'यह कोई झटका नहीं, बल्कि...', बांग्लादेश में करारी हार के बाद कट्टरपंथी जमात के मुखिया शफीकुर रहमान का पहला रिएक्शन
Bangladesh Shafiqur Rahman: शफीकुर रहमान ने कहा कि वह चुनाव के परिणामों को स्वीकार करते हैं और कानून के शासन का सम्मान करते हैं. उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि उनका प्रयास व्यर्थ नहीं गया.

बांग्लादेश चुनाव में तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी ने 297 में से 209 सीट जीती हैं, जबकि पाकिस्तान के करीबी मानी जाने वाली कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिली. इस बीच बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के अध्यक्ष अमीर शफीकुर रहमान ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव के परिणामों को स्वीकार करेगी और एक जिम्मेदार विपक्षी दल के रूप में काम करेगी.
कार्यकर्ताओं के प्रयास व्यर्थ नहीं गए: शफीकुर रहमान
शफीकुर रहमान ने शनिवार (14 फरवरी 2026) को फेसबुक पर पोस्ट कर कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से एक स्थिर और प्रभावी लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध रही है और उस स्थिति पर अडिग है. उन्होंने कहा कि हम चुनाव के परिणामों को स्वीकार करते हैं और कानून के शासन का सम्मान करते हैं. उन्होंने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि भले ही कुछ लोग निराश महसूस कर रहे हों, लेकिन उनके प्रयास व्यर्थ नहीं गए, क्योंकि पार्टी ने 77 सीटों पर जीत दर्ज की है.
कोई झटका नहीं, बल्कि एक नींव है: शफीकुर रहमान
शफीकुर रहमान के मुताबिक अब बांग्लादेश की संसद में उनकी पार्टी की उपस्थिति लगभग चार गुना बढ़ गई है, जिससे जमात ए इस्लामी एक मजबूत विपक्षी ताकत बन गई है. उन्होंने कहा, 'चुनाव का रिजल्ट कोई झटका नहीं, बल्कि एक नींव है. पार्टी नेतृत्व की असली परीक्षा केवल चुनाव प्रचार में ही नहीं, बल्कि जनता के फैसले को स्वीकार करने के तरीके में भी निहित है.' शफीकुर रहमान ने कहा कि उनका आंदोलन किसी एक चुनाव को लेकर नहीं है, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और बांग्लादेश के निर्माण को लेकर है.
जमात-ए-इस्लामी ने चुनाव में धांधल के आरोप लगाए
कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने आरोप लगाया कि कुछ चुनाव क्षेत्रों में नतीजों में धांधली हुई है. जमात चीफ शफीकुर रहमान ने दावा किया कि शुक्रवार (13 फरवरी 2026) रात से देश के कई हिस्सों में जमात के नेतृत्व वाले 11 पार्टी चुनाव गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं के घरों पर हमले हुए हैं. बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम अलो की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, 'अगर चुनाव के नतीजे नॉर्मल तरीके से आते हैं तो आमतौर पर कोई बड़ी आपत्ति नहीं होती है. आमतौर पर हर कोई इसे मान लेता है. अगर कोई बड़ा भेदभाव या गड़बड़ी होती है तो यह स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है.'
Source: IOCL


























