और स्पार्टा की जंग को लेकर 2004 में ट्रॉय नाम से एक हॉलिवुड फिल्म भी आई थी जो काफी पसंद की गई. युद्ध की नींव एक रानी के अपहरण ने तैयार की थी. दरअसल, ट्रॉय का प्रिंस हेक्टर अपने छोटे भाई पेरिस के साथ स्पार्टा के राजा के मेनीलेयस के साथ एक शांति समझौते पर बात करने के लिए जाता है. पेरिस का मेनीलेयस की पत्नी हेलन के साथ प्रेम संबंध चल रहा होता है, वह लौटते समय में हेलन को छिपाकर अपने साथ जहाज में ले आता है.

इसके बाद मेनीलेयस अपने बड़े भाई अगामेमनन से मिलकर ट्रॉय को हराने की रणनीति बनाता है. अगामेमनन एजियन सागर पर अधिकार प्राप्त करना चाहता था, इसलिए अपने छोटे भाई का साथ देने के लिए तैयार हो जाता है. इसके बाद एखिलिस को मनाने के लिए इथाका के राजा ओडीसियस को भेजा जाता है. एखिलिस लड़ने के लिए मना करता है, लेकिन उसकी मां उसे यह कहते हुए मना लेती है कि वह जंग में भले ही मर जाए, लेकिन हमेशा के लिए उसका नाम याद रखा जाएगा. ट्रॉय के राजा प्रायम पहले तो अपने छोटे बेटे की करतूत से दुखी होते हैं फिर हेलन का स्वागत करते हैं और युद्ध की तैयारी का आदेश देते हैं. 

ट्रॉय पर ग्रीक सेना की चढ़ाई

ग्रीक सेना पहले ही प्रयास में ट्रोजन बीच पर कब्जा जमा लेती है. इसके बाद अपोलो मंदिर लूटा जाता है. हेक्टर की बहन ब्राइसेइयस मंदिर की पुजारिन होती है, एखिलिस उसे बंदी बनाकर ले जाता है. अगामेमनन ब्राइसेइयस को अपने पास रख लेता है तो एखिलिस नाराज हो जाता है और युद्ध लड़ने से मना कर देता है. 

यूरोप के कर्ण-अर्जुन यानी हेक्टर और एखिलिस की लड़ाई

इस बीच युद्ध में एखिलिस का चचेरा भाई पैट्रोक्ल्स भी शामिल था, जो उसका शिष्य भी था. हेक्टर एक द्वंद युद्ध में जिस योद्धा को एखिलिस समझकर मार देता है, वह दरअसल एखिलिस नहीं, बल्कि उसका का चचेरा भाई पैट्रोक्ल्स था. भाई के मारे जाने पर एखिलिस इंतकाम लेने के लिए तड़प उठता है. इसके बाद यूरोप के कर्ण-अर्जुन यानी हेक्टर और एखिलिस के बीच लंबा द्वंद युद्ध चलता है. आखिर में एखिलिस हेक्टर को मार गिराता है. एखिलिस हेक्टर के शव को घसीटते हुए समुद्र तट पर ले जाता है.

राजा प्रायम रात में चोरी छिपे एखिलिस के शिविर में जाकर अपने बेटे का शव उसके अंतिम संस्कार के लिए मांगता है. एखिलिस लाश को लौटा देता है, साथ ही ब्राइसेइयस को भी राजा के साथ भेज देता है. एखिलिस राजा से युद्ध विराम का वादा करता है, लेकिन अगामेमनन तब तक ट्रोजन हॉर्स वाली तरकीब सोच चुका होता है.

अगले जून में तुर्की-ग्रीस के बीच सैन्य भिड़ंत संभव!

अब एक बार फिर ट्रॉय और स्पार्टा की यादें ताजा हो सकती हैं. अलजजीरा के मुताबिक, ग्रीक अधिकारियों का कहना है कि तुर्की के साथ उनके देश के संबंध बहुत ही तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं और अगले जून में एजियन सागर या पूर्वी भूमध्य सागर में एक सैन्य भिड़ंत संभव है, जो एक व्यापक जंग को गति दे सकती है.

ग्रीक जानकारों का मानना है तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन एक राष्ट्रीय सुरक्षा संकट पैदा करने की कोशिश इसलिए भी करेंगे, क्योंकि इससे उनकी गिर रही लोकप्रियता में उछाल आएगा. अगस्त में अर्दोआन ने कहा था कि वह ग्रीक टापुओं पर सैनिकों को उतारने का आदेश दे सकते हैं. उन्होंने कहा था, ''हम अचानक किसी रात आ सकते हैं, अगर तुम ग्रीक बहुत आगे बढ़ते हो तो इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.'' 

तुर्की-ग्रीस के अधिकारियों का आकलन क्या कहता है?

रिटायर्ड ग्रीक एडमिरल अलेक्जेंड्रोस डायकोपोलोस ने अल जजीरा को बताया कि 2019, 2020, 2021 तक युद्ध की कोई संभावना नहीं थी, लेकिन अब ऐसा नहीं कह सकते हैं. ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे डायकोपोलोस ने कहा कि तुर्की की बयानबाजी हमले की ओर बढ़ रही है. 

एथेंस में तुर्की के शीर्ष राजनयिक दोनों देशों के बीच तनाव को लेकर तो सहमत हैं, लेकिन उनका कहना है कि स्थिति से निपटा जा सकता है. तुर्की के राजदूत बुराक ओजुगेरगिन ने अल जजीरा को बताया कि उन्होंने अपने ग्रीक सहयोगियों के साथ एक उचित बातचीत की है. उन्होंने यह भी कहा कि अखबारों में लिखी बातों पर विश्वास न करें. बुराक ओजुगेरगिन ने कहा, ''हम सभी कोशिश कर रहे हैं कि हादसे न हों. चीजें 2020 की गर्मियों जितनी खराब नहीं हैं, लेकिन हमें बहुत सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि चीजें बहुत जल्दी खराब हो सकती हैं.”

तुर्की-ग्रीस के बीच विवाद की जड़

जानकारों की मानें तो तुर्की और ग्रीस के बीच विवाद की जड़ पूर्वी भूमध्य सागर में मौजूद एजियन द्वीप समूह है. दोनों देश समंदर के इस इलाके के द्वीपों पर अपना-अपना अधिकार बताते हैं. हालांकि, दोनों देश नाटो के सदस्य के नाते आपसी सहयोगी भी हैं, लेकिन एजियन पर प्रभुत्व की होड़ ने दोनों को एक दूसरे का जानी दुश्मन बना दिया है. 

ग्रीस और ऑस्ट्रिया में तुर्की के पूर्व राजदूत हसन गोगस के मुताबिक, एजियन सागर में द्वीपों का परिसीमन, क्षेत्रीय जल का विस्तार, टापुओं का असैन्यीकरण और हवाई क्षेत्र की लंबाई जैसे मुद्दों को लेकर ग्रीस के साथ तुर्की का विवाद है. ग्रीस इन द्वीपों पर तुर्की के अधिकार को नहीं मानता है. तुर्की का आरोप है कि ग्रीस समझौते का उल्लंघन कर रहा है. दरअसल, एजियन सागर के ज्यादातर ग्रीक टापू तुर्की की मेनलैंड के करीब हैं. इनमें कास्टेलोरिजो या कोस द्वीप भी शामिल है. तुर्की के मुताबिक, पेरिस शांति समझौते 1947 के तहत उन द्वीपों को असैन्यीकरण की शर्त पर ग्रीस को दिया गया था. ग्रीस, तुर्की के इस दावे को गलत बताता है. ग्रीस के मुताबिक, तुर्की के दावों को न तो यथास्थिति और न ही अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन है.

ग्रीस के लिए क्यों अहम है एजियन द्वीप समूह?

ग्रीस के लिए एजियन द्वीप समूह इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां भारी संख्या में यूनानी लोग रहते हैं. वहीं, एजियन सागर में यूरोप का काला सागर,  दक्षिण-पूर्वी सीमा और  मध्य पूर्व के इलाके आपस में मिलते हैं, इस वजह से यह राजनीतिक और रणनीतिक रूप से भी ग्रीस के लिए एक महत्वपूर्ण इलाका है. दोनों देशों के बीच एजियन द्वीप समूह के बंटवारे को लेकर अब तक तीन समझौते हो चुके हैं. 1923 में लॉजेन समझौता हुआ था, इसके बाद 1936 में मॉन्ट्रो समझौता और 1947 में पेरिस समझौता हुआ था. मॉन्ट्रो समझौते का उद्देश्य लॉजेन संधि में आंशिक परिवर्तन करना था.

बीबीसी के अनुसार, तुर्की  1982 के 'यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी' को भी नहीं मानता है, जिसमें  सार्वभौमिक देशों को उनके तटों से 200 नॉटिकल मील (समुद्री मील) तक की दूरी तक विशेष आर्थिक जोन (ईईजेड) बनाने का अधिकार दिया गया था. तुर्की की आपत्ति इसलिए है, क्योंकि इस संधि के हिसाब से विवादित द्वीप साइप्रस के आसपास भूमध्यसागर में ग्रीस को ज्यादा हिस्सा मिलता है. तुर्की का कहना है कि समंदर के इलाके को बराबरी के आधार पर बांटा जाए. 6 अगस्त 2020 में ग्रीस और मिस्र ने साइप्रस के आसपास भूमध्यसागर के लिए एक मैरीटाइम बॉर्डर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे. इसके बाद तुर्की ने तुरंत अपने एक ड्रिलिंग सर्वे जहाज ओरुक रीस को विवादित इलाके में भेज दिया था. 

क्षेत्रीय जल के अलावा यह मुद्दा भी विवाद का कारण

अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की और ग्रीस के बीच दो मुख्य मुद्दों क्षेत्रीय जल और क्षेत्रीय जल से परे समुद्र के भीतर हाइड्रोकार्बन का दोहन करने के संप्रभु अधिकार को लेकर लड़ाई है. 

समुद्र के संयुक्त राष्ट्र के कानून (UNCLOS) के तहत प्रत्येक राष्ट्र को अपने क्षेत्रीय समुद्र की चौड़ाई 12 समुद्री मील (22 किमी) तक स्थापित करने का अधिकार है. इसका मतलब है कि ग्रीस एजियन के 72 फीसदी से ज्यादा हिस्से पर प्रत्यक्ष संप्रभुता का दावा कर सकता है. तुर्की क्षेत्रीय जल पर द्वीपों के अधिकारों को लेकर बहस नहीं करता है, लेकिन 12 समुद्री मील की दूरी पर उसे आपत्ति है और उसने ग्रीस को यूएनसीएलओएस के तहत अधिकारों का इस्तेमाल करने पर सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है. ग्रीस और तुर्की दोनों वर्तमान में एजियन में 6 समुद्री मील (11 किमी) क्षेत्रीय जल का दावा करते हैं जो उनके अन्य तटों से 12 समुद्री मील दूर हैं.

समुद्र के संयुक्त राष्ट्र के कानून को नहीं मानता तुर्की

यूएनसीएलओएस नियम ग्रीस को एजियन और पूर्वी भूमध्य सागर में 500,000 वर्ग किमी स्पेशल इकोनॉमिक जोन प्रदान करते हैं. तुर्की ने यूएनसीएलओएस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और वह इन प्रावधानों से असहमत है. वहीं, 2019 में तुर्की ने लीबिया के साथ एक समुद्री समझौते पर हस्ताक्षर किए जो इसके पार एक गलियारे को काटता है. यूरोपीय संघ ने उस समझौते की अवैध करार दिया. इस महीने की शुरुआत में तुर्की ने गलियारे के भीतर त्रिपोली में राष्ट्रीय एकता की सरकार के साथ एक एक्प्लोरेशन एंड ड्रिलिंग समझौते पर हस्ताक्षर किए और संकेत दिया कि वह वहां सर्वेक्षण जहाजों को भेजेगा.

अंतर्राष्ट्रीय अदालत जाने को लेकर क्या है तुर्की का रुख?

ग्रीस ने हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय अदालत में स्पेशल इकोनॉमिक जोन विवाद की मध्यस्थता का सुझाव दिया है, लेकिन युद्ध के खतरे के तहत अपने क्षेत्रीय जल अधिकारों पर चर्चा करने से इनकार कर दिया है. तुर्की के राजदूत ने ओजुगेरगिन ने कहा कि एजियन में अगर ग्रीस की ओर से क्षेत्रीय जल सीमा बढ़ा दी जाती है तो तुर्की के पास बात करने के लिए वास्तव में बहुत ज्यादा समुद्र नहीं बचे हैं, जो अदालत जाना लगभग अर्थहीन बनाता है. उन्होंने कहा कि तुर्की को कोर्ट जाने से कोई आपत्ति नहीं, लेकिन वह सभी प्रासंगिक मुद्दों के साथ अदालत जाने के लिए तैयार है.

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