बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या, अब ऑटो रिक्शा चलाने वाले समीर को मार डाला, खून से लथपथ मिला शव
Bangladesh Violence: समीर कुमार दास लंबे समय से बैटरी से चलने वाली ऑटो-रिक्शा चलाकर अपना जीवनयापन कर रहा था. हत्या के बाद अपराधियों ने एक ऑटो-रिक्शा भी लूट लिया.

बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या कर दी गई है. पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार समीर दास नाम के ऑटो चालक को बदमाशों ने पीट-पीटकर मार डाला. समीर दास की हत्या करने के बाद बदमाश उसका रिक्शा लेकर भाग गए.
खून से लथपथ मिला समीर का शव
समीर कुमार दास लंबे समय से बैटरी से चलने वाली ऑटो-रिक्शा चलाकर अपना जीवनयापन कर रहा था. वह रविवार (11 जनवरी 2026) की रात घर नहीं लौटा तो उसके परिजन इलाके के विभिन्न स्थानों पर उसकी तलाश करने लगे. उन्होंने इस बारे में पुलिस को भी सूचित किया. रात करीब 2 बजे स्थानीय लोगों ने दक्षिण करीमपुर के मुहुरी बाड़ी के पास समीर का खून से लथपथ शव देखा. इसकी सूचना मिलने पर पुलिस ने शव बरामद कर फेनी जनरल अस्पताल भेज दिया.
मामले की जांच में जुटी स्थानीय पुलिस
दागनभुइयां थाना पुलिस के प्रभारी अधिकारी (ओसी) मोहम्मद फयज़ुल आजीम ने कहा कि घटना के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए पुलिस काम कर रही है. यह हत्या ऑटोरिक्शा लूटने के उद्देश्य से की गई है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. इस मामले में मृतक के परिवार की ओर से पहले ही मामला दर्ज कराया जा चुका है.
हिंदुओं खिलाफ बांग्लादेश में बढ़े अत्याचार
बांग्लादेश 2024 के विद्रोह के बाद से उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. यहां हिंदुओं खिलाफ कट्टरपंथियों के अत्याचार ने दुनियाभर में चिंता पैदा कर दी है. बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने देश भर में अल्पसंख्यक समुदायों पर बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. संगठन ने कहा कि बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले राष्ट्रीय चुनाव नजदीक आने के साथ ही सांप्रदायिक हिंसा खतरनाक दर से बढ़ रही है.
हिंदुओं पर हो रहे हमले को लेकर भारत ने जताई चिंता
मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के राज में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर भारत ने पिछले हफ्ते कड़ी प्रतिक्रिया दी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘हम अल्पसंख्यकों के साथ-साथ उनके घरों और व्यवसायों पर चरमपंथियों द्वारा बार-बार किए जा रहे हमलों का चिंताजनक सिलसिला देख रहे हैं. इस तरह की सांप्रदायिक घटनाओं से तुरंत और सख्ती से निपटना जरूरी है. इस तरह की अनदेखी से अपराधियों का हौसला बढ़ता है और अल्पसंख्यकों के बीच डर और असुरक्षा की भावना गहरी हो जाती है.'
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