50 साल बाद इंसान फिर चांद की ओर, आर्टेमिस-II मिशन ने भरी ऐतिहासिक उड़ान
Artemis II launch: 50 साल बाद इंसान ने एक बार फिर चांद की ओर कदम बढ़ाया है. नासा का आर्टेमिस-II मिशन चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ.

Artemis II launch: नासा का आर्टेमिस-2 मिशन आज 2 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 3:54 बजे फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक उड़ान भर चुका है. यह बहुत ही खास और ऐतिहासिक पल है, क्योंकि करीब 54 साल बाद इंसान फिर से चांद की ओर जा रहा है. इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, मिशन कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन.
आर्टेमिस-2 मिशन 54 साल बाद इंसानों को चांद के पास ले जाने वाला पहला मानव मिशन है. यह सिर्फ एक सामान्य उड़ान नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष में मानव यात्रा के एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है. साल 1972 में अपोलो-17 मिशन के बाद पहली बार इंसान चांद के पास जा रहे हैं. इस मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री ओरियन यान में बैठकर चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आएंगे. यह चांद पर उतरने वाला मिशन नहीं है, लेकिन इससे आगे चलकर चांद पर उतरने और वहां लंबे समय तक रहने की तैयारी मजबूत होगी.
54 साल बाद फिर चांद की ओर क्यों?
अपोलो कार्यक्रम 1972 में खत्म होने के बाद अमेरिका ने चांद पर जाने का सिलसिला रोक दिया था. उस वक्त राजनीति और बजट जैसे कारणों की वजह से फोकस बदलकर पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) पर आ गया. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. वैज्ञानिकों को चांद पर पानी, खनिज और दूसरे अहम संसाधनों के संकेत मिले हैं, जो भविष्य की स्पेस इकोनॉमी के लिए बहुत जरूरी माने जा रहे हैं. इसी वजह से आर्टेमिस कार्यक्रम शुरू किया गया.
आर्टेमिस II क्यों है खास?
आर्टेमिस II इस पूरे कार्यक्रम का दूसरा और बेहद अहम मिशन है. यही वो मिशन है जो इंसानों को एक बार फिर चांद की दिशा में लेकर जाएगा. यह सीधे चांद पर लैंड नहीं करेगा, लेकिन चांद के आसपास उड़ान भरकर आगे के मिशनों की तैयारी करेगा.
अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों पर भरोसा
इस बार NASA नए लोगों के बजाय अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों को प्राथमिकता दे रहा है. मिशन के कमांडर रीड वाइसमैन 50 साल के हैं और वे चांद के पास जाने वाले अब तक के सबसे उम्रदराज इंसान बनेंगे. इससे पहले यह रिकॉर्ड एलन शेपर्ड के नाम था, जो 47 साल की उम्र में चांद पर गए थे. टीम के बाकी सदस्य विक्टर ग्लोवर और जेरेमी हैनसेन भी शेपर्ड से उम्र में बड़े हैं, जबकि क्रिस्टीना कोच उनसे सिर्फ 72 दिन छोटी हैं.
पहली बार गैर अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री
इस मिशन में एक और बड़ी बात यह है कि कैनेडियन स्पेस एजेंसी के जेरेमी हैनसेन चांद के पास जाने वाले पहले गैर अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री होंगे. उनकी यह पहली स्पेस फ्लाइट होगी. उन्हें “स्पेस एडाप्टेशन सिंड्रोम” का थोड़ा खतरा है इसलिए वे शुरुआत में काफी सावधानी बरतेंगे. यह मिशन अमेरिका और कनाडा के रिश्तों को भी और मजबूत करेगा.
विक्टर ग्लोवर का ऐतिहासिक रोल
पायलट विक्टर ग्लोवर इस मिशन में इतिहास रचेंगे. वे चांद के पास जाने वाले पहले ब्लैक अंतरिक्ष यात्री बनेंगे. वे पहले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जा चुके हैं और SpaceX के ड्रैगन कैप्सूल को पायलट करने वाले पहले व्यक्ति भी रहे हैं. इस मिशन में वे ओरियन कैप्सूल को कुछ समय के लिए मैन्युअल तरीके से कंट्रोल भी करेंगे.
क्रिस्टीना कोच की नई उपलब्धि
क्रिस्टीना कोच इस मिशन में एक और रिकॉर्ड बनाएंगी. वे पहली महिला होंगी जो लो अर्थ ऑर्बिट से आगे जाकर चांद के पास तक जाएंगी. इससे पहले वे स्पेस स्टेशन पर 328 दिन तक लगातार रहने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं और पहली ऑल फीमेल स्पेसवॉक टीम का हिस्सा भी रही हैं.
Source: IOCL


























