Indus Waters Trearty: 'इंशाअल्लाह पाकिस्तान एक और जंग लडे़गा...', सिंधु जल समझौते पर बिलावल भुट्टो की गीदड़भभकी
Indus Waters Trearty: बिलावल भुट्टो ने कहा कि अगर सिंधु जल संधि फिर से बहाल नहीं की गई तो पाकिस्तान हमला करते हुए सभी छह नदियों पर कब्जा कर सकता है. उन्होंने एक और युद्ध लड़ने की बात कही.

Indus Waters Trearty: भारत की तरफ से सिंधु जल संधि को रद्द करने का असर पाकिस्तान पर पड़ने लगा है. पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने एक बार गिदड़भभकी देते हुए युद्ध की बात कही है. बिलावल भुट्टों का बयान ऐसे समय में आया है जब भारत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि अभी सिंधु समझौता बहाल करने का हमारा कोई इरादा नहीं है.
इंशाल्लाह हम एक और जंग लडे़ंगे- बिलावल भुट्टो
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान का पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने भी विरोध किया है. बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि अगर सिंधु जल संधि फिर से बहाल नहीं की गई तो पाकिस्तान हमला करते हुए सभी छह नदियों पर कब्जा कर सकता है. उन्होंने कहा कि यदि भारत सिंधु के पानी की तरफ आंख भी दिखाता है तो इंशाल्लाह हम एक और जंग लडे़ंगे और एक बार फिर ने उन्हें शिकस्त देंगे.
'भारत के पास अब सिर्फ दो विकल्प'
बिलावल भुट्टो ने कहा, "हम इनको बताना चाहते हैं कि आपको सिंध का वादा मानना पड़ेगा. 6 में से जो तीन दरिया है वो पाकिस्तान के हवाले और बाकी तीन भारत के हवाले है. भारत के पास दो ऑप्शन हैं या तो अपना सिंधु समझौते को मानें अगर नहीं मानेंगे को पाकिस्तान एक और जंग लड़ेगा."
उन्होंने कहा, "भारत ने यह भी कोशिश की है कि दहशतगर्दी का इल्जाम पाकिस्तान पर लगा दे. भारत चाहता था कि पाकिस्तान को टेररिस्ट स्टेट घोषित किया जाए. उन्होंने (भारत) अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की ताकि हमे जो आईएमएफ से लोन मिलो उसे रोका जा सके."
सिंधु जल संधि के निलंबन से पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा?
सिंधु नदी प्रणाली में कुल छह नदियां शामिल हैं, जिनमें तीन पूर्वी नदियां रावी, ब्यास, सतलुज और तीन पश्चिमी नदियां सिंधु, झेलम, चिनाब हैं. इस समझौते के तहत भारत को पूर्वी नदियों का नियंत्रण और उपयोग का अधिकार मिला है, जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों का नियंत्रण मिला है.
पाकिस्तान की लगभग 80 प्रतिशत कृषि सिंचाई सिंधु जल प्रणाली पर निर्भर है. सिंधु जल समझौते पर भारत के रोक लगाने से पाकिस्तान में सिंधु नदी में पानी नहीं पहुंच पाएगा, जिससे जल संकट पैदा होगा और इसका सीधा असर वहां की खेती पर पड़ेगा.इसके अलावा, सिंधु नदी से जुड़े कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पाकिस्तान में हैं. पानी की कमी से इनका उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे ऊर्जा संकट गहराएगा.
Source: IOCL






















